सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र के लोहागढ़ किले का एक पुराना वीडियो हाल की पर्यटक भीड़ बताकर शेयर किया जा रहा है। PTI Fact Check की जांच में सामने आया कि वीडियो वर्तमान स्थिति का नहीं है और इसे गलत संदर्भ में वायरल किया गया।
"सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। दावा किया जा रहा था कि महाराष्ट्र के प्रसिद्ध लोहागढ़ किले (Lohagad Fort) पर हाल के वीकेंड में भारी भीड़ उमड़ी और प्रशासन भीड़ प्रबंधन में पूरी तरह विफल रहा। लेकिन PTI Fact Check की जांच में यह दावा सही नहीं पाया गया। जांच के अनुसार, वायरल किया जा रहा वीडियो पुराना है और इसका मौजूदा हालात से कोई संबंध नहीं है।
फैक्ट चेक टीम ने वीडियो की पड़ताल के दौरान उसके विजुअल संकेतों, पुराने सोशल मीडिया पोस्ट और उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड का मिलान किया। इस प्रक्रिया में स्पष्ट हुआ कि जिस वीडियो को वर्तमान वीकेंड की तस्वीर बताकर साझा किया जा रहा है, वह पहले के समय का है। इसलिए इसे मौजूदा पर्यटन व्यवस्था या प्रशासनिक लापरवाही का प्रमाण मानना भ्रामक है।
हाल के वर्षों में सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो और तस्वीरों को नए घटनाक्रम से जोड़कर साझा करने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में बिना संदर्भ के प्रसारित सामग्री लोगों के बीच गलत धारणा बना सकती है। यही वजह है कि किसी भी वायरल वीडियो को अंतिम सत्य मानने से पहले उसकी तारीख, स्थान और मूल स्रोत की पुष्टि करना आवश्यक माना जाता है।
PTI Fact Check ने अपनी जांच में यह भी स्पष्ट किया कि वीडियो को वर्तमान भीड़ का प्रमाण बताने वाला दावा उपलब्ध तथ्यों से मेल नहीं खाता। जांच के दौरान मिले पुराने संदर्भों ने पुष्टि की कि वीडियो पहले भी इंटरनेट पर मौजूद था। इसलिए इसे हालिया वीकेंड की स्थिति बताकर साझा करना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।
विशेषज्ञ लगातार सलाह देते रहे हैं कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले किसी भी वीडियो या तस्वीर को केवल उसके वायरल होने के आधार पर सही नहीं माना जाना चाहिए। कई बार पुराने दृश्य नए दावों के साथ दोबारा साझा किए जाते हैं, जिससे गलत सूचना तेजी से फैलती है। ऐसे मामलों में विश्वसनीय फैक्ट चेक संस्थाओं या आधिकारिक स्रोतों की जांच उपयोगी साबित होती है।
यदि किसी वायरल पोस्ट में घटना की तारीख, स्थान या संदर्भ स्पष्ट नहीं हो, तो उसे साझा करने से पहले अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। वीडियो में मौसम, भीड़, कपड़ों, पुराने वॉटरमार्क या पहले प्रकाशित पोस्ट जैसे संकेत भी उसकी वास्तविक समय-सीमा समझने में मदद कर सकते हैं।
PTI Fact Check ने लोगों से अपील की है कि संदिग्ध दावों या वायरल कंटेंट को बिना सत्यापन आगे न बढ़ाएं। संस्था ने यह भी बताया कि संदिग्ध फोटो या वीडियो की जांच के लिए लोग उसके आधिकारिक माध्यमों पर सामग्री भेज सकते हैं, ताकि गलत सूचना का समय रहते सत्यापन किया जा सके।
इस पूरे मामले में निष्कर्ष यही है कि लोहागढ़ किले का वायरल वीडियो वर्तमान वीकेंड की भीड़ का नहीं है। इसलिए इसे प्रशासनिक व्यवस्था या मौजूदा परिस्थितियों का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा। सोशल मीडिया पर किसी भी दावे को स्वीकार करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करना जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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