केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया। बीजेपी ने उन्हें दोबारा राज्यसभा का टिकट नहीं दिया था, जिसके कारण उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा। वे पहले अल्पसंख्यक मामलों सहित कई मंत्रालयों में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
मोदी सरकार में केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। यह फैसला उनके राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने और राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के बाद आया है।
इस्तीफे की पूरी वजह क्या है? जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो गया था। इसके बाद हुए नए राज्यसभा चुनावों में बीजेपी ने उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया। राज्यसभा सदस्य न रहने के कारण उन्होंने केंद्रीय मंत्री पद छोड़ने का निर्णय लिया। इसके बाद उन्होंने आधिकारिक रूप से इस्तीफा दे दिया।
राष्ट्रपति ने तुरंत स्वीकार किया इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही जॉर्ज कुरियन अब केंद्र सरकार में मंत्री पद पर नहीं रह गए हैं।
किन-किन मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे? जॉर्ज कुरियन सरकार में कई अहम जिम्मेदारियां निभा रहे थे। वे: केंद्रीय राज्य मंत्री (अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय) मत्स्य पालन मंत्रालय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय से जुड़े कार्य देख रहे थे।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और करियर जॉर्ज कुरियन का राजनीतिक और पेशेवर सफर काफी लंबा रहा है: उनका जन्म 1960 में केरल के कोट्टायम में हुआ था वे पेशे से सुप्रीम कोर्ट में वकील रह चुके हैं 1980 में बीजेपी से जुड़े और लंबे समय तक पार्टी कार्यकर्ता रहे उन्होंने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) में उपाध्यक्ष (Vice-Chairman) के रूप में भी काम किया बाद में उन्हें मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया गया
बीजेपी की राज्यसभा रणनीति का असर हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में बीजेपी ने कुछ मौजूदा सांसदों को दोबारा टिकट नहीं दिया। उन्हीं में जॉर्ज कुरियन भी शामिल थे। राज्यसभा सदस्यता खत्म होने के बाद मंत्री पद पर बने रहना संभव नहीं था, इसलिए यह इस्तीफा जरूरी हो गया।
खास बात जॉर्ज कुरियन केंद्र सरकार में ईसाई समुदाय से आने वाले एकमात्र मंत्री थे उनका इस्तीफा सरकार के कैबिनेट ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है
निष्कर्ष जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा उनके राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने और बीजेपी की नई रणनीति का परिणाम है। लंबे राजनीतिक अनुभव और प्रशासनिक भूमिका निभाने के बाद अब वे केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर हो गए हैं। उनका यह सफर भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखा जाएगा।
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