यूक्रेन युद्ध में अंग गंवा चुके सैनिक और नागरिक अब खेलों के जरिए अपने जीवन को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं। पुनर्वास शिविरों में उन्हें शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक मजबूती और सामाजिक सहयोग भी मिल रहा है।
"यूक्रेन में जारी युद्ध ने हजारों लोगों की जिंदगी बदल दी है। कई सैनिकों और आम नागरिकों ने इस संघर्ष में अपने हाथ या पैर गंवाए हैं, लेकिन अब इन्हीं लोगों में से बड़ी संख्या खेलों के माध्यम से नई शुरुआत कर रही है। विभिन्न पुनर्वास कार्यक्रमों में शामिल प्रतिभागी बास्केटबॉल, दौड़ और पैरालंपिक शैली की दूसरी खेल गतिविधियों के जरिए न केवल अपनी शारीरिक क्षमता को फिर से विकसित कर रहे हैं, बल्कि आत्मविश्वास भी हासिल कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, ऐसे शिविरों में अलग-अलग उम्र के अम्प्यूटी लोग एक साथ प्रशिक्षण लेते हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल खिलाड़ियों को तैयार करना नहीं है, बल्कि उन्हें यह भरोसा दिलाना भी है कि जीवन किसी एक हादसे पर रुकता नहीं। प्रशिक्षक और पुनर्वास विशेषज्ञ प्रतिभागियों को नई परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने और सामान्य जीवन की ओर लौटने के लिए प्रेरित करते हैं।
इन खेल शिविरों की खास बात यह है कि यहां प्रतियोगिता से ज्यादा पुनर्वास पर जोर दिया जाता है। प्रतिभागियों को नई तकनीक, संतुलन बनाए रखने के तरीके और कृत्रिम अंगों के साथ खेल गतिविधियों में हिस्सा लेने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इससे उनके शरीर की कार्यक्षमता बेहतर होने के साथ मानसिक तनाव भी कम करने में मदद मिलती है।
कई प्रतिभागियों ने बताया कि युद्ध में घायल होने के बाद शुरुआती समय उनके लिए बेहद कठिन था। उन्हें अपने भविष्य, रोजगार और सामान्य जीवन में लौटने को लेकर कई तरह की आशंकाएं थीं। लेकिन खेल गतिविधियों में शामिल होने के बाद धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ा। समान परिस्थितियों से गुजर चुके लोगों के बीच रहने से उन्हें यह एहसास भी हुआ कि वे अकेले नहीं हैं।
यूक्रेन में युद्ध के कारण अंग खो चुके लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके चलते कृत्रिम अंग, फिजिकल रिहैबिलिटेशन और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। ऐसे में सरकार, गैर-सरकारी संगठनों और स्थानीय समुदायों की ओर से चलाए जा रहे पुनर्वास कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन पहलों का मकसद केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को सामाजिक और पेशेवर जीवन में दोबारा सक्रिय बनाना भी है।
विशेषज्ञ लंबे समय से मानते रहे हैं कि नियमित शारीरिक गतिविधियां मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर डालती हैं। युद्ध जैसी परिस्थितियों से गुजर चुके लोगों के लिए सामूहिक खेल गतिविधियां सामाजिक जुड़ाव बढ़ाने का भी माध्यम बनती हैं। टीम के साथ अभ्यास करने से अकेलेपन की भावना कम होती है और नई दोस्ती तथा सहयोग का वातावरण तैयार होता है।
यह पहल केवल यूक्रेन तक सीमित संदेश नहीं देती। युद्ध, सड़क दुर्घटना या गंभीर बीमारी के कारण शारीरिक चुनौतियों का सामना कर रहे लोगों के लिए भी ऐसे कार्यक्रम उम्मीद की नई राह दिखाते हैं। पुनर्वास केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं होता, बल्कि समाज में सम्मानजनक वापसी का अवसर भी देता है।
भारत में भी कई संस्थाएं और खेल संगठन दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रशिक्षण शिविर, प्रतियोगिताएं और फिटनेस कार्यक्रम आयोजित करते हैं। ऐसे प्रयासों से अधिक लोगों को खेलों से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलता है। यदि किसी व्यक्ति को शारीरिक चुनौती के बाद पुनर्वास की जरूरत है, तो इस तरह के खेल और सामुदायिक कार्यक्रम उसके आत्मविश्वास को मजबूत करने में सहायक हो सकते हैं।
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