केरल में नेग्लेरिया फाउलेरी संक्रमण के मामलों में इस साल तेजी दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग लोगों से गंदे और खुले जलस्रोतों में नहाने से बचने तथा पानी से जुड़ी सावधानियां अपनाने की अपील कर रहा है।
केरल में नेग्लेरिया फाउलेरी (Naegleria fowleri) से जुड़े संक्रमणों में तेजी से वृद्धि ने स्वास्थ्य विभाग और विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। यह अमीबा “ब्रेन-ईटिंग अमीबा” के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह मस्तिष्क को प्रभावित कर गंभीर और कई बार घातक बीमारी पैदा कर सकता है। हाल के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस के मामलों में इस वर्ष उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
बढ़ते मामलों के आंकड़े उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार: वर्ष 2026 के पहले पाँच महीनों में लगभग 133 संक्रमण के मामले सामने आए इसी अवधि में 33 मौतें दर्ज की गईं तुलना करें तो: पूरे वर्ष 2025 में 201 मामले और 47 मौतें दर्ज हुई थीं कुछ अन्य रिपोर्टों में जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच: लगभग 96 मामले और 17 मौतें भी बताई गई हैं आंकड़ों में अंतर समय-सीमा और रिपोर्टिंग स्रोतों के कारण हो सकता है, लेकिन सभी रिपोर्टें यह संकेत देती हैं कि संक्रमण गंभीर रूप से बढ़ रहा है।
नेग्लेरिया फाउलेरी क्या है? Primary Amoebic Meningoencephalitis एक फ्री-लिविंग अमीबा है जो आमतौर पर: गर्म मीठे पानी तालाबों और झीलों खुले जलाशयों और खराब तरीके से क्लोरीन किए गए स्विमिंग पूलों में पाया जाता है यह अमीबा तब खतरनाक बनता है जब दूषित पानी नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। इसके बाद यह सीधे मस्तिष्क तक पहुंचकर गंभीर संक्रमण पैदा कर सकता है, जिसे अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस कहा जाता है।
संक्रमण कैसे फैलता है? संक्रमण का मुख्य कारण: नाक के माध्यम से दूषित पानी का प्रवेश यह आमतौर पर तब होता है जब लोग: तालाब या झील में तैरते हैं खुले और असुरक्षित जल स्रोतों का उपयोग करते हैं या बिना साफ पानी के नाक में पानी जाने देते हैं यह संक्रमण व्यक्ति से व्यक्ति में नहीं फैलता।
केरल में बढ़ते खतरे के कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, केरल में कुछ पर्यावरणीय और सामाजिक कारण इस संक्रमण के बढ़ने में भूमिका निभा सकते हैं: उष्णकटिबंधीय जलवायु और उच्च नमी गर्म तापमान, जो अमीबा के विकास के लिए अनुकूल है कई क्षेत्रों में स्वच्छ पानी की कमी खुले जलाशयों और तालाबों का उपयोग कुछ स्थानों पर पर्याप्त क्लोरीनेशन की कमी इन सभी कारणों से संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है, खासकर गर्मी के मौसम में।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई राज्य स्वास्थ्य विभाग ने मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए: निगरानी प्रणाली को मजबूत किया है जल स्रोतों की जांच बढ़ाई है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है साथ ही, संदिग्ध लक्षणों वाले मरीजों की जल्दी पहचान और इलाज पर भी जोर दिया जा रहा है।
बीमारी कितनी खतरनाक है? यह संक्रमण दुर्लभ लेकिन अत्यंत गंभीर होता है। इसके लक्षण शुरुआती दिनों में सामान्य बुखार जैसे हो सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह: तेज सिरदर्द उल्टी गर्दन में अकड़न और मानसिक भ्रम जैसे गंभीर लक्षण पैदा कर सकता है। कई मामलों में यह घातक साबित हो सकता है, इसलिए समय पर इलाज बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष केरल में नेग्लेरिया फाउलेरी संक्रमण के बढ़ते मामले एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चेतावनी हैं। हालांकि यह बीमारी दुर्लभ है, लेकिन इसका प्रभाव बहुत खतरनाक हो सकता है। ऐसे में साफ पानी का उपयोग, सुरक्षित स्विमिंग प्रैक्टिस और जल स्रोतों की सही देखभाल इस संक्रमण से बचाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं।
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