अफ्रीकी देश अंगोला के लिसिमा पठार में वैज्ञानिकों ने कई ऐसी प्रजातियों का रिकॉर्ड तैयार किया है जिनका अब तक औपचारिक वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण नहीं हुआ था। इस खोज ने क्षेत्र को जैवविविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित किया है और संरक्षण की जरूरत पर भी जोर दिया है।
अफ्रीकी देश अंगोला का लिसिमा पठार (Lisima Plateau) एक बार फिर वैज्ञानिकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। हाल ही में यहां किए गए विस्तृत जैव विविधता सर्वेक्षण में शोधकर्ताओं ने पौधों, कीटों, मकड़ियों और अन्य छोटे जीवों की कई ऐसी प्रजातियां दर्ज की हैं, जिन्हें अब तक विज्ञान की दुनिया में औपचारिक रूप से पहचान नहीं मिली थी। इस खोज को अंगोला की प्राकृतिक संपदा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह सर्वेक्षण फरवरी 2026 में किया गया था। वैज्ञानिकों का कहना है कि लिसिमा पठार लंबे समय तक अपनी दुर्गम भौगोलिक स्थिति और अंगोला में वर्षों तक चले गृहयुद्ध के कारण वैज्ञानिक शोध से लगभग अछूता रहा। यही वजह है कि इस इलाके की जैव विविधता के बारे में अब तक बहुत कम जानकारी उपलब्ध थी।
सर्वेक्षण के दौरान शोधकर्ताओं ने ड्रैगनफ्लाई की आठ नई संभावित प्रजातियां, ग्रासहॉपर (टिड्डे) की तीन नई प्रजातियां और करीब 60 नई तितलियों एवं मॉथ (पतंगों) का रिकॉर्ड तैयार किया। इसके अलावा वैज्ञानिकों को एक ऐसी क्राउनड क्रैब स्पाइडर भी मिली, जो अल्ट्रावायलेट (यूवी) रोशनी में चमकती है। साथ ही एक नई आर्मर्ड शिकारी क्रिकेट, कॉपर कैटरपिलर और लेडीबर्ड जैसी दिखने वाली एक विशेष मकड़ी भी खोजी गई।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इन सभी नई प्रजातियों का औपचारिक वैज्ञानिक नामकरण अभी बाकी है। इसके लिए इनके डीएनए, शारीरिक संरचना और अन्य जैविक विशेषताओं का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मानकों के अनुसार किसी भी नई प्रजाति को आधिकारिक मान्यता मिलने से पहले कई चरणों की जांच और पुष्टि की जाती है।
लिसिमा पठार केवल जैव विविधता के लिए ही नहीं, बल्कि अफ्रीका की जल व्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। यहां से कांगो, ओकावांगो, ज़ाम्बेजी और कुआंज़ा जैसी चार प्रमुख नदी प्रणालियों का उद्गम होता है। इन नदियों का पानी लाखों लोगों, वन्यजीवों और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जीवनरेखा का काम करता है।
शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र की जैव विविधता पर वनों की कटाई, अवैध या छोटे स्तर पर हीरा खनन और झूम कृषि जैसी मानवीय गतिविधियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते संरक्षण के प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो कई दुर्लभ प्रजातियां वैज्ञानिक पहचान मिलने से पहले ही हमेशा के लिए खत्म हो सकती हैं।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि पृथ्वी पर करीब 87 लाख (8.7 मिलियन) जीव-जंतुओं और पौधों की प्रजातियां मौजूद हैं, लेकिन अब तक केवल लगभग 15 लाख (1.5 मिलियन) प्रजातियों की ही वैज्ञानिक पहचान हो सकी है। ऐसे में अंगोला के लिसिमा पठार में हुई यह खोज दुनिया की जैव विविधता को समझने और उसके संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
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