केंद्र के नए आदेश के तहत तंबाकू और निकोटीन युक्त सभी उत्पादों को सख्त नियामकीय दायरे में लाया गया है। गुटखा, पान मसाला, जर्दा, खैनी समेत अन्य उत्पादों पर भी नए नियम लागू होंगे, जिनका असर बिक्री, पैकेजिंग और विपणन पर पड़ सकता है।
"देश में तंबाकू और निकोटीन युक्त उत्पादों के नियमन को और सख्त करने की दिशा में नया कदम उठाया गया है। जारी आदेश के अनुसार अब गुटखा, पान मसाला, जर्दा, खैनी और अन्य सभी तंबाकू या निकोटीन युक्त उत्पाद एक समान नियामकीय दायरे में आएंगे। इसका उद्देश्य ऐसे उत्पादों की बिक्री, पैकेजिंग और प्रचार-प्रसार पर स्पष्ट नियम लागू करना है, ताकि किसी भी श्रेणी या ब्रांड को नियमों से बाहर न रखा जा सके।
नए आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी तंबाकू और निकोटीन युक्त उत्पादों पर समान रूप से नियम लागू होंगे। इससे उन उत्पादों पर भी निगरानी बढ़ेगी जो अब तक अलग-अलग श्रेणियों या ब्रांडिंग के आधार पर नियामकीय अस्पष्टता का लाभ उठाते रहे थे। स्वास्थ्य चेतावनी, पैकेजिंग मानकों और विपणन से जुड़े प्रावधानों के पालन को लेकर कंपनियों की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी।
इस फैसले का असर उत्पाद बनाने वाली कंपनियों के साथ-साथ खुदरा कारोबार पर भी पड़ सकता है। पैकेजिंग में बदलाव, अनिवार्य चेतावनी संदेशों का पालन और बिक्री से जुड़े नियमों को लागू करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट होगी। इससे प्रवर्तन एजेंसियों को भी यह तय करने में आसानी होगी कि किन उत्पादों पर स्वास्थ्य संबंधी नियम लागू किए जाने हैं।
तंबाकू और निकोटीन युक्त उत्पाद लंबे समय से सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय रहे हैं। विशेष रूप से बिना धुएं वाले उत्पाद, जैसे गुटखा, जर्दा और खैनी, कई गंभीर बीमारियों के जोखिम से जुड़े माने जाते हैं।
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