भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पश्चिमी राजस्थान में 3 से 5 जुलाई के बीच धूल भरी आंधी और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। जोधपुर और आसपास के इलाकों में तेज़ हवाओं व बदलते मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2 जुलाई की रात जारी अपने ऑल इंडिया वेदर बुलेटिन में पश्चिमी राजस्थान के लिए मौसम में बदलाव का संकेत दिया है। विभाग के अनुसार 3 से 5 जुलाई के बीच पश्चिमी राजस्थान के कई हिस्सों में धूल भरी आंधी चलने की संभावना है। इसी दौरान कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश भी हो सकती है। इस पूर्वानुमान का असर जोधपुर और आसपास के जिलों में भी देखने को मिल सकता है, जहां तेज़ हवाओं के साथ मौसम अचानक बदलने की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी राजस्थान में धूल भरी आंधी की गतिविधियां बढ़ सकती हैं, जबकि पूर्वी राजस्थान में 5 से 7 जुलाई के दौरान व्यापक स्तर पर बारिश होने का अनुमान है। बारिश की इस गतिविधि से राज्य के कई हिस्सों में तापमान में गिरावट आने की संभावना है। हालांकि पश्चिमी राजस्थान के लिए मुख्य चिंता तेज़ हवाएं और धूल भरी आंधियां हैं।
जोधपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों के दौरान दिन में गर्मी बनी रह सकती है, लेकिन शाम या रात के समय मौसम का मिजाज बदल सकता है। तेज़ हवाओं के साथ धूल उड़ने और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना के चलते लोगों को मौसम के ताज़ा अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून धीरे-धीरे राजस्थान के अधिक इलाकों की ओर बढ़ रहा है। इसी वजह से राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का स्वरूप बदल रहा है। पश्चिमी राजस्थान में मानसून की सक्रियता अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर आंधी और हल्की बारिश जैसी गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। दूसरी ओर, पूर्वी राजस्थान में मानसून के प्रभाव के कारण अधिक व्यापक वर्षा होने का अनुमान लगाया गया है।
धूल भरी आंधी के दौरान दृश्यता कम हो सकती है, जिससे राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर वाहन चालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी। दोपहिया वाहन चालकों, लंबी दूरी तय करने वाले ड्राइवरों और खुले स्थानों पर काम करने वाले लोगों को मौसम खराब होने की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर रुकने की सलाह दी जाती है।
स्वास्थ्य की दृष्टि से भी ऐसे मौसम में सतर्कता जरूरी है। हवा में धूल के कण बढ़ने से सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों, बुजुर्गों और बच्चों को दिक्कत हो सकती है। विशेषज्ञों की सामान्य सलाह के अनुसार, तेज़ धूलभरी हवा के दौरान अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। आवश्यकता होने पर मास्क और आंखों की सुरक्षा का उपयोग करना लाभदायक हो सकता है।
मौसम में संभावित बदलाव का असर दैनिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। खुले में आयोजित कार्यक्रमों, निर्माण कार्यों और खेतों में काम करने वाले लोगों को मौसम के अनुसार अपनी योजना बनाने की जरूरत पड़ सकती है। तेज़ हवाओं के दौरान ढीली वस्तुओं और अस्थायी ढांचों से दूरी बनाए रखना भी सुरक्षित माना जाता है।
मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे आधिकारिक मौसम बुलेटिन और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सूचनाओं पर ध्यान दें। मौसम तेजी से बदलने की स्थिति में अनावश्यक यात्रा से बचें और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहें। आने वाले दिनों में मानसून की प्रगति के साथ मौसम की स्थिति में और बदलाव संभव है, इसलिए ताज़ा पूर्वानुमान पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
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