जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में 14 जून से 12 अगस्त 2026 तक धारा 163 बीएनएसएस के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। इस अवधि में बिना पूर्व लिखित अनुमति रैली, जुलूस, धरना-प्रदर्शन और सार्वजनिक सभा आयोजित करने पर प्रतिबंध रहेगा।
जोधपुर शहर में अगले करीब दो महीनों तक सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शनों और सामूहिक आयोजनों को लेकर सख्त नियम लागू रहेंगे। जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू करते हुए 14 जून से 12 अगस्त 2026 तक पूरे कमिश्नरेट क्षेत्र में बिना पूर्व अनुमति रैली, जुलूस, धरना-प्रदर्शन और सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगा दी है।
पुलिस आयुक्तालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार किसी भी संगठन, समूह या व्यक्ति को सार्वजनिक स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने से पहले संबंधित अधिकारियों से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। आदेश का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना, यातायात प्रबंधन को सुचारु रखना और भीड़ नियंत्रण से जुड़ी चुनौतियों को कम करना बताया गया है।
प्रशासन का कहना है कि पिछले कुछ समय में शहर के विभिन्न हिस्सों में नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर अचानक विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले थे। ऐसे आयोजनों के दौरान कई बार यातायात प्रभावित होने और सुरक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की स्थिति बनी। इसी पृष्ठभूमि में यह निर्णय लिया गया है ताकि किसी भी संभावित अव्यवस्था को पहले ही रोका जा सके।
आदेश का असर राजनीतिक दलों, कर्मचारी संगठनों, छात्र समूहों, किसान संगठनों और विभिन्न सामाजिक संगठनों पर भी पड़ेगा, जो समय-समय पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते रहे हैं। अब किसी भी प्रकार का सार्वजनिक विरोध कार्यक्रम आयोजित करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। बिना अनुमति किए गए आयोजन नियमों का उल्लंघन माने जाएंगे।
जोधपुर में हाल के महीनों में बिजली आपूर्ति, पानी की उपलब्धता और अन्य स्थानीय मुद्दों को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में विरोध की घटनाएं सामने आई थीं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे किसी भी कार्यक्रम के लिए पहले प्रशासनिक स्वीकृति जरूरी होगी। इससे अचानक होने वाले जमावड़े और सड़क अवरोध जैसी स्थितियों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आदेश केवल सार्वजनिक स्थलों पर होने वाली गतिविधियों से संबंधित है। अनुमति प्राप्त कार्यक्रमों के लिए निर्धारित शर्तों और सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा। साथ ही आयोजकों को कार्यक्रम की प्रकृति, प्रतिभागियों की संख्या और स्थान संबंधी जानकारी पहले से उपलब्ध करानी पड़ सकती है।
निषेधाज्ञा लागू होने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस फैसले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए आवश्यक कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ वर्गों ने सार्वजनिक विरोध की प्रक्रिया पर इसके प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से जारी आदेश में मुख्य जोर सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने पर दिया गया है।
धारा 163 बीएनएसएस के तहत जारी ऐसे आदेश प्रशासन को विशेष परिस्थितियों में निवारक कदम उठाने का अधिकार देते हैं। यदि किसी क्षेत्र में शांति व्यवस्था प्रभावित होने या सार्वजनिक असुविधा बढ़ने की आशंका हो तो सीमित अवधि के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए जा सकते हैं।
फिलहाल यह आदेश 12 अगस्त 2026 तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में किसी भी सामूहिक कार्यक्रम, रैली, जुलूस या धरना-प्रदर्शन की योजना बनाने वाले व्यक्तियों और संगठनों को पहले सक्षम प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त करनी होगी। पुलिस ने लोगों से आदेश का पालन करने और किसी भी प्रकार की गतिविधि से पहले आवश्यक अनुमति संबंधी जानकारी लेने की अपील की है।
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