जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में एक ही दिन सी-सेक्शन से डिलीवरी कराने वाली आठ महिलाओं की तबीयत बिगड़ गई। इनमें से दो गंभीर मरीजों को एमडीएम अस्पताल की ICU में भर्ती कराया गया है, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
"जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में सी-सेक्शन के बाद आठ प्रसूताओं के बीमार पड़ने का मामला सामने आया है। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रभावित महिलाओं में से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें उपचार के लिए जोधपुर के माधुरादास माथुर (एमडीएम) अस्पताल की आईसीयू में भर्ती कराया गया है।
जानकारी के अनुसार 20 जून को पावटा जिला अस्पताल में आठ गर्भवती महिलाओं की सर्जरी के जरिए डिलीवरी कराई गई थी। ऑपरेशन के बाद अगले एक से दो दिन के भीतर सभी महिलाओं में स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें सामने आने लगीं। मरीजों में अलग-अलग स्तर पर जटिलताएं देखी गईं, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन सतर्क हुआ और विस्तृत चिकित्सकीय जांच शुरू की गई।
एमडीएम अस्पताल में भर्ती दो महिलाओं की स्थिति को लेकर चिकित्सकों ने विशेष निगरानी रखी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार एक मरीज में किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या सामने आई है, जबकि दूसरी महिला में किडनी, लीवर और मूत्र तंत्र से संबंधित जटिलताओं की आशंका जताई गई है। दोनों का उपचार विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में जारी है।
चिकित्सकीय सूत्रों के मुताबिक कई मरीजों में अत्यधिक रक्तस्राव, रक्तचाप में गिरावट और यूरिन आउटपुट कम होने जैसे लक्षण देखे गए हैं। ऐसे लक्षण संक्रमण या अन्य गंभीर पोस्ट-ऑपरेटिव जटिलताओं की ओर संकेत कर सकते हैं। हालांकि बीमारी की वास्तविक वजह को लेकर अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित महिलाओं के ब्लड सैंपल और अन्य जांचें कराई जा रही हैं। अस्पताल प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि कहीं संक्रमण का संबंध ऑपरेशन थियेटर, सर्जिकल प्रक्रिया, इस्तेमाल की गई दवाओं, इंजेक्शन या अन्य चिकित्सकीय सामग्री से तो नहीं है। कल्चर टेस्ट की रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
इस घटना को लेकर प्रदेश की राजनीति में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मामले पर चिंता जताते हुए कहा कि हाल के महीनों में सरकारी अस्पतालों में सी-सेक्शन के बाद जटिलताओं के कई मामले सामने आए हैं। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की आवश्यकता बताई है।
राजस्थान में इससे पहले भी कुछ सरकारी अस्पतालों में ऑपरेशन के बाद मरीजों की तबीयत बिगड़ने के मामले चर्चा में रहे हैं। ऐसे मामलों के बाद अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था, ऑपरेशन थियेटर की स्वच्छता और उपचार प्रोटोकॉल के पालन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सर्जरी के दौरान और बाद में संक्रमण रोकने के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन बेहद जरूरी होता है।
पावटा अस्पताल की घटना ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। बड़ी संख्या में लोग मातृत्व सेवाओं के लिए सरकारी अस्पतालों का सहारा लेते हैं। ऐसे में प्रसूताओं के एक साथ बीमार पड़ने की घटना को गंभीरता से लिया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से मामले की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के पीछे संक्रमण, दवाओं से जुड़ी कोई समस्या या कोई अन्य चिकित्सकीय कारण जिम्मेदार था। फिलहाल प्रभावित मरीजों के इलाज और निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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