एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि Mexico, Kenya, Italy समेत कई देशों में 1970 के दशक की तुलना में अब साल में 1 से 2 महीने ज्यादा Heat-Stress वाले दिन दर्ज हो रहे हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि बढ़ती गर्मी और नमी का असर लोगों के स्वास्थ्य, कामकाज और दैनिक जीवन पर पड़ सकता है।
दुनिया के कई देशों में गर्मी का असर पहले से ज्यादा लंबे समय तक महसूस किया जा रहा है। एक नई स्टडी के अनुसार आज के समय में कई देशों में साल के दौरान Heat-Stress वाले दिनों की संख्या काफी बढ़ गई है। शोध में कहा गया है कि 1970 के दशक की तुलना में अब कई जगहों पर एक से दो महीने ज्यादा ऐसे दिन देखे जा रहे हैं, जब मौसम का असर सीधे लोगों की सेहत पर पड़ सकता है।
स्टडी में Mexico, Kenya, Italy और कई अन्य देशों का जिक्र किया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि कुछ इलाकों में Heat-Stress की अवधि दो महीने से भी ज्यादा बढ़ चुकी है। यह बदलाव केवल तापमान बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि गर्मी और नमी दोनों के मिलकर बढ़ते प्रभाव से जुड़ा है।
Heat-Stress क्या होता है? Heat-Stress का मतलब केवल ज्यादा गर्मी महसूस होना नहीं है। जब तापमान और नमी दोनों बढ़ जाते हैं, तब शरीर को खुद को ठंडा रखने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। ऐसी स्थिति में लंबे समय तक बाहर रहने वाले लोगों को परेशानी हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बहुत देर तक गर्म माहौल में रहे और उसे पर्याप्त आराम या ठंडक न मिले, तो स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
क्यों बढ़ रही है चिंता? शोधकर्ताओं का कहना है कि Heat-Stress वाले दिनों की बढ़ती संख्या लोगों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है। पहले जहां गर्मी का असर कुछ हफ्तों तक सीमित रहता था, अब कई जगहों पर यह अवधि लंबी होती जा रही है। इसका मतलब है कि लोगों को लंबे समय तक गर्म मौसम का सामना करना पड़ सकता है। इसका असर केवल शरीर पर ही नहीं बल्कि कामकाज और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ सकता है।
किन लोगों पर सबसे ज्यादा असर? स्टडी के अनुसार कुछ लोग दूसरों की तुलना में ज्यादा जोखिम में हो सकते हैं। इनमें खेतों में काम करने वाले किसान शामिल हैं। निर्माण कार्य में लगे मजदूर भी लंबे समय तक धूप में रहते हैं। सड़क, फैक्ट्री और अन्य खुले स्थानों पर काम करने वाले लोगों को भी ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है। इन लोगों के लिए काम का समय बदलना हमेशा आसान नहीं होता। इसलिए गर्मी का असर उन पर ज्यादा पड़ सकता है।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी चुनौती विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे और बुजुर्ग भी Heat-Stress से ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। छोटे बच्चों का शरीर गर्मी को संभालने में कमजोर हो सकता है। वहीं बुजुर्गों को पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अतिरिक्त परेशानी हो सकती है। इसी वजह से परिवारों को इन दोनों वर्गों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
शरीर पर क्या असर पड़ सकता है? लंबे समय तक ज्यादा गर्मी और नमी में रहने से कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं। शरीर में पानी की कमी हो सकती है। कमजोरी महसूस हो सकती है। चक्कर आने जैसी समस्या हो सकती है। कुछ लोगों को ज्यादा थकान महसूस हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी स्थिति में समय पर आराम और पर्याप्त पानी बहुत जरूरी होता है।
