सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस दावे की जांच में पता चला है कि NCERT ने संविधान से "धर्मनिरपेक्ष" (Secular) शब्द नहीं हटाया है। बदलाव केवल कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक के कंटेंट में किया गया है, जहां प्रस्तावना का पूरा पाठ और "सेक्युलरिज्म" से जुड़े कुछ संदर्भ मुख्य टेक्स्ट से हटाए या बदले गए हैं।
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है। कई पोस्ट में कहा जा रहा है कि NCERT ने नई किताबों से संविधान की प्रस्तावना (प्रीएम्बल) और "धर्मनिरपेक्ष" (Secular) शब्द हटा दिया है। कुछ पोस्ट में यह भी दावा किया जा रहा है कि इसके बाद भारत अब संवैधानिक रूप से धर्मनिरपेक्ष देश नहीं रहा। यह दावा सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों और आधिकारिक जानकारी की पड़ताल करने पर तस्वीर अलग सामने आती है।
हिंदुस्तान टाइम्स, इंडिया टुडे, हेराल्ड गोवा और अन्य रिपोर्टों के अनुसार, यह बदलाव संविधान में नहीं बल्कि NCERT की कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान (Social Science) की पाठ्यपुस्तक के कंटेंट में किया गया है। यानी संविधान की मूल प्रति में किसी तरह का संशोधन नहीं हुआ है।
रिपोर्टों के मुताबिक NCERT ने नई किताब में कई बदलाव किए हैं। इनमें 1975-77 के आपातकाल (Emergency) पर नया अध्याय जोड़ा गया है। इसके अलावा चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े विषयों का दायरा भी बढ़ाया गया है। इसी प्रक्रिया में पुराने संस्करण में शामिल संविधान की प्रस्तावना का पूरा पाठ और "सेक्युलरिज्म" से जुड़े कुछ संदर्भ इस नई पुस्तक के मुख्य हिस्से से हटा दिए गए या उनमें बदलाव किया गया है।
यहीं से सोशल मीडिया पर भ्रम की स्थिति पैदा हुई। कई लोगों ने पाठ्यपुस्तक में हुए बदलाव को सीधे संविधान में संशोधन मान लिया और यह दावा करना शुरू कर दिया कि भारत अब धर्मनिरपेक्ष देश नहीं रहा। जबकि उपलब्ध तथ्यों से ऐसा साबित नहीं होता।
संविधान और पाठ्यपुस्तक दोनों अलग-अलग चीजें हैं। NCERT की किताबें शिक्षा के उद्देश्य से तैयार की जाती हैं, जबकि संविधान देश का सर्वोच्च कानून है। किसी पाठ्यपुस्तक में बदलाव होने का मतलब यह नहीं होता कि संविधान भी बदल गया है।
संवैधानिक विश्लेषणों के अनुसार भारत के संविधान की प्रस्तावना में "सोशलिस्ट", "सेक्युलर" और "इंटीग्रिटी" जैसे शब्द 42वें संविधान संशोधन के जरिए वर्ष 1976 में जोड़े गए थे। यह संशोधन संसद द्वारा पारित किया गया था और आज भी संविधान का हिस्सा है।
रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट कई मामलों में यह स्पष्ट कर चुका है कि संविधान की प्रस्तावना संविधान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भले ही प्रस्तावना स्वयं अधिकारों का अलग स्रोत नहीं है, लेकिन संविधान की व्याख्या करते समय इसका विशेष महत्व माना जाता है।
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि संविधान में किसी भी प्रकार का संशोधन केवल संसद द्वारा निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही किया जा सकता है। अब तक ऐसी कोई आधिकारिक अधिसूचना, संसदीय संशोधन या सरकारी घोषणा सामने नहीं आई है, जिसमें संविधान की प्रस्तावना से "धर्मनिरपेक्ष" शब्द हटाने की बात कही गई हो।
वायरल दावा क्या है? सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में कहा गया कि NCERT ने प्रस्तावना और "धर्मनिरपेक्ष" शब्द हटाकर भारत को आधिकारिक रूप से गैर-धर्मनिरपेक्ष बना दिया है।
जांच में क्या सामने आया? उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार NCERT ने केवल कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के कंटेंट में बदलाव किया है। इस पुस्तक के मुख्य भाग से प्रस्तावना का पूरा पाठ और "सेक्युलरिज्म" से जुड़े कुछ संदर्भ हटाए या बदले गए हैं। यह बदलाव केवल पाठ्यपुस्तक तक सीमित है।
संविधान में क्या बदलाव हुआ? इस सवाल का सीधा जवाब है—नहीं। संविधान की मूल प्रति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। प्रस्तावना में "सॉवरेन, सोशलिस्ट, सेक्युलर, डेमोक्रेटिक, रिपब्लिक" शब्द पहले की तरह मौजूद हैं। इसी वजह से यह कहना कि "भारत अब सेक्युलर नहीं रहा" उपलब्ध तथ्यों के आधार पर सही नहीं है। विवाद केवल नई पाठ्यपुस्तक के कंटेंट और उसके शैक्षणिक या राजनीतिक पहलुओं को लेकर है, संविधान में संशोधन को लेकर नहीं।
इस पूरे मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली हर जानकारी सही नहीं होती। विशेष रूप से संविधान, कानून और सरकारी नीतियों जैसे संवेदनशील विषयों पर किसी भी दावे को सही मानने से पहले विश्वसनीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी की जांच करना जरूरी है।
इस मामले में उपलब्ध रिपोर्टें यही बताती हैं कि संविधान में कोई बदलाव नहीं हुआ है। बदलाव केवल NCERT की एक नई पाठ्यपुस्तक की सामग्री में किया गया है। इसलिए दोनों बातों को एक जैसा मानना सही नहीं होगा।
निष्कर्ष दावा: NCERT ने "धर्मनिरपेक्ष" शब्द हटाकर भारत को गैर-धर्मनिरपेक्ष बना दिया। सच्चाई: ❌ यह दावा गलत है। बदलाव केवल NCERT की कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक के कंटेंट में हुआ है। संविधान की मूल प्रस्तावना में कोई संशोधन नहीं किया गया है और "सेक्युलर" शब्द आज भी संविधान का हिस्सा है।
FactCheck NCERT Constitution Preamble Secular IndiaConstitution FakeNews NetGramNews
Disclaimer
Disclaimer:
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI.
Published by: Sadiq Tak. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.