सोशल मीडिया पर NEET री-एग्जाम का कथित प्रश्नपत्र और उससे जुड़ी जानकारी तेजी से वायरल हुई थी। PIB Fact Check ने जांच के बाद स्पष्ट किया कि यह प्रश्नपत्र और संबंधित संदेश पूरी तरह फर्जी हैं तथा NTA ने ऐसा कोई पेपर जारी नहीं किया है। छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा से जुड़ी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट और प्रमाणित स्रोतों पर ही भरोसा करें, ताकि गलत सूचना और भ्रम से बचा जा सके।
देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET से जुड़ी एक और भ्रामक सूचना हाल ही में सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने लगी। लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच उस समय भ्रम की स्थिति पैदा हो गई जब एक कथित प्रश्नपत्र को NEET या NEET-PG री-एग्जाम का लीक हुआ पेपर बताकर विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया जाने लगा। इस कथित प्रश्नपत्र के साथ परीक्षा की तारीख, नए परीक्षा केंद्रों और अन्य बदलावों से जुड़ी जानकारी भी प्रसारित की गई, जिससे कई अभ्यर्थी असमंजस में पड़ गए।
हालांकि, मामले की जांच के बाद Press Information Bureau (PIB) के आधिकारिक फैक्ट-चेक प्लेटफॉर्म PIB Fact Check ने स्पष्ट किया कि वायरल हो रहा प्रश्नपत्र और उससे जुड़ी जानकारी पूरी तरह फर्जी है। PIB ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी परीक्षा संबंधी सूचना के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें। सोशल मीडिया पर तेजी से फैली अफवाह डिजिटल युग में सूचना का प्रसार पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज हो गया है। व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, फेसबुक, एक्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए कोई भी संदेश कुछ ही घंटों में लाखों लोगों तक पहुंच सकता है। इसी का फायदा उठाते हुए कुछ लोगों ने एक कथित प्रश्नपत्र को NEET री-एग्जाम का पेपर बताकर प्रसारित करना शुरू कर दिया।
वायरल संदेशों में दावा किया गया कि यह परीक्षा में पूछे जाने वाले सवालों का वास्तविक सेट है। कई पोस्ट में यह भी कहा गया कि परीक्षा की तारीख में बदलाव किया गया है और नए परीक्षा केंद्रों की सूची जारी कर दी गई है। इन दावों ने परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच भ्रम पैदा कर दिया।
PIB Fact Check ने क्या कहा? PIB Fact Check ने वायरल दावों की जांच की और पाया कि सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा प्रश्नपत्र वास्तविक नहीं है। फैक्ट-चेक के दौरान यह भी सामने आया कि वायरल दस्तावेज में दी गई जानकारी आधिकारिक अधिसूचनाओं से मेल नहीं खाती।
PIB ने स्पष्ट किया कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से ऐसा कोई प्रश्नपत्र जारी नहीं किया गया है। साथ ही वायरल संदेश में दी गई परीक्षा संबंधी जानकारियां भी आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुरूप नहीं पाई गईं।
इस स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा प्रश्नपत्र और उससे जुड़ी सूचनाएं भ्रामक थीं। क्यों बढ़ जाती है ऐसी अफवाहों की पहुंच?
