Google रिसर्च ने रिटायर्ड Android स्मार्टफोनों को जोड़कर कम ऊर्जा खपत वाला डिस्ट्रिब्यूटेड कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म प्रदर्शित किया है। दूसरी ओर, Pyodide 3.14 अपडेट के बाद Python पैकेज अब WebAssembly के जरिए सीधे ब्राउज़र में चलाए जा सकेंगे।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग के विस्तार के साथ डेटा सेंटरों की ऊर्जा खपत और इलेक्ट्रॉनिक कचरे को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। इसी बीच Google रिसर्च ने एक ऐसा प्रोटोटाइप पेश किया है, जो पुराने और उपयोग से बाहर हो चुके Android स्मार्टफोनों को नए काम में लाने की दिशा दिखाता है। कंपनी की रिसर्च टीम ने रिटायर्ड स्मार्टफोनों को जोड़कर एक डिस्ट्रिब्यूटेड कंप्यूट प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जिसका उद्देश्य कम ऊर्जा में कंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध कराना और ई-वेस्ट को कम करना है।
इस प्रयोग में पुराने Android फोन अलग-अलग कंप्यूट नोड्स की तरह काम करते हैं। सामान्य तौर पर उपयोग से बाहर होने के बाद ऐसे उपकरण या तो स्टोरेज में पड़े रहते हैं या फिर इलेक्ट्रॉनिक कचरे का हिस्सा बन जाते हैं। Google का यह मॉडल इन डिवाइसों को दोबारा उपयोग में लाने का प्रयास है, ताकि उनकी बची हुई कंप्यूटिंग क्षमता का इस्तेमाल शोध और तकनीकी कार्यों में किया जा सके।
रिसर्च से जुड़े शुरुआती विवरणों के अनुसार, इन स्मार्टफोनों में मौजूद कम ऊर्जा खपत वाले प्रोसेसर और पावर मैनेजमेंट सिस्टम का उपयोग करके हल्के AI वर्कलोड और अन्य कंप्यूटिंग कार्यों को संभाला जा सकता है। पारंपरिक डेटा सेंटरों में इस्तेमाल होने वाले हाई-परफॉर्मेंस सर्वरों और GPU सिस्टम की तुलना में ऐसे क्लस्टर कम बिजली खर्च कर सकते हैं।
तकनीकी विशेषज्ञों के लिए इस मॉडल का एक महत्वपूर्ण पहलू “एज कंप्यूटिंग” है। इसका अर्थ है कि कुछ प्रोसेसिंग कार्य उपयोगकर्ता या स्थानीय नेटवर्क के करीब ही किए जाएं, बजाय इसके कि हर काम बड़े केंद्रीकृत डेटा सेंटर पर निर्भर हो। यदि इस तरह के प्लेटफॉर्म को बड़े स्तर पर विकसित किया जाता है, तो विश्वविद्यालय, शोध संस्थान और डेवलपर समुदाय पुराने स्मार्टफोनों का उपयोग कम लागत वाले कंप्यूटिंग क्लस्टर बनाने में कर सकते हैं।
हालांकि यह परियोजना अभी शोध और परीक्षण के चरण में है। इसकी वास्तविक उपयोगिता को लेकर कई सवाल अभी खुले हैं। उदाहरण के लिए, बड़ी संख्या में डिवाइसों का प्रबंधन, डेटा सुरक्षा, प्रदर्शन की स्थिरता और लंबे समय तक संचालन जैसी चुनौतियों पर अधिक अध्ययन की आवश्यकता होगी। फिलहाल इसे एक संभावित तकनीकी दिशा के रूप में देखा जा रहा है, न कि व्यावसायिक स्तर पर उपलब्ध समाधान के रूप में।
इसी दौरान डेवलपर समुदाय के लिए एक और महत्वपूर्ण अपडेट Pyodide 3.14 के रूप में सामने आया है। इस रिलीज के बाद Python पैकेजों को WebAssembly आधारित व्हील्स के जरिए सीधे ब्राउज़र में चलाना पहले की तुलना में अधिक आसान हो जाएगा। इसका मतलब है कि कई Python एप्लिकेशन और लाइब्रेरी बिना अलग सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर के उपयोगकर्ता के ब्राउज़र में ही चल सकेंगी।
इस बदलाव का असर खास तौर पर डेटा साइंस, ऑनलाइन शिक्षा और इंटरैक्टिव वेब एप्लिकेशन डेवलपमेंट पर देखा जाएगा। अब डेवलपर्स और छात्रों के लिए ब्राउज़र के भीतर ही Python कोड चलाना पहले की तुलना में आसान हो सकता है। इससे इंटरैक्टिव नोटबुक्स, डेमो प्रोजेक्ट्स और छोटे स्तर के डेटा एनालिसिस टूल बिना भारी सर्वर सेटअप के सीधे वेब पेज पर उपलब्ध कराए जा सकेंगे।
Pyodide 3.14 जैसे अपडेट का असर यह भी होगा कि क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता कुछ मामलों में कम हो सकती है। खासकर शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में यह बदलाव उपयोगी माना जा रहा है, जहां उपयोगकर्ता बिना किसी जटिल सेटअप के ब्राउज़र में ही प्रोग्रामिंग और डेटा प्रोसेसिंग का अभ्यास कर सकेंगे। इसके साथ ही वेब-आधारित एप्लिकेशन अधिक हल्के और तेज़ बनाए जा सकेंगे, जिससे उपयोगकर्ता अनुभव में भी सुधार की संभावना है।
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