पेरिस में आयोजित VivaTech 2026 में भारत को आधिकारिक "AI Country Partner" का दर्जा मिला। 80 से अधिक भारतीय डीपटेक स्टार्टअप्स ने अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करते हुए मानव-केंद्रित और जिम्मेदार एआई मॉडल को वैश्विक मंच पर रखा।
"यूरोप के सबसे बड़े टेक और स्टार्टअप आयोजनों में शामिल VivaTech 2026 में इस बार भारत की भूमिका खास रही। पेरिस में आयोजित इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में भारत को आधिकारिक ""AI Country Partner"" और ""Official AI Partner Country"" के रूप में मान्यता दी गई। यह दर्जा ऐसे समय में मिला है जब दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिशा और उसके जिम्मेदार उपयोग को लेकर नई नीतियों और साझेदारियों की तलाश में है।
इस आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया। दोनों नेताओं की मौजूदगी ने भारत-फ्रांस तकनीकी सहयोग को नई मजबूती देने का संकेत दिया। वैश्विक निवेशकों, तकनीकी कंपनियों और नीति निर्माताओं के बीच भारत की बढ़ती भूमिका चर्चा का विषय बनी रही।
VivaTech 2026 में स्थापित ""इंडिया पवेलियन"" आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इसका उद्घाटन किया। इस पवेलियन में 80 से अधिक भारतीय डीपटेक स्टार्टअप्स और कंपनियों ने अपने समाधान पेश किए। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थ-टेक, क्लाइमेट-टेक, स्पेसटेक और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों से जुड़ी तकनीकें शामिल थीं।
आकार और भागीदारी के लिहाज से यह सबसे बड़े राष्ट्रीय पवेलियनों में से एक माना गया। भारतीय कंपनियों ने ऐसे उत्पाद और सेवाएं प्रदर्शित कीं, जिनका उद्देश्य केवल व्यावसायिक विस्तार नहीं बल्कि वास्तविक समस्याओं का तकनीकी समाधान प्रस्तुत करना भी था। इससे विदेशी निवेशकों और वैश्विक साझेदारों को भारतीय नवाचार क्षमता को करीब से समझने का अवसर मिला।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में मानव-केंद्रित एआई की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि तकनीक का उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचना चाहिए। इसी सोच के तहत भारत ने ""MANAV"" विज़न को सामने रखा।
MANAV विज़न के तहत एआई को नैतिक, जवाबदेह, समावेशी और भरोसेमंद बनाने की वकालत की गई। भारत ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह केवल दुनिया का बड़ा डिजिटल उपभोक्ता बाजार नहीं है, बल्कि जिम्मेदार एआई गवर्नेंस और वैश्विक नीति निर्माण में भी योगदान देने की क्षमता रखता है।
भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए यह मंच कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैश्विक निवेशकों तक सीधी पहुंच, रणनीतिक साझेदारियों की संभावनाएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों पर काम करने के अवसर भारतीय उद्यमियों के लिए नए रास्ते खोल सकते हैं। इससे अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसरों को भी गति मिल सकती है।
VivaTech 2026 में भारत की सक्रिय भागीदारी इस व्यापक बदलाव की ओर भी इशारा करती है, जिसमें देश पारंपरिक आईटी सेवाओं के केंद्र से आगे बढ़कर उत्पाद और प्लेटफॉर्म आधारित तकनीकी ताकत बनने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, सेमीकंडक्टर विनिर्माण, डेटा सेंटर क्षमता और बहुभाषी एआई मॉडल जैसे क्षेत्रों में अभी काफी काम किया जाना बाकी है।
इसके बावजूद पेरिस के इस वैश्विक मंच पर भारत की मौजूदगी ने यह स्पष्ट किया कि देश अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि भविष्य की डिजिटल व्यवस्था को आकार देने वाले देशों की कतार में अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।"
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