सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो को DRDO के हाई-कैलिबर बम परीक्षण में हादसा बताकर शेयर किया जा रहा है। PIB Fact Check ने स्पष्ट किया है कि यह दावा गलत है और वीडियो हरियाणा के रामगढ़ स्थित DRDO की प्रयोगशाला में हुए सफल परीक्षण का है।
"सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से साझा किया जा रहा है, जिसमें बड़े धमाके का दृश्य दिखाई देता है। इस वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के हाई-कैलिबर बम का परीक्षण दुर्घटनाग्रस्त हो गया और बम तय समय से पहले ही फट गया। इस दावे के वायरल होने के बाद कई लोगों ने इसे रक्षा क्षेत्र की बड़ी विफलता बताते हुए अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर साझा करना शुरू कर दिया।
इस दावे की जांच भारत सरकार की आधिकारिक फैक्ट-चेक इकाई PIB Fact Check ने की। जांच में यह दावा पूरी तरह भ्रामक पाया गया। PIB ने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो किसी दुर्घटना का नहीं, बल्कि DRDO की टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL), रामगढ़, पंचकूला (हरियाणा) में किए गए हाई-कैलिबर बम के सफल परीक्षण का है। वीडियो में दिखाई देने वाला विस्फोट परीक्षण प्रक्रिया का सामान्य और नियोजित हिस्सा था।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार परीक्षण नियंत्रित वातावरण में निर्धारित सुरक्षा मानकों और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के तहत किया गया था। ऐसे परीक्षणों के दौरान विस्फोट, दबाव तरंग (शॉकवेव) और मलबे का फैलाव परीक्षण का हिस्सा होते हैं, जिनका वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से अध्ययन किया जाता है। इसलिए वीडियो में दिखाई देने वाला दृश्य किसी तकनीकी विफलता या आकस्मिक विस्फोट का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
PIB Fact Check ने यह भी स्पष्ट किया कि परीक्षण के दौरान किसी नागरिक क्षेत्र, सैन्य प्रतिष्ठान या आसपास के इलाके में किसी तरह के नुकसान या अनियंत्रित स्थिति की सूचना नहीं थी। सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा दावा तथ्यों से मेल नहीं खाता और लोगों को भ्रमित करने वाला है।
रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर गलत जानकारी का प्रसार कई बार लोगों में अनावश्यक भ्रम पैदा कर सकता है। किसी वीडियो का मूल संदर्भ हटाकर उसे अलग दावे के साथ साझा करने से वास्तविक घटना की तस्वीर बदल जाती है। ऐसे मामलों में बिना पुष्टि के जानकारी आगे बढ़ाने से भ्रामक कथाएं तेजी से फैलती हैं।
PIB Fact Check ने लोगों से अपील की है कि रक्षा, विज्ञान या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े किसी भी वायरल वीडियो या दावे पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करें। यदि कोई संदिग्ध सामग्री दिखाई दे तो उसे संबंधित फैक्ट-चेक प्लेटफॉर्म पर भेजकर सत्यापन कराया जा सकता है। इससे फर्जी सूचनाओं के प्रसार को रोकने में मदद मिलती है।
डिजिटल माध्यमों पर वीडियो और तस्वीरों को भ्रामक कैप्शन के साथ साझा करने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। कई बार वास्तविक घटनाओं के दृश्य को गलत संदर्भ देकर वायरल कर दिया जाता है, जिससे आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन जाती है। इसलिए किसी भी वायरल पोस्ट को सही मानने से पहले उसके स्रोत और आधिकारिक पुष्टि की जांच करना जरूरी है।
यह फैक्ट-चेक पहले जारी किया जा चुका है, लेकिन संबंधित वीडियो अब भी विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पुराने दावों के साथ साझा किया जा रहा है। ऐसे मामलों में केवल वायरल होने के आधार पर किसी दावे को सही नहीं माना जाना चाहिए। आधिकारिक पुष्टि और विश्वसनीय फैक्ट-चेक के आधार पर ही किसी सूचना पर भरोसा करना उचित है।
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