बांग्लादेश के राष्ट्रीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने निर्णायक जीत का दावा किया है और तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनने की ओर बढ़ रहे हैं। अंतिम नतीजे आने बाकी हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें जीत की बधाई देते हुए कहा कि भारत लोकतांत्रिक और प्रगतिशील बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा। शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में कुछ तनाव देखा गया था। अब BNP की वापसी को भारत-बांग्लादेश संबंधों में नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है। तारिक रहमान ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, तीस्ता जल समझौते और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का भरोसा दिया है, हालांकि उनके “बांग्लादेश फर्स्ट” रुख को लेकर कुछ सवाल भी बने हुए हैं।
बांग्लादेश चुनाव परिणाम लाइव: पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया कि भारत “लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश” के समर्थन में खड़ा रहेगा। ढाका: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने राष्ट्रीय चुनावों में निर्णायक जीत का दावा किया है।
पार्टी प्रमुख तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनने की ओर बढ़ रहे हैं। अंतिम नतीजे अभी आने बाकी हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रहमान और BNP को “निर्णायक जीत” पर बधाई दे दी है। पीएम मोदी ने यह भी आश्वासन दिया कि भारत “लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश” के समर्थन में आगे भी खड़ा रहेगा।
संबंधों में नया दौर? पीएम मोदी के बयान को बांग्लादेश के साथ रिश्तों में नई शुरुआत के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में दोनों देशों के रिश्तों में कुछ तनाव देखने को मिला था।
शेख हसीना के 5 अगस्त 2023 को छात्र आंदोलन के बाद देश छोड़कर भारत आने के बाद बांग्लादेश में सीमा और आंतरिक सुरक्षा की स्थिति कमजोर हुई। अवैध घुसपैठ के मामलों में बढ़ोतरी और हिंदू समुदाय के खिलाफ माहौल को लेकर भी चिंताएं उठीं, जिसका असर खासकर बंगाल और असम की राजनीति पर भी पड़ा।
शेख हसीना के कार्यकाल में दिल्ली और ढाका के रिश्ते काफी स्थिर रहे। अवामी लीग प्रमुख हसीना ने ‘प्रो-इंडिया’ सरकार चलाई, जिसमें व्यापार, परिवहन, सीमा सुरक्षा और जल बंटवारे जैसे मुद्दों पर सहयोग रहा। हालांकि इस चुनाव में उन्हें हिस्सा लेने से रोका गया और वह मौत की सजा के मुकदमे का सामना कर रही हैं।
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अब जब BNP सत्ता में वापसी कर रही है, तो नई दिल्ली को 2001–2006 का दौर भी याद है, जब सीमा पार उग्रवाद और 2004 का चिटगांव हथियार कांड सामने आया था। उस समय ट्रकों में भरकर हथियार भारत विरोधी उग्रवादियों तक पहुंचाए गए थे। हालांकि तारिक रहमान ने रिश्तों में “रीसेट” की बात कही है।
उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग जारी रखने, तीस्ता जल समझौते के समाधान और हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का भरोसा दिया है। लेकिन उनका “बांग्लादेश फर्स्ट” सिद्धांत, हसीना दौर जैसी पूरी रणनीतिक नजदीकी पर सवाल भी खड़े करता है।