सोशल मीडिया पर पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण बताने वाले दावों के बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का कानूनी प्रमाण नहीं है। सरकार ने पासपोर्ट अधिनियम और बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए इस भ्रम को दूर किया है।
"सोशल मीडिया पर इन दिनों एक दावा तेजी से साझा किया जा रहा है कि भारतीय पासपोर्ट अपने आप में नागरिकता का अंतिम और पर्याप्त प्रमाण है। इस दावे के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि पासपोर्ट कभी भी भारतीय नागरिकता का कानूनी प्रमाण नहीं रहा है। सरकार ने इस संबंध में पासपोर्ट अधिनियम (Passports Act) और बॉम्बे हाईकोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि पासपोर्ट का उद्देश्य मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए पहचान और यात्रा दस्तावेज उपलब्ध कराना है, न कि नागरिकता का अंतिम प्रमाण देना।
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई पोस्ट और संदेशों में यह कहा गया कि चूंकि पासपोर्ट भारत सरकार द्वारा जारी किया जाता है, इसलिए इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जाना चाहिए। इसी दावे को लेकर भ्रम की स्थिति बनी, जिसके बाद सरकार की ओर से कानूनी स्थिति स्पष्ट की गई। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, केवल पासपोर्ट होने से किसी व्यक्ति की नागरिकता स्वतः प्रमाणित नहीं होती।
सरकार ने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून में नागरिकता का निर्धारण अलग कानूनी प्रावधानों के तहत होता है। पासपोर्ट अधिनियम मुख्य रूप से विदेश यात्रा के लिए पासपोर्ट जारी करने और उससे जुड़े नियमों को नियंत्रित करता है।
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