सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन का नया AI एग्जीक्यूटिव ऑर्डर हर AI मॉडल को लॉन्च से पहले सरकारी लाइसेंस लेने के लिए बाध्य करेगा। आधिकारिक दस्तावेज़ों और विश्वसनीय रिपोर्टों की जांच में यह दावा गलत पाया गया।
"अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर जारी नई नीतियों के बीच सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से फैल रहा है। कई पोस्ट में कहा जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन के नए AI एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के तहत अब किसी भी नए AI मॉडल को सार्वजनिक रूप से जारी करने से पहले सरकार से अनिवार्य लाइसेंस लेना होगा। कुछ पोस्ट इसे AI उद्योग पर सरकारी नियंत्रण और नवाचार पर रोक के तौर पर पेश कर रही हैं। लेकिन उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज़ों और विश्वसनीय रिपोर्टों की समीक्षा इस दावे की पुष्टि नहीं करती।
फैक्ट-चेक में सामने आया कि वायरल दावा वास्तविक आदेश की भाषा और उसके उद्देश्य से मेल नहीं खाता। व्हाइट हाउस की ओर से जारी एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो AI मॉडल विकसित करने, प्रकाशित करने या रिलीज़ करने से पहले अनिवार्य सरकारी लाइसेंस, प्री-क्लियरेंस या परमिट सिस्टम लागू करता हो। दस्तावेज़ में स्पष्ट किया गया है कि इसे किसी अनिवार्य लाइसेंसिंग व्यवस्था के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए।
इस आदेश का मुख्य उद्देश्य उन्नत AI तकनीकों के विकास के दौरान सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और जिम्मेदार उपयोग से जुड़े मानकों को मजबूत करना है। इसके तहत सरकार और उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है ताकि अत्यधिक सक्षम AI प्रणालियों से जुड़े संभावित जोखिमों का बेहतर आकलन किया जा सके। आदेश का फोकस नियामकीय सहयोग पर है, न कि हर डेवलपर के लिए नई लाइसेंस व्यवस्था लागू करने पर।
NPR की रिपोर्ट के अनुसार, इस नीति में अग्रिम श्रेणी के शक्तिशाली AI मॉडल विकसित करने वाली कंपनियों से अनुरोध किया गया है कि वे अपनी कुछ प्रणालियों को स्वैच्छिक आधार पर सीमित अवधि के लिए सरकारी परीक्षण और मूल्यांकन के लिए उपलब्ध कराएं। यह व्यवस्था ""वॉलंटरी"" यानी स्वैच्छिक है और इसे कानूनी बाध्यता के रूप में लागू नहीं किया गया है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि बिना सरकारी अनुमति कोई AI मॉडल जारी नहीं किया जा सकेगा।
कानूनी विश्लेषण भी इसी निष्कर्ष की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का आकलन है कि आदेश उद्योग और सरकार के बीच सूचना साझा करने तथा सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने के लिए सहयोगी ढांचा तैयार करता है। इसमें ऐसी कोई व्यवस्था शामिल नहीं है जो सभी AI डेवलपर्स के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य बना दे या हर मॉडल को रिलीज़ से पहले सरकारी मंजूरी से जोड़ दे।
सोशल मीडिया पर नीतियों से जुड़ी अधूरी या भ्रामक जानकारी अक्सर तेजी से फैलती है। तकनीकी और नियामकीय विषयों में दस्तावेज़ों की भाषा जटिल होने के कारण कई बार स्वैच्छिक प्रक्रियाओं को भी अनिवार्य नियम के रूप में पेश कर दिया जाता है। यही वजह है कि आधिकारिक आदेश और विश्वसनीय रिपोर्टों को पढ़े बिना किसी वायरल दावे पर भरोसा करना भ्रम पैदा कर सकता है।
AI स्टार्टअप, डेवलपर्स और तकनीकी कंपनियों के लिए यह तथ्य महत्वपूर्ण है क्योंकि गलत जानकारी निवेश, उत्पाद विकास और नियामकीय जोखिम को लेकर अनावश्यक आशंकाएं पैदा कर सकती है। मौजूदा दस्तावेज़ों के आधार पर यह स्पष्ट है कि अमेरिकी नीति फिलहाल सुरक्षा सहयोग, जिम्मेदार AI विकास और जोखिम मूल्यांकन पर केंद्रित है, न कि सभी AI मॉडलों के लिए अनिवार्य सरकारी लाइसेंसिंग लागू करने पर।
इसलिए वायरल दावा कि ट्रंप प्रशासन का नया AI एग्जीक्यूटिव ऑर्डर हर AI मॉडल की रिलीज़ से पहले सरकारी लाइसेंस लेना अनिवार्य करता है, उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज़ों और विश्वसनीय रिपोर्टों के आधार पर गलत साबित होता है। आदेश में स्वैच्छिक सहयोग का प्रावधान है, लेकिन डेवलपर्स पर अनिवार्य लाइसेंसिंग या प्री-क्लियरेंस की कानूनी बाध्यता नहीं लगाई गई है।
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