सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस दावे की जांच में, जिसमें कहा जा रहा है कि MGNREGA बंद कर दिया गया है और अब ग्रामीणों को रोजगार की कानूनी गारंटी नहीं मिलेगी, उपलब्ध आधिकारिक अधिसूचनाओं और रिपोर्टों के आधार पर यह दावा भ्रामक पाया गया।
"सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्हाट्सऐप समूहों में पिछले कुछ समय से एक संदेश तेजी से साझा किया जा रहा है। इस संदेश में दावा किया जा रहा है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) पूरी तरह बंद कर दी गई है और अब ग्रामीण परिवारों को रोजगार की कानूनी गारंटी नहीं मिलेगी। इस दावे के कारण कई जगह लोगों के बीच भ्रम और चिंता की स्थिति भी देखी गई।
इस वायरल दावे की उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों, सरकारी अधिसूचनाओं और प्रकाशित रिपोर्टों के आधार पर पड़ताल करने पर तस्वीर अलग सामने आती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह कहना सही नहीं है कि ग्रामीण रोजगार गारंटी व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। दस्तावेज बताते हैं कि पुराने ढांचे की जगह नए कानूनी प्रावधान लागू किए गए हैं, जिनके तहत रोजगार गारंटी व्यवस्था जारी रखने का प्रावधान किया गया है।
उपलब्ध अधिसूचना के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से नया VB-G RAM-G Act लागू किया गया है। इसमें पहले की 100 दिनों की रोजगार गारंटी को बढ़ाकर 125 दिनों तक करने का प्रावधान बताया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि नए कानून के लागू होने से पहले जिन कार्यों की शुरुआत हो चुकी थी, उन्हें पुराने MGNREGA ढांचे के तहत ही पूरा किया जाएगा, ताकि पहले से चल रहे कार्य प्रभावित न हों।
रिपोर्टों में यह भी उल्लेख है कि नए कानून में केवल रोजगार अवधि बढ़ाने का ही प्रावधान नहीं है, बल्कि समय पर मजदूरी भुगतान, भुगतान में देरी होने पर मुआवजे और निर्धारित समय में काम उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ते जैसी व्यवस्थाओं को भी लिखित रूप से शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य रोजगार गारंटी प्रणाली को अधिक स्पष्ट और जवाबदेह बनाना बताया गया है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति और अधिसूचना के अलावा आर्थिक रिपोर्टों में भी नए कार्यक्रम के बजट और रोजगार गारंटी अवधि बढ़ाए जाने का उल्लेख किया गया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में भी इस बदलाव को ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के पुनर्गठन (Revamp) के रूप में पेश किया गया है, न कि रोजगार गारंटी समाप्त करने के रूप में।
यही वजह है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित यह दावा कि ""MGNREGA बंद हो गया है और अब गांवों में रोजगार की कोई कानूनी गारंटी नहीं रहेगी"", उपलब्ध दस्तावेजों और रिपोर्टों से मेल नहीं खाता। उपलब्ध तथ्यों के अनुसार, रोजगार गारंटी व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त नहीं किया गया है, बल्कि नए ढांचे के साथ आगे बढ़ाया गया है। कुछ प्रावधानों में रोजगार के दिनों का विस्तार किया गया है, जबकि वित्तीय निगरानी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक सख्त बनाए जाने की बात भी सामने आती है।
ग्रामीण मजदूरों और लाभार्थियों के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी योजना का वास्तविक प्रभाव उसके जमीनी क्रियान्वयन पर निर्भर करता है। यदि समय पर काम उपलब्ध कराया जाता है, मजदूरी का भुगतान निर्धारित अवधि में होता है और अधिसूचना में दिए गए प्रावधानों का पालन किया जाता है, तो रोजगार और भुगतान सुरक्षा दोनों में लाभ मिल सकता है। वहीं, यदि स्थानीय स्तर पर कार्यान्वयन में देरी या प्रशासनिक बाधाएं बनी रहती हैं, तो केवल नाम या कानूनी ढांचे में बदलाव से सभी समस्याओं का स्वतः समाधान नहीं होगा।
निष्कर्ष: उपलब्ध आधिकारिक अधिसूचनाओं और प्रकाशित रिपोर्टों के आधार पर यह दावा कि ""MGNREGA बंद हो गया है और अब गांवों में रोजगार की गारंटी खत्म हो गई है"" तथ्यात्मक रूप से गलत पाया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रोजगार गारंटी व्यवस्था को नए कानूनी ढांचे के साथ जारी रखा गया है और उसमें कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों में बदलाव भी किए गए हैं।
FactCheck MGNREGA RuralEmployment EmploymentGuarantee GraminVikas GovernmentScheme NetGramNews
Disclaimer
Disclaimer:
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI.
Published by: Sadiq Tak. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.