अमेरिकी सरकार ने Anthropic के उन्नत AI मॉडल Mythos-5 को चुनिंदा भरोसेमंद पार्टनर्स के लिए जारी करने की मंजूरी दी है। वहीं OpenAI ने सरकारी अनुरोध के बाद GPT-5.6 का सार्वजनिक लॉन्च फिलहाल स्थगित रखते हुए शुरुआती पहुंच केवल सत्यापित संस्थानों तक सीमित कर दी है।
"अमेरिका में अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल्स की उपलब्धता को लेकर सरकार का सतर्क रुख लगातार स्पष्ट होता जा रहा है। शक्तिशाली AI सिस्टम्स को आम उपयोगकर्ताओं के लिए एक साथ जारी करने के बजाय अब उन्हें चरणबद्ध तरीके से सीमित संस्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। इसी क्रम में अमेरिकी वाणिज्य विभाग (US Commerce Department) ने Anthropic के नए AI मॉडल Mythos-5 को चुनिंदा ""Trusted Partners"" के लिए जारी करने की मंजूरी दी है।
रिपोर्टों के अनुसार, यह मंजूरी केवल उन संगठनों के लिए है जो निर्धारित सुरक्षा और नियामकीय मानकों को पूरा करते हैं। फिलहाल इस मॉडल की सार्वजनिक उपलब्धता पर नियंत्रण रखा गया है और व्यापक उपयोग के लिए इसे अभी जारी नहीं किया गया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अत्यधिक सक्षम AI मॉडल नियंत्रित वातावरण में उपयोग और परीक्षण के बाद ही बड़े स्तर पर उपलब्ध कराए जाएं।
TechCrunch की रिपोर्ट के मुताबिक 100 से अधिक कंपनियों और सरकारी एजेंसियों को Mythos-5 के उपयोग की अनुमति दी गई है। इन अधिकृत संस्थानों में कुछ गैर-अमेरिकी कर्मचारी भी शामिल हैं, जिन्हें निर्धारित नियमों के तहत इस मॉडल तक पहुंच मिल सकती है। इससे संकेत मिलता है कि AI तकनीक का उपयोग केवल निजी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी कार्यों और अनुसंधान परियोजनाओं में भी इसका विस्तार किया जा रहा है।
Mythos-5 को उच्च स्तरीय रीजनिंग, कोड जनरेशन और मल्टीमॉडल क्षमताओं वाला उन्नत AI मॉडल माना जा रहा है। यह टेक्स्ट, कोड और अन्य प्रकार की इनपुट जानकारी को समझने और विश्लेषण करने में सक्षम बताया गया है। हालांकि इसकी पूरी तकनीकी क्षमताओं को सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किया गया है, लेकिन इसे Anthropic के अब तक के सबसे उन्नत मॉडल्स में शामिल माना जा रहा है।
इसी बीच OpenAI ने भी अपने आगामी GPT-5.6 मॉडल के पूर्ण सार्वजनिक लॉन्च को फिलहाल स्थगित कर दिया है। Reuters और Financial Times की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी सरकार के अनुरोध के बाद कंपनी ने शुरुआती पहुंच केवल ""Vetted Partners"" तक सीमित रखने का फैसला किया है। यानी फिलहाल केवल वे संस्थान और संगठन इस मॉडल का उपयोग कर सकेंगे जो पहले से निर्धारित सुरक्षा और अनुपालन मानकों पर खरे उतरते हैं।
इस कदम को AI सुरक्षा नीति के व्यापक ढांचे का हिस्सा माना जा रहा है। हाल के वर्षों में डीपफेक, साइबर हमलों, स्वायत्त AI एजेंट्स और बड़े पैमाने पर गलत सूचना फैलाने जैसे संभावित जोखिमों को लेकर सरकारें अधिक सतर्क हुई हैं। इसी वजह से उन्नत AI मॉडल्स को पहले नियंत्रित वातावरण में परखा जा रहा है, ताकि उनके संभावित दुरुपयोग को कम किया जा सके।
OpenAI से जुड़ी हालिया चर्चाओं में कंपनी के संभावित IPO को लेकर भी अटकलें सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि कंपनी फिलहाल AI सुरक्षा, लागत नियंत्रण और नियामकीय आवश्यकताओं पर अधिक ध्यान दे रही है। हालांकि IPO को लेकर कंपनी की ओर से कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इन फैसलों का असर AI उद्योग पर भी दिखाई दे सकता है। फिलहाल बड़े एंटरप्राइज, अनुसंधान संस्थान और सरकारी एजेंसियां नई पीढ़ी के AI मॉडल्स तक पहले पहुंच बना रही हैं, जबकि स्टार्टअप्स, स्वतंत्र डेवलपर्स और आम उपयोगकर्ताओं को इन तकनीकों के व्यापक उपयोग के लिए कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है। इससे AI आधारित उत्पादों और सेवाओं का शुरुआती विकास बड़े संगठनों के माध्यम से आगे बढ़ने की संभावना बढ़ती है।
विशेषज्ञों के बीच यह धारणा मजबूत हो रही है कि अमेरिका फिलहाल ""सुरक्षा पहले, विस्तार बाद में"" की नीति पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य नवाचार को पूरी तरह रोकना नहीं बल्कि ऐसे शक्तिशाली AI सिस्टम्स को नियंत्रित तरीके से विकसित करना है, जिनका प्रभाव साइबर सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक सूचना व्यवस्था पर पड़ सकता है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत सहित अन्य देश ऐसे उन्नत AI मॉडल्स के लिए किस तरह के नियामकीय ढांचे तैयार करते हैं। AI आधारित सेवाएं विकसित करने वाली कंपनियों के लिए भी डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और नियामकीय अनुपालन पहले से अधिक महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं, क्योंकि भविष्य में इन्हीं मानकों के आधार पर नई तकनीकों की उपलब्धता और उपयोग तय हो सकता है।
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