राजस्थान में पश्चिमी क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए तीन बड़े ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे प्रस्तावित हैं—जयपुर–पचपदरा, जालोर–झालावाड़ और जयपुर से फलोदी सोलर हब तक। इन परियोजनाओं से यात्रा समय लगभग आधा रह जाएगा और औद्योगिक, व्यापारिक व लॉजिस्टिक गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। ये एक्सप्रेस-वे प्रदेश को प्रमुख राष्ट्रीय इकोनॉमिक कॉरिडोर और गुजरात के पोर्ट से जोड़कर राजस्थान की आर्थिक विकास गति को तेज करेंगे।
राजस्थान में कुल 9 नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे प्रस्तावित हैं। इनमें से 3 बड़े और अहम एक्सप्रेस-वे पश्चिमी राजस्थान को मिल रहे हैं। इन प्रोजेक्ट्स से प्रदेश के औद्योगिक, व्यापारिक और पर्यटन सेक्टर को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल तीनों परियोजनाओं पर निर्माण शुरू नहीं हुआ है। जमीन अधिग्रहण, डिजाइन और DPR तैयार करने का काम जारी है। सरकार का कहना है कि इन एक्सप्रेस-वे को बड़े इकोनॉमिक कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा, जिससे राजस्थान की कनेक्टिविटी राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी।
अभी इस रूट पर हाईवे से 390 किमी की दूरी तय करने में 6 से 7 घंटे लगते हैं। एक्सप्रेस-वे बनने के बाद यह सफर करीब 3.5 घंटे में पूरा होने का दावा है। 2. यह एक्सप्रेस-वे जालोर में अमृतसर–जामनगर इकोनॉमिक कॉरिडोर से शुरू होकर झालावाड़ में दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा।
इसकी लागत 16,000 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई गई है। यह योजना हाड़ौती, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश से पश्चिमी राजस्थान को जोड़ेगी। दोनों बड़े एक्सप्रेस-वे के जुड़ने से प्रदेश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक व्यापार करना आसान होगा।
इसकी कुल लंबाई 402 किमी है। अभी हाईवे से 578 किमी की दूरी तय करने में 10.3 घंटे लगते हैं। एक्सप्रेस-वे बनने के बाद यह सफर करीब 4 घंटे में पूरा होगा। 3. यह एक्सप्रेस-वे उत्तरी जयपुर रिंग रोड से शुरू होकर फलोदी में NH-11 से जुड़ेगा।
कुल लंबाई 345 किमी होगी। अभी हाईवे से 410 किमी की दूरी तय करने में करीब 7 घंटे लगते हैं। एक्सप्रेस-वे बनने के बाद यह समय घटकर 3.5 घंटे रह जाएगा। इसकी लागत करीब 11,000 करोड़ रुपए है। यह जयपुर, कालवाड़, जोबनेर भाटीपुरा, नावां, कुचामन, डीडवाना और नागौर होते हुए बनाया जाएगा।
इन सभी एक्सप्रेस-वे को जामनगर–अमृतसर सड़क से जोड़ा जा रहा है, जिससे राजस्थान की दूरी गुजरात के पोर्ट तक कम हो सके। पश्चिमी राजस्थान में बन रही रिफाइनरी और DMIC के तहत जोधपुर–पाली के बीच प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र को भी इसका फायदा मिलेगा।
इससे लॉजिस्टिक सुविधाएं बेहतर और तेज होंगी, जिससे उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा।
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