अफ्रीका में ऊर्जा पहुंच बढ़ाने के लिए 176 मिलियन डॉलर की पूंजी के साथ ‘ज़फीरी’ फाइनेंस प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया है। इसका लक्ष्य 2030 तक सब-सहारन अफ्रीका में 1 करोड़ नए बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने में मदद करना है। इसके तहत मिनी-ग्रिड, सोलर होम सिस्टम और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश किया जाएगा।
अफ्रीका के कई देशों में आज भी लाखों परिवार ऐसे हैं जिनके घरों तक नियमित बिजली नहीं पहुंच पाती। कई ग्रामीण इलाकों में लोग शाम होते ही अंधेरे में रहने को मजबूर हो जाते हैं। बच्चों की पढ़ाई, छोटे कारोबार और स्वास्थ्य सेवाएं भी इससे प्रभावित होती हैं। लेकिन अब इस स्थिति को बदलने के लिए एक बड़ी पहल शुरू की गई है, जिससे आने वाले वर्षों में करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव आने की उम्मीद है। अफ्रीका में ऊर्जा पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से ‘ज़फीरी’ नाम का नया फाइनेंस प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है। इस प्लेटफॉर्म के लिए करीब 176 मिलियन डॉलर की शुरुआती पूंजी जुटाई गई है। इस पहल में कई बड़े अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान और विकास संगठन शामिल हैं। इनमें इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन (IFC), अफ्रीकन डेवलपमेंट बैंक, ट्रेड एंड डेवलपमेंट बैंक, फर्स्ट रैंड और रॉकफेलर फाउंडेशन जैसे प्रमुख साझेदार शामिल हैं।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाना है जहां आज भी लाखों लोग ऊर्जा सुविधाओं से वंचित हैं। योजना के तहत सब-सहारन अफ्रीका के देशों में मिनी-ग्रिड, सोलर होम सिस्टम और स्वच्छ खाना पकाने के समाधान जैसी परियोजनाओं में निवेश किया जाएगा। इन तकनीकों को ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के लिए काफी उपयोगी माना जाता है क्योंकि वहां पारंपरिक बिजली नेटवर्क पहुंचाना महंगा और समय लेने वाला काम होता है।
ज़फीरी प्लेटफॉर्म का लक्ष्य वर्ष 2030 तक लगभग 1 करोड़ नए बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने में मदद करना है। यह पहल वर्ल्ड बैंक और अफ्रीकन डेवलपमेंट बैंक के ‘मिशन 300’ कार्यक्रम का हिस्सा है। इस बड़े अभियान का मकसद करीब 30 करोड़ अफ्रीकी लोगों को बिजली की सुविधा से जोड़ना है।
अफ्रीका में ऊर्जा की कमी लंबे समय से विकास की राह में बड़ी चुनौती रही है। कई देशों में उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पाती। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग अक्सर डीजल जनरेटर, मिट्टी के तेल या अन्य महंगे और प्रदूषण फैलाने वाले विकल्पों पर निर्भर रहते हैं। इससे लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
नई योजना में सौर ऊर्जा को विशेष महत्व दिया गया है। अफ्रीका के कई हिस्सों में पूरे साल अच्छी धूप मिलती है, इसलिए सौर ऊर्जा को वहां के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प माना जाता है। सोलर होम सिस्टम के जरिए छोटे घरों को रोशनी, मोबाइल चार्जिंग और बुनियादी बिजली सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। वहीं मिनी-ग्रिड तकनीक छोटे गांवों और कस्बों को सामूहिक रूप से बिजली उपलब्ध कराने में मदद करती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली केवल रोशनी का साधन नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास की बुनियाद भी है। जब किसी गांव में बिजली पहुंचती है तो वहां छोटे उद्योग शुरू हो सकते हैं, दुकानों का कामकाज बढ़ सकता है और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। इसी कारण अफ्रीका में ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस पहल का असर शिक्षा क्षेत्र पर भी देखने को मिल सकता है। जिन इलाकों में बिजली नहीं होती, वहां बच्चों की पढ़ाई अक्सर सूरज ढलने के बाद रुक जाती है। बिजली उपलब्ध होने पर छात्र रात में भी पढ़ सकेंगे और स्कूलों में डिजिटल संसाधनों का उपयोग बढ़ सकेगा। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी बिजली बेहद जरूरी है। ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों के संरक्षण, जांच उपकरणों के संचालन और आपातकालीन सेवाओं के लिए लगातार बिजली की आवश्यकता होती है। कई क्षेत्रों में बिजली की कमी के कारण स्वास्थ्य सुविधाएं प्रभावित होती हैं। नई परियोजनाओं से इस स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है। ऊर्जा क्षेत्र में इस बड़े निवेश के साथ-साथ अफ्रीका में बुनियादी ढांचे के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में केन्या सरकार ने राजधानी नैरोबी स्थित जोमो केन्याटा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (JKIA) के विस्तार और आधुनिकीकरण की योजना को आगे बढ़ाया है।
इस परियोजना के लिए लगभग 1.2 बिलियन डॉलर तक की फाइनेंसिंग जुटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके लिए अफ्रीका फाइनेंस कॉरपोरेशन (AFC) और ट्रेड एंड डेवलपमेंट बैंक को प्रमुख वित्तीय समन्वयक की जिम्मेदारी दी गई है।
एयरपोर्ट विस्तार योजना के तहत यात्रियों की क्षमता को काफी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में यह हवाई अड्डा सालाना लगभग 75 लाख यात्रियों को संभालता है। नई परियोजना पूरी होने के बाद इसकी क्षमता बढ़ाकर करीब 2.2 करोड़ यात्रियों प्रति वर्ष करने की योजना है। इस विस्तार में नए टर्मिनल निर्माण के साथ-साथ मौजूदा सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम भी शामिल होगा। सरकार का मानना है कि इससे केन्या क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय विमानन केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत कर सकेगा।
बेहतर एयरपोर्ट सुविधाओं का सीधा असर व्यापार, पर्यटन और निवेश पर पड़ता है। अधिक यात्री क्षमता का मतलब है कि अधिक उड़ानें संचालित की जा सकेंगी और विदेशी निवेशकों तथा पर्यटकों के लिए आवागमन आसान होगा। इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
अफ्रीका के लिए यह समय कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष, आर्थिक चुनौतियां और राजनीतिक अस्थिरता की खबरें सुर्खियों में रहती हैं, वहीं दूसरी तरफ अफ्रीकी देशों में बिजली, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं में बड़े निवेश भी हो रहे हैं।
इन परियोजनाओं का सबसे बड़ा फायदा आम लोगों को मिल सकता है। बिजली मिलने से छोटे कारोबार शुरू हो सकते हैं, किसान आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर सकते हैं और स्थानीय बाजारों की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। मोबाइल फोन और इंटरनेट सेवाओं का उपयोग भी तेजी से बढ़ सकता है, जिससे लोग डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़ सकेंगे।
भारत में भी पिछले वर्षों में गांवों तक बिजली और इंटरनेट पहुंचने से कई क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिला है। इसी तरह अफ्रीका में भी ऊर्जा और बुनियादी ढांचे में निवेश को विकास की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल ज़फीरी प्लेटफॉर्म और केन्या एयरपोर्ट परियोजना को अफ्रीका के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि तय लक्ष्यों के अनुसार काम आगे बढ़ता है, तो आने वाले वर्षों में लाखों परिवारों को बिजली की सुविधा मिलेगी और कई देशों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है।
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