ऑस्ट्रेलिया में बर्ड फ्लू के एक खतरनाक वायरस की पुष्टि होने के बाद न्यूज़ीलैंड समेत कई देशों ने सतर्कता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी आगे दूसरे देशों तक भी पहुंच सकती है। फिलहाल सरकारें निगरानी बढ़ाने और पोल्ट्री फार्मों को सावधानी बरतने की सलाह दे रही हैं।
ऑस्ट्रेलिया में बर्ड फ्लू के एक खतरनाक प्रकार के मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग और कृषि क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। इस खबर के सामने आने के बाद पड़ोसी देश न्यूज़ीलैंड भी सतर्क हो गया है। वहां के विशेषज्ञों का मानना है कि यह वायरस भविष्य में उनके देश तक भी पहुंच सकता है। इसी वजह से सरकार ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है। बर्ड फ्लू एक ऐसी बीमारी है जो मुख्य रूप से पक्षियों में फैलती है। यह वायरस मुर्गियों, बत्तखों और कई जंगली पक्षियों को प्रभावित कर सकता है। जब किसी इलाके में यह बीमारी फैलती है तो बड़ी संख्या में पक्षी बीमार पड़ सकते हैं। कई बार संक्रमण को रोकने के लिए लाखों पक्षियों को मारना भी पड़ता है।
ऑस्ट्रेलिया में इस वायरस की पुष्टि होने के बाद पोल्ट्री उद्योग यानी मुर्गी पालन से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ गई है। मुर्गी पालन उद्योग कई देशों में खाद्य आपूर्ति का बड़ा हिस्सा है। अंडे और चिकन की जरूरत को पूरा करने में यह उद्योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि बीमारी तेजी से फैलती है तो उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
न्यूज़ीलैंड के एक वरिष्ठ स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने कहा है कि यह संक्रमण उनके देश तक पहुंचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि आज के समय में पक्षियों की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय संपर्क इतने ज्यादा हैं कि किसी बीमारी को एक जगह तक सीमित रखना आसान नहीं होता।
इसी कारण न्यूज़ीलैंड सरकार ने निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है। स्वास्थ्य विभाग और कृषि विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। पोल्ट्री फार्म चलाने वाले लोगों को नए दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। उन्हें अपने फार्मों में साफ-सफाई रखने और पक्षियों की नियमित जांच करने की सलाह दी गई है।
अधिकारियों ने सीमाओं पर भी निगरानी बढ़ा दी है। प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले सामान और यात्रियों पर नजर रखी जा रही है। सरकार का कहना है कि बीमारी को रोकने के लिए पहले से तैयारी करना जरूरी है। बर्ड फ्लू कोई नई बीमारी नहीं है। पिछले कई वर्षों में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इसके मामले सामने आते रहे हैं। एशिया, यूरोप और अफ्रीका के कई देशों में इस बीमारी ने पोल्ट्री उद्योग को नुकसान पहुंचाया है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लाखों पक्षियों को नष्ट करना पड़ा था।
वैज्ञानिकों का कहना है कि फ्लू के वायरस समय के साथ बदलते रहते हैं। कभी-कभी इनमें ऐसे बदलाव भी हो सकते हैं जो बीमारी को ज्यादा तेजी से फैलाने वाले बना दें। इसी वजह से हर नए वायरस पर विशेष नजर रखी जाती है।
फिलहाल विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी मुख्य रूप से पक्षियों में ही देखी जा रही है। आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन सावधानी रखना जरूरी है ताकि किसी भी जोखिम को कम किया जा सके।
स्वास्थ्य एजेंसियां लोगों को सलाह दे रही हैं कि यदि उन्हें कोई बीमार या मृत पक्षी दिखाई दे तो उसे हाथ न लगाएं। ऐसी स्थिति में स्थानीय अधिकारियों को जानकारी देना बेहतर माना जाता है। बिना सुरक्षा के बीमार पक्षियों के संपर्क में आने से बचने की सलाह दी गई है।
खाद्य सुरक्षा को लेकर भी कुछ सामान्य सावधानियां बताई गई हैं। अंडे और चिकन को अच्छी तरह पकाकर खाना चाहिए। सही तरीके से पकाया गया भोजन आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है। कच्चे या अधपके पोल्ट्री उत्पादों से बचने की सलाह दी जाती है।
वन्यजीव विभाग भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। कई जंगली पक्षी लंबी दूरी की यात्रा करते हैं। इन्हें प्रवासी पक्षी कहा जाता है। ऐसे पक्षी एक देश से दूसरे देश तक जाते हैं और कुछ मामलों में वायरस को भी साथ ले जा सकते हैं। यही कारण है कि जंगली पक्षियों की निगरानी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कोरोना महामारी के बाद दुनिया भर के देशों ने स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया है। अब किसी भी नई बीमारी या वायरस की जानकारी मिलते ही सरकारें तेजी से कदम उठाने की कोशिश करती हैं। ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड भी इसी रणनीति पर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारी को रोकने का सबसे अच्छा तरीका समय पर जानकारी और सावधानी है। यदि शुरुआती स्तर पर संक्रमण का पता चल जाए तो उसके फैलाव को नियंत्रित करना आसान हो सकता है।
भारत समेत कई अन्य देश भी बर्ड फ्लू की स्थिति पर नजर रखते हैं। दुनिया आज पहले से ज्यादा जुड़ी हुई है। एक देश में पैदा हुई स्वास्थ्य चुनौती का असर दूसरे देशों तक पहुंच सकता है। इसलिए विभिन्न देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां एक-दूसरे के साथ जानकारी साझा करती रहती हैं।
फिलहाल ऑस्ट्रेलिया में मिले इस नए संक्रमण को लेकर निगरानी जारी है। न्यूज़ीलैंड भी तैयारियों में जुटा हुआ है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।
अभी तक यह बीमारी मुख्य रूप से पक्षियों से जुड़ी समस्या बनी हुई है। फिर भी सरकारें और विशेषज्ञ लगातार हालात पर नजर रखे हुए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। आने वाले दिनों में जांच और निगरानी से यह साफ होगा कि वायरस का फैलाव कितना व्यापक है और इससे निपटने के लिए आगे क्या कदम उठाने होंगे।
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