अमेरिका में किशोरों से जुड़े Benadryl के गलत इस्तेमाल के मामलों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी बीच फलों के स्वाद वाली ई-सिगरेट्स को लेकर सामने आए नए निष्कर्षों ने युवाओं में निकोटीन आकर्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति पर बहस को फिर तेज कर दिया है।
अमेरिका में किशोरों के बीच ओवर-द-काउंटर दवाओं के गलत इस्तेमाल को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ती जा रही है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में अब तक ज़हर नियंत्रण केंद्रों (Poison Centers) को किशोरों से जुड़े Benadryl के इस्तेमाल से संबंधित कॉल्स पिछले साल की तुलना में दोगुने से भी अधिक प्राप्त हुई हैं। यह बढ़ोतरी सिर्फ दवा के दुरुपयोग का मामला नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे सोशल मीडिया संस्कृति और ऑनलाइन ट्रेंड्स के बढ़ते प्रभाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
ABC News की रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों का कहना है कि "Benadryl Challenge" जैसे खतरनाक ऑनलाइन ट्रेंड्स ने किशोरों के बीच जोखिमपूर्ण व्यवहार को बढ़ावा दिया है। ऐसे वीडियो में अधिक मात्रा में दवा लेने जैसी गतिविधियों को मनोरंजन या साहसिक चुनौती की तरह पेश किया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि किसी भी दवा का निर्धारित मात्रा से अधिक सेवन गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है।
Benadryl एक एंटीहिस्टामिन दवा है, जिसका इस्तेमाल आम तौर पर एलर्जी के लक्षणों में राहत के लिए किया जाता है। लेकिन इसकी अधिक मात्रा शरीर पर प्रतिकूल असर डाल सकती है। इसी वजह से ज़हर नियंत्रण केंद्रों के बढ़ते आंकड़ों को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।
इसी दौरान अमेरिका में Fruity फ्लेवर वाली ई-सिगरेट्स को लेकर भी नया विवाद सामने आया है। यूएस न्यूज़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक आंतरिक मेमो में स्वास्थ्य नियामकों ने पाया कि फलों के स्वाद वाली ई-सिगरेट्स वयस्क धूम्रपान करने वालों के लिए पारंपरिक तंबाकू फ्लेवर की तुलना में स्वास्थ्य लाभ के मामले में कोई विशेष बढ़त नहीं दिखा सकीं।
इस निष्कर्ष ने लंबे समय से चल रही उस बहस को फिर चर्चा में ला दिया है कि क्या आकर्षक फ्लेवर युवाओं और किशोरों को निकोटीन उत्पादों की ओर खींचने का काम कर रहे हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य समूहों का एक वर्ग पहले भी यह तर्क देता रहा है कि मीठे और फलों के स्वाद वाले उत्पाद अपेक्षाकृत कम नुकसानदेह होने का भ्रम पैदा कर सकते हैं, खासकर उन युवाओं के बीच जिन्होंने पहले कभी तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल नहीं किया हो।
इन दोनों घटनाओं ने डिजिटल दौर की स्वास्थ्य चुनौतियों को भी सामने रखा है। अब स्वास्थ्य जोखिम सिर्फ अस्पतालों या दवाओं तक सीमित नहीं रह गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, कंटेंट ट्रेंड्स, डिजिटल मार्केटिंग और उत्पादों की प्रस्तुति भी लोगों के व्यवहार को प्रभावित कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी दवा को "फन चैलेंज" के रूप में पेश किया जाता है या किसी निकोटीन उत्पाद को आकर्षक स्वाद और पैकेजिंग के साथ प्रचारित किया जाता है, तब किशोरों के निर्णय प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों की रणनीति भी बदलने की जरूरत महसूस की जा रही है।
भारतीय संदर्भ में भी यह अनुभव महत्वपूर्ण माना जा सकता है। देश में कई ओवर-द-काउंटर दवाएं मेडिकल स्टोर्स पर आसानी से उपलब्ध हैं। दूसरी ओर, ई-सिगरेट पर कानूनी प्रतिबंध होने के बावजूद कुछ जगहों पर इनके इस्तेमाल और अवैध उपलब्धता की खबरें सामने आती रही हैं।
विशेषज्ञ अभिभावकों को सलाह देते हैं कि वे बच्चों और किशोरों के ऑनलाइन व्यवहार पर संवेदनशील निगरानी रखें और इंटरनेट पर चल रहे तथाकथित "चैलेंज" को हल्के में न लें। साथ ही, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता अभियानों को सोशल मीडिया केंद्रित बनाने की जरूरत है ताकि गलत जानकारी और भ्रामक ट्रेंड्स का प्रभावी तरीके से मुकाबला किया जा सके।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस दौर में सार्वजनिक स्वास्थ्य की चुनौतियां बदल रही हैं। ऐसे में नीति निर्माताओं, शिक्षकों, अभिभावकों और तकनीकी मंचों के बीच बेहतर समन्वय को युवाओं की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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