प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी खबरें छात्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। परीक्षा की तारीख, प्रश्नपत्र, परिणाम या प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी किसी भी सूचना का सीधा असर लाखों अभ्यर्थियों पर पड़ता है। जब किसी परीक्षा को लेकर पहले से चर्चा या विवाद चल रहा हो, तब अफवाहें और तेजी से फैलती हैं। छात्र स्वाभाविक रूप से हर नई जानकारी को जानने की कोशिश करते हैं और कई बार बिना पुष्टि किए संदेशों को आगे बढ़ा देते हैं।
यही कारण है कि परीक्षा संबंधी फर्जी सूचनाएं अक्सर कम समय में व्यापक स्तर पर वायरल हो जाती हैं। NEET से जुड़ी चर्चाओं का असर हाल के वर्षों में NEET और अन्य बड़ी राष्ट्रीय परीक्षाओं को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आती रही हैं। पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन, री-एग्जाम और डेट परिवर्तन जैसे विषय समय-समय पर सार्वजनिक बहस का हिस्सा बने हैं।
ऐसे माहौल में जब कोई फर्जी नोटिस या प्रश्नपत्र सामने आता है, तो कई लोग उसे सही मान लेते हैं। इससे छात्रों के बीच अनावश्यक तनाव और भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। PIB Fact Check ने भी इसी पृष्ठभूमि में लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है। छात्रों के लिए सबसे बड़ा खतरा फर्जी प्रश्नपत्र या नकली नोटिस केवल गलत सूचना नहीं होते, बल्कि ये छात्रों की तैयारी को भी प्रभावित कर सकते हैं। कई छात्र वायरल सामग्री को सही मानकर अपनी पढ़ाई की रणनीति बदल सकते हैं।
यदि कोई अभ्यर्थी गलत जानकारी के आधार पर तैयारी करने लगे, तो उसकी महीनों की मेहनत प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि परीक्षा संबंधी किसी भी सूचना की पुष्टि करना बेहद जरूरी माना जाता है।
विशेषज्ञ लंबे समय से यह सलाह देते रहे हैं कि किसी भी वायरल दस्तावेज को आधिकारिक पुष्टि के बिना सही नहीं मानना चाहिए। आधिकारिक स्रोतों पर ही करें भरोसा PIB Fact Check ने छात्रों और अभिभावकों से स्पष्ट रूप से कहा है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट और मान्यता प्राप्त सूचना स्रोतों पर भरोसा करें।
परीक्षा से जुड़ी किसी भी सूचना की पुष्टि करने के लिए NTA की आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत नोटिस सबसे विश्वसनीय माध्यम माने जाते हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी संदेश को अंतिम सत्य मानने से पहले उसकी जांच करना आवश्यक है। डिजिटल युग में फैक्ट चेकिंग का महत्व इंटरनेट और सोशल मीडिया ने सूचना तक पहुंच आसान बनाई है, लेकिन इसके साथ गलत जानकारी का खतरा भी बढ़ा है। कई बार पुराने दस्तावेजों, संपादित तस्वीरों या नकली नोटिसों को नए घटनाक्रम के रूप में पेश किया जाता है।
ऐसी स्थिति में फैक्ट-चेकिंग संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। PIB Fact Check जैसे प्लेटफॉर्म सरकारी योजनाओं, भर्ती प्रक्रियाओं, परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक मामलों से जुड़ी गलत सूचनाओं की पहचान कर लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने का काम करते हैं। अभिभावकों की भी जिम्मेदारी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। कई बार परिवार के सदस्य या परिचित बिना सत्यापन के वायरल संदेश साझा कर देते हैं। ऐसे मामलों में किसी भी सूचना को आगे भेजने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करना जरूरी है। इससे गलत जानकारी के प्रसार को रोका जा सकता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भूमिका फर्जी परीक्षा नोटिस और प्रश्नपत्रों की बढ़ती घटनाओं के बीच सोशल मीडिया कंपनियों की भूमिका पर भी चर्चा हो रही है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा संबंधी गलत सूचनाओं की पहचान और रोकथाम के लिए बेहतर मॉडरेशन व्यवस्था की आवश्यकता है।
यदि भ्रामक सामग्री को शुरुआती चरण में ही चिन्हित कर लिया जाए, तो उसके व्यापक प्रसार को रोका जा सकता है। आधिकारिक संचार को और मजबूत बनाने की जरूरत रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि सरकार और परीक्षा एजेंसियों पर आधिकारिक संचार व्यवस्था को और प्रभावी बनाने का दबाव बढ़ रहा है। यदि महत्वपूर्ण सूचनाएं विभिन्न भाषाओं और कई डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से तेजी से उपलब्ध कराई जाएं, तो फर्जी संदेशों के लिए जगह कम हो सकती है।
इस दिशा में तेज और स्पष्ट संचार छात्रों के हित में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निष्कर्ष NEET री-एग्जाम का कथित लीक प्रश्नपत्र बताकर वायरल किए गए दस्तावेज को PIB Fact Check ने पूरी तरह फर्जी करार दिया है। जांच में पाया गया कि वायरल प्रश्नपत्र और उससे जुड़ी जानकारी आधिकारिक अधिसूचनाओं से मेल नहीं खाती। NTA की ओर से ऐसा कोई प्रश्नपत्र जारी नहीं किया गया है।
छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा संबंधी किसी भी सूचना के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइटों और प्रमाणित स्रोतों पर भरोसा करें। सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट संदेशों से सावधान रहना और किसी भी जानकारी की पुष्टि करना ही ऐसे भ्रम से बचने का सबसे सुरक्षित तरीका है।
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Published by: Sadiq Tak. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
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