साइबर ठगी के मामलों में शिकायतों के निपटारे और ठगी गई रकम की वापसी को आसान बनाने के लिए गृह मंत्रालय के तहत इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने दो नए पोर्टल शुरू किए हैं। इनसे पुलिस, बैंकिंग नेटवर्क और शिकायत प्रणाली के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।
देश में डिजिटल भुगतान का दायरा तेजी से बढ़ने के साथ साइबर ठगी के मामलों में भी लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार लोगों को राहत देने के उद्देश्य से गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने दो नए डिजिटल प्लेटफॉर्म—ग्रिवेंस रेड्रेसल मैकेनिज्म (GRM) और मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM)—की शुरुआत की है। इनका मकसद साइबर अपराध पीड़ितों की शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना और ठगी गई रकम की रिकवरी को तेज करना है।
अब तक नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के माध्यम से लोग साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकते थे। लेकिन शिकायत दर्ज होने के बाद अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी, फॉलोअप की धीमी गति और रकम वापस दिलाने की जटिल प्रक्रिया जैसी चुनौतियां सामने आती रही हैं। नए पोर्टल्स को इन्हीं व्यावहारिक समस्याओं को दूर करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
GRM यानी ग्रिवेंस रेड्रेसल मैकेनिज्म पोर्टल पीड़ितों को अपनी शिकायत की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक करने की सुविधा देगा। इससे शिकायत किस स्तर पर पहुंची है, संबंधित एजेंसी द्वारा क्या कार्रवाई की गई है और मामला किस चरण में है, इसकी जानकारी अधिक पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हो सकेगी। इससे शिकायतकर्ताओं को बार-बार अलग-अलग कार्यालयों या एजेंसियों से संपर्क करने की आवश्यकता भी कम हो सकती है।
दूसरी ओर, मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) विशेष रूप से उन मामलों के लिए तैयार किया गया है जिनमें समय रहते कार्रवाई कर ठगी गई राशि को बैंकिंग प्रणाली के भीतर ही रोका या वापस कराया जा सकता है। साइबर अपराध के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यदि इसी अवधि में बैंक, पुलिस और संबंधित एजेंसियां समन्वित तरीके से काम करें तो पीड़ित की आर्थिक क्षति को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डिजिटल लेनदेन के बढ़ते चलन के बीच यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग और अन्य ऑनलाइन भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोग साइबर अपराधियों के निशाने पर रहते हैं। विभिन्न एजेंसियों के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि हर साल बड़ी संख्या में लोग फर्जी कॉल, लिंक, निवेश के झांसे, केवाईसी अपडेट और अन्य तरीकों से होने वाली ऑनलाइन ठगी का शिकार बनते हैं। इनमें से कई मामलों में शिकायत दर्ज होने के बावजूद पीड़ितों को अपनी रकम वापस पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
नए पोर्टल्स की शुरुआत आम नागरिकों के लिए भरोसा बढ़ाने वाला कदम मानी जा रही है। अब शिकायत दर्ज कराने के बाद लोगों को यह जानने में आसानी होगी कि उनकी फाइल किस स्तर पर है और पैसे की रिकवरी के प्रयास कितनी प्रगति पर हैं। इससे डिजिटल भुगतान व्यवस्था के प्रति उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।
गृह मंत्रालय की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब देश डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से इस बात पर बल देते रहे हैं कि तकनीकी व्यवस्था के साथ-साथ त्वरित संस्थागत समन्वय ही साइबर ठगी से होने वाले नुकसान को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है। GRM और MRM पोर्टल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रयास के रूप में देखे जा रहे हैं।
अधिकारियों का मानना है कि शिकायतों की निगरानी, एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और समयबद्ध कार्रवाई की व्यवस्था से साइबर अपराध पीड़ितों को पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित सहायता मिल सकेगी। डिजिटल लेनदेन का उपयोग करने वाले लोगों के लिए यह पहल न केवल सुविधा बढ़ाएगी, बल्कि ऑनलाइन वित्तीय सुरक्षा के प्रति विश्वास को भी मजबूती दे सकती है।
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