अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6–3 के बहुमत से ट्रम्प प्रशासन की ‘मीटरिंग’ नीति को वैध ठहराया है। फैसले के बाद यूएस–मेक्सिको सीमा पर हर दिन सीमित संख्या में ही लोगों को शरण_
"अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने इमिग्रेशन और शरण नीति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में ट्रम्प प्रशासन के पक्ष में फैसला सुनाते हुए यूएस–मेक्सिको सीमा पर लागू की गई ""मीटरिंग"" नीति को मंजूरी दे दी है। 6–3 के बहुमत से आए इस फैसले के बाद सीमा पर आने वाले लोगों के लिए शरण (असाइलम) आवेदन की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सीमित हो सकती है।
अदालत ने उन निचली अदालतों के आदेशों को पलट दिया, जिनके जरिए इस नीति पर रोक लगाने की कोशिश की गई थी। फैसले के साथ ही अमेरिकी प्रशासन को सीमा पर हर दिन तय संख्या में ही लोगों को पोर्ट-ऑफ-एंट्री के माध्यम से शरण के लिए आवेदन करने की अनुमति देने का कानूनी आधार मिल गया है।
'मीटरिंग' ऐसी व्यवस्था है, जिसमें सीमा चौकियों पर प्रतिदिन सीमित संख्या में ही लोगों के आवेदन स्वीकार किए जाते हैं। यदि निर्धारित संख्या पूरी हो जाती है तो बाकी लोगों को अगले दिन या उससे भी अधिक समय तक इंतजार करना पड़ सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक क्षमता और सीमा प्रबंधन को नियंत्रित रखना बताया जाता है।
इस फैसले के बाद शरण की मांग करने वाले लोगों को आवेदन का अवसर मिलने में लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। खासकर उन लोगों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है जो हिंसा, राजनीतिक अस्थिरता, उत्पीड़न या गंभीर मानवीय संकट वाले देशों से अमेरिका पहुंचते हैं और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा की उम्मीद में शरण मांगते हैं।
मानवाधिकार संगठनों ने इस निर्णय पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि लंबी प्रतीक्षा के कारण कई लोगों को सीमा के आसपास असुरक्षित परिस्थितियों में रहना पड़ सकता है। उनका तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी कानून शरण मांगने के अधिकार को मान्यता देते हैं और आवेदन की प्रक्रिया तक पहुंच सीमित होने से यह अधिकार व्यवहारिक रूप से कमजोर हो सकता है।
दूसरी ओर, नीति के समर्थकों का कहना है कि अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर लगातार बढ़ते दबाव, सीमित संसाधनों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को देखते हुए नियंत्रित और व्यवस्थित प्रक्रिया आवश्यक है। उनके अनुसार, यदि आवेदन स्वीकार करने की संख्या पर नियंत्रण नहीं रखा जाए तो सीमा प्रबंधन और अधिक कठिन हो सकता है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला केवल मौजूदा नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की इमिग्रेशन नीतियों पर भी प्रभाव डाल सकता है। यदि आने वाले वर्षों में कोई भी अमेरिकी प्रशासन शरण संबंधी नियमों को और सख्त बनाना चाहे, तो वह इस फैसले को कानूनी मिसाल के रूप में पेश कर सकता है।
यह निर्णय अमेरिकी न्यायपालिका के उस दृष्टिकोण की भी झलक देता है, जिसमें इमिग्रेशन से जुड़े मामलों में संघीय सरकार के अधिकारों को लेकर अदालत का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत के इस फैसले से भविष्य में शरण और सीमा प्रबंधन से जुड़े कई मामलों की सुनवाई पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
इसका प्रभाव केवल अमेरिका तक सीमित नहीं माना जा रहा। जिन देशों के नागरिक राजनीतिक संकट, हिंसा या असुरक्षा के कारण अमेरिका में शरण लेने की कोशिश करते हैं, उनके लिए यह फैसला महत्वपूर्ण है क्योंकि अब शरण आवेदन की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
शरणार्थियों के साथ काम करने वाले गैर-सरकारी संगठन, लीगल एड संस्थाएं और मानवाधिकार समूह भी इस फैसले के बाद अपनी कानूनी रणनीतियों की समीक्षा कर रहे हैं। कुछ संगठनों ने संकेत दिया है कि वे इस नीति को अन्य कानूनी आधारों पर चुनौती देने के विकल्प तलाशेंगे। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 'मीटरिंग' नीति प्रभावी रहेगी और इसमें किसी बदलाव के लिए नई कानूनी या नीतिगत प्रक्रिया की आवश्यकता होगी।"
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