असम सरकार ने वान महोत्सव के अवसर पर ‘ग्रीन विज़न’ के तहत मेगा प्लांटेशन ड्राइव और Indigenous Fruit Mission की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय पेड़ों और पारंपरिक फल प्रजातियों का संरक्षण, ग्रामीण पोषण को बढ़ावा देना और पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
असम सरकार ने राज्य में हरित आवरण बढ़ाने और पारंपरिक फल प्रजातियों के संरक्षण के उद्देश्य से ‘ग्रीन विज़न’ के तहत मेगा प्लांटेशन ड्राइव और Indigenous Fruit Mission की शुरुआत की है। इस अभियान का शुभारंभ पोबितोरा वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी से किया गया, जहां मंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों, स्थानीय नागरिकों और स्वयंसेवकों के साथ मिलकर पौधारोपण किया। यह कार्यक्रम वान महोत्सव के अवसर पर आयोजित किया गया, जिससे पर्यावरण संरक्षण के संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की कोशिश की गई।
NDTV की रिपोर्ट और राज्य वन विभाग के बुलेटिन के अनुसार, अभियान के पहले दिन ही स्थानीय प्रजातियों के दर्जनों पौधे लगाए गए। सरकार का कहना है कि यह पहल केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले समय में राज्य के विभिन्न हिस्सों में बड़े स्तर पर इसे आगे बढ़ाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसी देशज प्रजातियों को बढ़ावा देना है, जो असम की जलवायु और प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप हों।
असम अपनी समृद्ध जैव-विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के लिए जाना जाता है। राज्य में कई ऐसी पारंपरिक फल प्रजातियां मौजूद हैं, जो स्थानीय खान-पान और ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में चाय, रबर और अन्य व्यावसायिक फसलों के विस्तार के कारण कई देशज पेड़ और फल धीरे-धीरे कम होते गए। सरकार का मानना है कि इन प्रजातियों का संरक्षण पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और खाद्य परंपराओं को भी मजबूत करेगा।
इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए Indigenous Fruit Mission शुरू किया गया है। इस मिशन का उद्देश्य गांवों में ऐसे फलदार पेड़ लगाने को प्रोत्साहित करना है, जो स्थानीय मौसम में आसानी से विकसित हो सकें और परिवारों की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करें। सरकार का मानना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक फलदार वृक्षों की संख्या बढ़ती है, तो लोगों को घर के आसपास ही पौष्टिक फल उपलब्ध हो सकेंगे और स्थानीय स्तर पर इनके संरक्षण की संस्कृति भी विकसित होगी।
वन विभाग की योजना के अनुसार, अभियान को केवल वन क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसके तहत स्कूलों, पंचायतों और ग्रामीण समुदायों की भागीदारी बढ़ाने के लिए छोटे-छोटे पौधारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों का उद्देश्य लोगों, विशेषकर युवाओं और विद्यार्थियों को स्थानीय जैव-विविधता के महत्व से जोड़ना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना है।
विशेषज्ञ लंबे समय से इस बात पर जोर देते रहे हैं कि केवल बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण पर्याप्त नहीं होता, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप देशज प्रजातियों का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ऐसी प्रजातियां स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा होती हैं और जैव-विविधता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। यही कारण है कि इस अभियान में स्थानीय पेड़ों और फलदार पौधों को प्राथमिकता दी गई है।
सरकार का मानना है कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहयोग दे सकती है। यदि गांवों में पारंपरिक फलदार वृक्षों का दायरा बढ़ता है, तो परिवारों को घरेलू उपयोग के लिए पौष्टिक फल मिल सकेंगे। साथ ही स्थानीय स्तर पर इनकी देखभाल, पौध उत्पादन और संरक्षण से जुड़े कार्यों के माध्यम से रोजगार के अवसर भी विकसित हो सकते हैं।
अभियान के तहत आने वाले समय में राज्य के विभिन्न जिलों में चरणबद्ध तरीके से पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है। सरकार ने इसे वान महोत्सव से जोड़ते हुए जनभागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया है, ताकि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम न रहकर सामाजिक भागीदारी का अभियान बन सके।
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