देश में लगभग एक वर्ष बाद पहली बार एलपीजी (कुकिंग गैस) की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों और मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण आयात महंगा हुआ है, जिसके चलते तेल विपणन कंपनियों ने यह फैसला लिया है।
"देशभर के करोड़ों घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस से जुड़ी अहम खबर सामने आई है। भारतीय तेल विपणन कंपनियों ने लगभग एक साल बाद घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की है। लंबे समय तक कीमतों में स्थिरता रहने के बाद यह पहला बदलाव माना जा रहा है। कीमतों में वृद्धि का प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की बढ़ती लागत और मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के चलते आपूर्ति पर पड़ा असर बताया जा रहा है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक हाल के सप्ताहों में वैश्विक एलपीजी बाजार में तेजी दर्ज की गई है। मध्य-पूर्व क्षेत्र में जारी युद्ध और उससे जुड़े भू-राजनीतिक तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। कई प्रमुख निर्यात मार्गों पर अनिश्चितता बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतें ऊपर चली गई हैं। चूंकि भारत अपनी घरेलू जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में बदलाव का असर सीधे देश के बाजार पर पड़ता है।
तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय खरीद लागत बढ़ने के कारण घरेलू बाजार में भी कीमतों में संशोधन करना आवश्यक हो गया। बीते एक वर्ष के दौरान कंपनियों ने कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया था, लेकिन अब आयात लागत बढ़ने से मूल्य वृद्धि का दबाव बढ़ गया है।
स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने घरेलू रिफाइनरों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने रिफाइनिंग कंपनियों से उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर उत्पादन बढ़ाने को कहा है, ताकि घरेलू बाजार में गैस की उपलब्धता बनी रहे और संभावित कमी की स्थिति से बचा जा सके। इसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता का कुछ हिस्सा घरेलू उत्पादन से संतुलित करना भी है।
एलपीजी देश के अधिकांश शहरी और अर्ध-शहरी परिवारों में खाना पकाने का प्रमुख ईंधन है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ सकता है। विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों के मासिक खर्च में इसका प्रभाव दिखाई दे सकता है। पहले से खाद्य पदार्थों, बिजली और अन्य आवश्यक सेवाओं पर बढ़ते खर्च के बीच रसोई गैस महंगी होने से घरेलू आर्थिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका असर महसूस किया जा सकता है। पिछले कुछ वर्षों में स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एलपीजी कनेक्शन का दायरा बढ़ाया गया है। ऐसे में कीमतों में वृद्धि उन परिवारों के लिए अतिरिक्त खर्च का कारण बन सकती है जो नियमित रूप से एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करते हैं।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकार लंबे समय से यह मानते रहे हैं कि भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाएं केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि एलपीजी जैसे आवश्यक ईंधनों की कीमतों को भी प्रभावित करती हैं। मध्य-पूर्व दुनिया के प्रमुख ऊर्जा उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है और वहां किसी भी तरह का तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा कर सकता है।
सरकार फिलहाल घरेलू आपूर्ति व्यवस्था पर नजर बनाए हुए है। उत्पादन बढ़ाने के निर्देश इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं ताकि बाजार में किसी प्रकार की कमी की स्थिति न बने। यदि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में नरमी आती है और आपूर्ति सामान्य होती है, तो कंपनियां भविष्य में कीमतों की समीक्षा कर सकती हैं। फिलहाल उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि वे गैस कंपनियों और संबंधित एजेंसियों की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और किसी भी भ्रामक या फर्जी रेट सूची से बचें।
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