पश्चिम राजस्थान में पिछले 24 घंटों के दौरान धूल भरी आंधियों का असर बढ़ा है, जिसमें चूरू जिला सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। तेज़ हवाओं के साथ उठे धूल के घने गुबार के कारण कई जगहों पर दृश्यता काफी कम हो गई और जनजीवन प्रभावित हुआ। भारत मौसम विभाग (IMD) ने 18 से 20 जून के बीच पश्चिम राजस्थान के लिए धूल भरी आंधी, गरज-चमक और तेज़ हवाओं की चेतावनी जारी की है, जिसमें जोधपुर क्षेत्र भी शामिल है। मौसम विभाग के अनुसार अगले एक-दो दिनों तक पश्चिम और पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में ऐसा मौसम बना रह सकता है। राज्य के कई इलाकों में रात का तापमान भी सामान्य से ऊपर दर्ज हो रहा है। प्रशासन ने लोगों को आंधी के दौरान घरों में रहने, कमजोर ढांचों और पेड़ों से दूर रहने तथा धूल से बचाव के लिए मास्क या कपड़े का उपयोग करने की सलाह दी है। किसानों और सांस संबंधी समस्याओं वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।
पश्चिम राजस्थान इन दिनों एक बार फिर धूल भरी आंधियों के दौर से गुजर रहा है। पिछले 24 घंटों के दौरान चूरू जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों में चली तेज़ धूल भरी आंधी का असर दूर-दूर तक महसूस किया गया। मरुस्थलीय इलाकों में उठे धूल के विशाल गुबार ने न केवल दृश्यता को प्रभावित किया बल्कि आम जनजीवन, सड़क यातायात और दैनिक गतिविधियों पर भी असर डाला। भारत मौसम विभाग (IMD) ने 18 से 20 जून के बीच पश्चिम राजस्थान के कई जिलों के लिए धूल भरी आंधी, गरज-चमक और तेज़ हवाओं की चेतावनी जारी की है, जिसमें जोधपुर संभाग के क्षेत्र भी शामिल हैं। चूरू में हाल के दिनों में दर्ज हुई धूल भरी आंधियों के वीडियो और तस्वीरों ने इस मौसमीय बदलाव की गंभीरता को सामने ला दिया है। कई स्थानों पर दोपहर के समय ही आसमान धूल से ढक गया और दृश्यता अचानक काफी कम हो गई। रेतीले क्षेत्रों में यह स्थिति नई नहीं है, लेकिन इस बार लगातार सक्रिय प्री-मानसून सिस्टम के कारण आंधियों की आवृत्ति बढ़ती दिखाई दे रही है।
मौसम विभाग की ताजा प्रेस रिलीज़ के अनुसार पश्चिम राजस्थान में डस्टस्टॉर्म एक्टिविटी की संभावना बनी हुई है। विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि अगले एक से दो दिनों तक कई जिलों में मौसम का यही रुख जारी रह सकता है। आंधी के साथ कहीं-कहीं गरज-चमक और तेज़ हवाएं भी चल सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियां प्री-मानसून गतिविधियों के लिए अनुकूल बनी हुई हैं। राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र विशेष रूप से धूल भरी आंधियों के प्रति संवेदनशील माने जाते हैं। जब जमीन लंबे समय तक सूखी रहती है और अचानक हवा की गति बढ़ती है, तब रेत और महीन धूल बड़ी मात्रा में हवा में उठ जाती है। यही धूल आगे चलकर विशाल गुबार का रूप ले लेती है। चूरू, बीकानेर, श्रीगंगानगर और जोधपुर क्षेत्र में ऐसी परिस्थितियां अक्सर गर्मी के अंतिम चरण और मानसून के आगमन से पहले देखने को मिलती हैं।
इस बार भी कुछ ऐसा ही परिदृश्य बनता दिखाई दे रहा है। पिछले सप्ताह से पश्चिम राजस्थान में कई बार धूल भरी आंधियां दर्ज की गई हैं। मौसम विभाग के अनुसार यह गतिविधियां ऐसे समय में सक्रिय हैं जब देश के कई हिस्सों में मानसून की प्रगति धीमी पड़ी हुई है। मानसून की गति में कमी के कारण गर्म और शुष्क हवाओं का प्रभाव बना हुआ है, जिससे धूल उड़ने की स्थितियां तैयार हो रही हैं।
15 जून को उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के कुछ इलाकों में आए एक बड़े डस्ट स्टॉर्म के दौरान दृश्यता बेहद कम दर्ज की गई थी। कई स्थानों पर वाहन चालकों को हेडलाइट और हज़ार्ड लाइट का उपयोग करना पड़ा। अचानक दृश्यता घटने के कारण सड़कों पर वाहन चालकों को सावधानी बरतनी पड़ी। धूल भरे गुबार के कारण लंबी दूरी तक देख पाना मुश्किल हो गया था।
