अफ्रीका के कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा में इबोला वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया है। DRC में 1,200 से अधिक संक्रमित मामले और 300 से ज्यादा मौतों की पुष्टि हुई है। भारत में फिलहाल इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन स्वास्थ्य एजेंसियों ने प्रभावित देशों की यात्रा करने वालों को सतर्क रहने और लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी है।
अफ्रीका के कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा में इबोला वायरस का नया प्रकोप सामने आया है। बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया है। भारत में अभी तक इस बीमारी का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ प्रभावित देशों की यात्रा करने वालों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
अफ्रीका के दो देशों कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा में इबोला वायरस का नया प्रकोप तेजी से फैल रहा है। बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया है। इस फैसले का उद्देश्य दुनिया के देशों को समय रहते सतर्क करना और बीमारी को फैलने से रोकना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मई 2026 में इस प्रकोप की गंभीरता बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी तेज कर दी गई। जून के अंत तक कांगो में इबोला के मामलों की संख्या एक हजार से अधिक हो चुकी थी। वहीं, युगांडा में भी कई संक्रमित मरीजों की पुष्टि हुई है।
अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार, 25 जून तक DRC में 1,200 से ज्यादा संक्रमित मरीज सामने आए हैं। इनमें 300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। युगांडा में भी दर्जन भर से ज्यादा मामलों की पुष्टि की गई है।
क्या है इबोला? इबोला एक गंभीर वायरस से होने वाली बीमारी है। यह एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकती है। समय पर इलाज और देखभाल नहीं मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकती है। इस बार जो वायरस फैल रहा है, उसे बुंडीबुग्यो (Bundibugyo) प्रकार का इबोला वायरस बताया गया है। इस प्रकार के वायरस के लिए अभी तक कोई मंजूर वैक्सीन या खास दवा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, वैज्ञानिक इस पर लगातार काम कर रहे हैं।
बीमारी कैसे फैलती है? इबोला वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थ या सीधे संपर्क से फैल सकता है। बीमार व्यक्ति की देखभाल करते समय अगर सावधानी नहीं बरती जाए तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसी वजह से डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष सुरक्षा उपकरण पहनने की सलाह दी जाती है।
किन इलाकों में सबसे ज्यादा असर? WHO और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, कांगो के इटुरी, नॉर्थ किवु और साउथ किवु जैसे इलाकों में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। ये इलाके दूर-दराज के हैं, जहां स्वास्थ्य सेवाएं सीमित हैं। कई जगहों तक पहुंचना भी आसान नहीं है। इसी कारण मरीजों की जल्दी पहचान और इलाज में परेशानी आ रही है।
WHO क्या कर रहा है? विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्रभावित इलाकों में अपनी टीमों को भेजा है। संक्रमित लोगों की पहचान की जा रही है। उनके संपर्क में आए लोगों पर नजर रखी जा रही है। जांच के लिए अस्थायी लैब भी बनाई गई हैं ताकि लोगों की जल्दी जांच हो सके। स्वास्थ्यकर्मी गांव-गांव जाकर लोगों को बीमारी के बारे में जानकारी भी दे रहे हैं।
CDC की क्या रिपोर्ट है? CDC ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है कि DRC में संक्रमण तेजी से बढ़ा है। संस्था के अनुसार, हजारों लोगों की पहचान की गई है जो संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए थे। इन सभी लोगों की रोजाना निगरानी की जा रही है ताकि बीमारी को आगे फैलने से रोका जा सके।
कुछ देशों ने बढ़ाई निगरानी इबोला के बढ़ते मामलों को देखते हुए कुछ देशों ने प्रभावित इलाकों से आने वाले यात्रियों की जांच शुरू कर दी है। अमेरिका ने DRC, युगांडा और पड़ोसी दक्षिण सूडान से आने वाले यात्रियों के लिए सख्त जांच व्यवस्था लागू की है। हवाई अड्डों पर स्वास्थ्य जांच बढ़ाई गई है ताकि संक्रमण दूसरे देशों तक न पहुंचे।
भारत में क्या है स्थिति? अभी तक भारत में इस इबोला प्रकोप से जुड़ा कोई मामला सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। फिलहाल लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी बरतना जरूरी माना जा रहा है।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत? जो लोग हाल ही में अफ्रीका के प्रभावित देशों की यात्रा करके लौटे हैं, उन्हें अपनी सेहत पर ध्यान देना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को यात्रा के बाद तेज बुखार, बहुत ज्यादा कमजोरी या शरीर में दूसरे गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और अपनी यात्रा की जानकारी भी देनी चाहिए।
घबराने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बीमारी के समय गलत जानकारी सबसे बड़ी समस्या बन सकती है। इसलिए केवल सरकारी स्वास्थ्य एजेंसियों और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी भरोसेमंद संस्थाओं की जानकारी पर ही भरोसा करना चाहिए। सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट खबरों से बचना जरूरी है।
बीमारी को रोकने के लिए क्या किया जा रहा है? प्रभावित इलाकों में मरीजों को अलग रखा जा रहा है। संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों की पहचान की जा रही है। अस्पतालों में सुरक्षा नियमों का पालन कराया जा रहा है। स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष सुरक्षा उपकरण दिए जा रहे हैं। लोगों को बीमारी से बचाव के तरीके भी बताए जा रहे हैं।
आम लोगों को क्या करना चाहिए? अगर आपकी अफ्रीका के प्रभावित इलाकों में यात्रा की कोई योजना नहीं है तो चिंता की जरूरत नहीं है। यदि जरूरी काम से वहां जाना पड़े तो यात्रा से पहले सरकारी स्वास्थ्य सलाह जरूर देखें। बीमार व्यक्ति के सीधे संपर्क से बचें। हाथों की साफ-सफाई का ध्यान रखें। किसी भी तरह के गंभीर बुखार या कमजोरी होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
दुनिया के लिए क्यों है चिंता का विषय? आज दुनिया पहले की तुलना में ज्यादा जुड़ी हुई है। हर दिन लाखों लोग एक देश से दूसरे देश की यात्रा करते हैं। ऐसे में किसी भी संक्रामक बीमारी के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसी कारण WHO ने समय रहते इस प्रकोप को वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया है, ताकि सभी देश मिलकर बीमारी को फैलने से रोक सकें।
फिलहाल भारत में इबोला का कोई मामला नहीं मिला है। फिर भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सतर्क रहना, सही जानकारी पर भरोसा करना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।
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