तमिलनाडु सरकार सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले प्रत्येक नवजात शिशु को 1 ग्राम सोने की अंगूठी देने की नई योजना पर काम कर रही है। 'Thai Maman Gold Ring Scheme' का उद्देश्य सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देना और सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करना है।
"तमिलनाडु सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से एक नई कल्याणकारी योजना शुरू करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित 'Thai Maman Gold Ring Scheme' के तहत सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले प्रत्येक नवजात शिशु को 1 ग्राम सोने की अंगूठी दी जाएगी। राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से अधिक से अधिक गर्भवती महिलाएं सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव के लिए आगे आएंगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा।
इस योजना के लिए करीब 755.83 करोड़ रुपये का वार्षिक बजट प्रस्तावित किया गया है। यह राज्य की प्रमुख सामाजिक कल्याण योजनाओं में शामिल मानी जा रही है, जिसका फोकस केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि सुरक्षित मातृत्व और नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देना भी है।
सरकारी अस्पतालों में प्रसव को बढ़ावा देने की दिशा में यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राज्य सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक परिवार संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता दें। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से यह मानते रहे हैं कि प्रशिक्षित डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में होने वाला प्रसव मां और बच्चे दोनों के लिए अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित होता है। ऐसे में यह योजना सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के उपयोग को बढ़ाने में सहायक हो सकती है।
राज्य के कई परिवार आर्थिक कारणों से निजी अस्पतालों में इलाज कराने में कठिनाई महसूस करते हैं। दूसरी ओर, सरकारी अस्पतालों में प्रसव और मातृत्व सेवाएं पहले से उपलब्ध हैं। सरकार का मानना है कि सोने की अंगूठी जैसे प्रतीकात्मक प्रोत्साहन से परिवारों को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का उपयोग करने के लिए अतिरिक्त प्रेरणा मिलेगी।
योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य जांच को भी बढ़ावा देना है। यदि गर्भवती महिलाएं समय पर अस्पतालों से जुड़ी रहेंगी तो प्रसव पूर्व जांच, आवश्यक टीकाकरण और स्वास्थ्य निगरानी बेहतर तरीके से हो सकेगी। इससे जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान समय रहते करना भी आसान हो सकता है।
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि केवल प्रोत्साहन राशि या उपहार देना पर्याप्त नहीं होता। किसी भी मातृत्व योजना की सफलता अस्पतालों की क्षमता, पर्याप्त डॉक्टरों और नर्सों की उपलब्धता, दवाओं की नियमित आपूर्ति, आधुनिक उपकरणों तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं पर भी निर्भर करती है। इसलिए ऐसी योजनाओं के साथ स्वास्थ्य ढांचे को लगातार मजबूत बनाए रखना भी आवश्यक माना जाता है।
सरकारी अस्पतालों में प्रसव बढ़ने से नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार करने, टीकाकरण कार्यक्रमों से जोड़ने और शुरुआती स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करने में भी सुविधा मिल सकती है। सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार संस्थागत प्रसव से कई स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाया जा सकता है।
राज्य सरकार की इस प्रस्तावित योजना को सामाजिक सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के संयुक्त मॉडल के रूप में भी देखा जा रहा है। यदि इसके क्रियान्वयन के बाद सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं तो भविष्य में अन्य राज्य भी मातृत्व एवं नवजात स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए इसी तरह की प्रोत्साहन आधारित योजनाओं पर विचार कर सकते हैं। फिलहाल योजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देना और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है।
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