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जोधपुर सहित पश्चिम राजस्थान के कई शहरों में लोगों ने हवा में धूल की मात्रा बढ़ने का असर महसूस किया। खुले इलाकों में काम करने वाले लोगों, दिहाड़ी मजदूरों और सड़क पर अधिक समय बिताने वालों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। धूल के महीन कण आंखों और श्वसन तंत्र पर असर डाल सकते हैं, इसलिए विशेषज्ञ ऐसे मौसम में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।
IMD के अनुसार राज्य के कई हिस्सों में रात का तापमान सामान्य से 1.6 से 3 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है। इसका मतलब है कि दिन के साथ-साथ रात में भी गर्मी का असर बना हुआ है। सामान्यतः रात के समय तापमान में गिरावट लोगों को राहत देती है, लेकिन जब रातें भी अपेक्षाकृत गर्म रहें तो उमस और असहजता बढ़ जाती है।
गर्मी और धूल भरी हवाओं का यह मिश्रण स्वास्थ्य के लिहाज से भी चुनौतीपूर्ण माना जाता है। दमा, एलर्जी या सांस से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। तेज़ हवा और धूल के दौरान अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना बेहतर माना जाता है। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो आंखों और नाक को ढंककर निकलना उपयोगी हो सकता है।
प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से लोगों को कई सावधानियां अपनाने की सलाह दी गई है। आंधी के दौरान पुराने पेड़ों, कमजोर ढांचों, टिन शेड और अस्थायी निर्माणों से दूरी बनाए रखने को कहा गया है। तेज़ हवा के समय खुले स्थानों में खड़े रहने से भी बचने की सलाह दी जाती है।
धूल भरी आंधियों का असर केवल शहरों तक सीमित नहीं रहता। ग्रामीण इलाकों में भी इसका प्रभाव देखा जाता है। खेतों में काम कर रहे किसानों और पशुपालकों के लिए ऐसे मौसम में अतिरिक्त सतर्कता आवश्यक हो जाती है। कई किसान मानसून की पहली अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन लगातार गर्म हवाएं और धूल भरी आंधियां खेती से जुड़ी तैयारियों को प्रभावित कर सकती हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि प्री-मानसून अवधि में होने वाली ऐसी गतिविधियां मानसून से पहले के मौसमीय बदलाव का हिस्सा होती हैं। हालांकि हर आंधी का संबंध सीधे मानसून की प्रगति से नहीं होता, लेकिन यह वातावरण में मौजूद अस्थिरता और बदलते मौसम संकेतों को दर्शाती है। पश्चिम राजस्थान में जून के दूसरे और तीसरे सप्ताह के दौरान ऐसी परिस्थितियां अक्सर बनती हैं।
यातायात के लिहाज से भी धूल भरी आंधियां चुनौती पैदा कर सकती हैं। अचानक दृश्यता कम होने से सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए वाहन चालकों को गति नियंत्रित रखने, सुरक्षित दूरी बनाए रखने और आवश्यक होने पर वाहन रोकने की सलाह दी जाती है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए सुरक्षा चश्मा और चेहरे को ढंकना विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है।
आंधी के दौरान बिजली और संचार सेवाओं पर भी असर पड़ने की संभावना रहती है। तेज़ हवाओं के कारण कुछ क्षेत्रों में अस्थायी व्यवधान उत्पन्न हो सकते हैं। इसी वजह से लोगों को मोबाइल फोन चार्ज रखने और आवश्यक वस्तुएं पहले से तैयार रखने की सलाह दी जाती है।
मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगले एक-दो दिनों तक पश्चिम और पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में आंधी, तेज़ हवा और धूल भरी परिस्थितियां बनी रह सकती हैं। ऐसे में नागरिकों को मौसम संबंधी आधिकारिक अपडेट पर नजर रखने और जारी सलाह का पालन करने को कहा गया है।
फिलहाल पश्चिम राजस्थान में मौसम का मिजाज तेजी से बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। चूरू से उठी धूल भरी आंधी ने एक बार फिर यह दिखाया है कि मरुस्थलीय इलाकों में प्री-मानसून गतिविधियां कितनी तेजी से सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं। मौसम विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है।
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