कामकाज पर पड़ सकता है असर Heat-Stress केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं है। जब मौसम ज्यादा गर्म रहता है तो बाहर काम करने वाले लोगों की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है। कई बार लोगों को बीच-बीच में आराम लेना पड़ता है। इससे काम की गति धीमी हो सकती है। कुछ क्षेत्रों में स्कूल, दफ्तर और अन्य संस्थान भी समय में बदलाव पर विचार कर सकते हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ सकता है दबाव स्टडी में कहा गया है कि बढ़ते Heat-Stress का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है। यदि ज्यादा लोग गर्मी से जुड़ी समस्याओं का सामना करते हैं तो अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर दबाव बढ़ सकता है। इसी वजह से शोधकर्ता पहले से तैयारी रखने की सलाह दे रहे हैं।
केवल Heatwave की बात नहीं विशेषज्ञों का कहना है कि Heat-Stress को केवल Heatwave यानी लू तक सीमित नहीं समझना चाहिए। कई बार तापमान बहुत ज्यादा न होने के बावजूद नमी बढ़ने से भी शरीर पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि अब मौसम और स्वास्थ्य को साथ जोड़कर देखने की जरूरत बताई जा रही है।
सरकारों को क्या करने की सलाह? शोधकर्ताओं का मानना है कि केवल गर्मी की चेतावनी जारी करना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने सुझाव दिया है कि सरकारें लंबे समय की योजना बनाएं। शहरों में ज्यादा पेड़ लगाए जाएं। खुले और हरियाली वाले स्थान बढ़ाए जाएं। लोगों के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर बनाई जाए। गर्मी से जुड़े सुरक्षा नियमों को मजबूत किया जाए। इन कदमों से लोगों को राहत मिल सकती है।
शहरों में हरियाली क्यों जरूरी? विशेषज्ञों का कहना है कि पेड़ और हरियाली गर्मी कम करने में मदद करते हैं। पेड़ छाया देते हैं और आसपास के वातावरण को कुछ हद तक ठंडा रखने में सहायता करते हैं। इसी वजह से कई शहर अब हरित क्षेत्रों को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
घरों में क्या बदलाव जरूरी? बढ़ती गर्मी को देखते हुए लोगों को अपने घरों में भी कुछ सावधानियां अपनाने की सलाह दी जा रही है। खिड़कियों से हवा आने-जाने की व्यवस्था बेहतर रखी जा सकती है। कमरों को जरूरत से ज्यादा गर्म होने से बचाया जा सकता है। दिनभर पर्याप्त पानी पीने की आदत अपनाई जा सकती है। छोटे बदलाव भी गर्मी के असर को कम करने में मदद कर सकते हैं।
कार्यस्थलों पर क्या करना चाहिए? जहां लोग लंबे समय तक काम करते हैं, वहां भी कुछ बदलाव जरूरी माने जा रहे हैं। काम के दौरान आराम के लिए समय दिया जा सकता है। पीने के पानी की व्यवस्था रखी जा सकती है। बहुत ज्यादा गर्म समय में काम का दबाव कम किया जा सकता है। इस तरह के कदम कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए मददगार हो सकते हैं।
आम लोगों के लिए जरूरी सलाह विशेषज्ञ कुछ आसान सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं। दिनभर पर्याप्त पानी पीते रहें। तेज धूप में लंबे समय तक रहने से बचें। हल्के और आरामदायक कपड़े पहनें। जरूरत पड़ने पर छाया वाली जगह पर आराम करें। बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें। अगर ज्यादा कमजोरी या चक्कर महसूस हो तो डॉक्टर से सलाह लें।
बदलता मौसम और बढ़ती जिम्मेदारी यह स्टडी बताती है कि दुनिया के कई हिस्सों में गर्मी का असर पहले की तुलना में लंबे समय तक बना रह सकता है। ऐसे में Heat-Stress को केवल मौसम का हिस्सा मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारों, संस्थानों और आम लोगों को मिलकर तैयारी करनी होगी। छोटी-छोटी सावधानियां, बेहतर योजना और समय पर जागरूकता लोगों को गर्मी से जुड़ी समस्याओं से बचाने में मदद कर सकती हैं।
फिलहाल शोध के नतीजे यह संकेत देते हैं कि Heat-Stress वाले दिनों की बढ़ती संख्या आने वाले वर्षों में भी एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा बनी रह सकती है।
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