सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि WHO का Pandemic Agreement सदस्य देशों की संप्रभुता खत्म कर देगा और संगठन को लॉकडाउन या वैक्सीन-मैंडेट लागू करने का अधिकार दे देगा। आधिकारिक दस्तावेज़ों और संबंधित सरकारी बयानों की जांच में यह दावा गलत पाया गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के Pandemic Agreement को लेकर सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर एक दावा तेजी से साझा किया जा रहा है। वायरल संदेशों में कहा जा रहा है कि इस समझौते पर हस्ताक्षर होते ही WHO को किसी भी देश पर लॉकडाउन, वैक्सीन-मैंडेट और यात्रा प्रतिबंध जैसे कदम थोपने का अधिकार मिल जाएगा। साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि इससे देशों की राष्ट्रीय संप्रभुता कमजोर हो जाएगी।
तथ्यों की जांच में यह दावा सही नहीं पाया गया।
WHO और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज़ों में स्पष्ट किया गया है कि Pandemic Agreement का उद्देश्य वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना है। दस्तावेज़ों में कहीं भी WHO को ऐसी नई शक्तियां दिए जाने का उल्लेख नहीं है जिनके आधार पर वह किसी देश को लॉकडाउन लगाने, टीकाकरण अनिवार्य करने या यात्रा प्रतिबंध लागू करने का आदेश दे सके।
UN News में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, यह समझौता सदस्य देशों की संप्रभुता को प्रभावित नहीं करता। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि WHO को ऐसी कोई अधिकारिक शक्ति नहीं मिलती जिससे वह देशों पर स्वास्थ्य संबंधी उपाय जबरन लागू कर सके। महामारी के दौरान कौन से कदम उठाए जाएंगे, इसका अंतिम निर्णय संबंधित देशों की सरकारों के पास ही रहेगा।
Pandemic Agreement मुख्य रूप से उन कमियों को दूर करने की कोशिश है जो कोविड-19 महामारी के दौरान सामने आई थीं। इसमें रोगजनकों से जुड़ा डेटा साझा करने, वैज्ञानिक अनुसंधान में सहयोग बढ़ाने, स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत बनाने, वित्तीय सहयोग और स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच जैसे विषयों पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य देशों के बीच समन्वय बढ़ाना है, न कि किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था को राष्ट्रीय सरकारों से ऊपर अधिकार देना।
ब्राज़ील का स्वास्थ्य मंत्रालय भी इस समझौते का समर्थक रहा है। मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी में कहा गया है कि समझौता सदस्य देशों की भागीदारी और सहमति पर आधारित है। दस्तावेज़ों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं बताया गया है जिसके तहत WHO किसी देश की मंजूरी के बिना उसके भीतर कोई स्वास्थ्य उपाय लागू कर सके।
वायरल दावों में अक्सर यह कहा जाता है कि Pandemic Agreement के जरिए WHO को “वैश्विक नियंत्रण” की शक्ति मिल जाएगी। लेकिन उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज़ों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं दिखाई देती। इसके बजाय समझौता महामारी की स्थिति में संसाधनों, जानकारी और तकनीकी सहयोग को बेहतर बनाने पर केंद्रित है।
इस विषय पर प्रकाशित विश्लेषणों में यह भी बताया गया है कि समझौते को लेकर वास्तविक बहस किसी कथित “WHO नियंत्रण” पर नहीं, बल्कि कुछ तकनीकी और नीतिगत मुद्दों पर केंद्रित रही है। इनमें विशेष रूप से Pathogen Access and Benefit Sharing (PABS) व्यवस्था शामिल है। यह व्यवस्था इस बात से जुड़ी है कि रोगजनकों का डेटा साझा करने वाले देशों, खासकर विकासशील देशों, को वैक्सीन, दवाओं और अन्य स्वास्थ्य संसाधनों तक किस तरह बेहतर पहुंच मिल सके।
विशेषज्ञ चर्चाओं और अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं में भी विवाद का केंद्र यही रहा है कि वैश्विक स्वास्थ्य संसाधनों का वितरण अधिक न्यायसंगत कैसे बनाया जाए। WHO को सदस्य देशों पर सीधे आदेश देने की शक्ति देने का मुद्दा इन चर्चाओं का मुख्य विषय नहीं रहा है।
फैक्ट चेक में उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज़ों, संयुक्त राष्ट्र से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज़ों, WHO के स्पष्टीकरणों और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों के आधार पर यह स्पष्ट किया गया है कि Pandemic Agreement किसी भी स्थिति में WHO को किसी देश पर बाध्यकारी आदेश देने की शक्ति नहीं देता।
समझौते में यह भी साफ लिखा गया है कि सभी आपातकालीन स्वास्थ्य उपायों का अंतिम निर्णय संबंधित देश की सरकारें ही लेंगी। WHO की भूमिका केवल समन्वय, तकनीकी सहायता और वैश्विक सहयोग को मजबूत करने तक सीमित रहेगी।
इसी तरह कई अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी स्पष्ट किया है कि यह समझौता संप्रभुता को कमजोर करने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की महामारियों से बेहतर तरीके से निपटने के लिए बनाया जा रहा है। कोविड-19 महामारी के दौरान सामने आई समस्याओं—जैसे डेटा साझा करने में देरी, वैक्सीन की असमान उपलब्धता और स्वास्थ्य संसाधनों की कमी—को ध्यान में रखते हुए इस ढांचे पर काम किया गया है।
UN से जुड़े विश्लेषणों में यह भी कहा गया है कि यह समझौता कानूनी रूप से देशों की स्वैच्छिक भागीदारी पर आधारित है। यानी कोई भी देश इसे लागू करने या न करने के लिए स्वतंत्र रहेगा और इसके तहत किसी भी प्रकार की जबरन नीति लागू नहीं की जा सकती।
इस तरह वायरल संदेशों में किए जा रहे दावे तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक पाए गए हैं। आधिकारिक दस्तावेजों में कहीं भी WHO को लॉकडाउन, वैक्सीन अनिवार्यता या यात्रा प्रतिबंध जैसे निर्णय थोपने की शक्ति देने का प्रावधान नहीं है।
फिलहाल यह समझौता अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने, स्वास्थ्य आपात स्थितियों में तेजी से प्रतिक्रिया देने और भविष्य की महामारियों के लिए वैश्विक तैयारी को बेहतर बनाने की दिशा में एक ढांचा मात्र है।
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