वैज्ञानिकों ने गहराई में रहने वाली दुर्लभ गॉब्लिन शार्क को पहली बार उसके प्राकृतिक आवास में जीवित अवस्था में रिकॉर्ड किया है। इस खोज से शार्क की भौगोलिक मौजूदगी और गहरे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को लेकर नई जानकारी सामने आई है।
समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। शोधकर्ताओं ने पहली बार दुर्लभ गॉब्लिन शार्क (वैज्ञानिक नाम Mitsukurina owstoni) को उसके प्राकृतिक गहरे समुद्री आवास में जीवित अवस्था में स्पष्ट वीडियो फुटेज के साथ रिकॉर्ड किया है। अब तक इस प्रजाति के बारे में अधिकांश जानकारी मछली पकड़ने या मृत नमूनों के अध्ययन पर आधारित थी।
गॉब्लिन शार्क को समुद्र की सबसे रहस्यमयी और असामान्य प्रजातियों में से एक माना जाता है। इसकी लंबी, चोंच जैसी नाक और आगे की ओर तेजी से बाहर निकलने वाले जबड़े इसे अन्य शार्क से अलग बनाते हैं। यह प्रजाति आमतौर पर समुद्र की अत्यंत गहरी परतों में पाई जाती है, जहां मानव पहुंच बहुत सीमित है।
हाल ही में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन में बताया गया कि शोधकर्ताओं ने मध्य प्रशांत महासागर के दो अलग-अलग स्थानों पर इस शार्क की लाइव रिकॉर्डिंग हासिल की। पहली रिकॉर्डिंग जार्विस द्वीप के पास स्थित एक समुद्री पर्वत (सी-माउंट) क्षेत्र में हुई, जबकि दूसरी फुटेज टोंगा ट्रेंच की ढलान पर लगाए गए विशेष बैट-कैमरा सिस्टम से प्राप्त की गई।
इन रिकॉर्डिंग्स के दौरान गॉब्लिन शार्क को गहरे समुद्र में भोजन की तलाश करते हुए देखा गया। वैज्ञानिकों के अनुसार यह पहली बार है जब इस प्रजाति के प्राकृतिक व्यवहार को इतने स्पष्ट रूप में दस्तावेज़ित किया गया है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज केवल एक दुर्लभ दृश्य रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि इससे गहरे समुद्र की पारिस्थितिकी और इस प्रजाति की जीवनशैली को समझने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी। अब तक इसके व्यवहार, प्रजनन और प्रवास पैटर्न को लेकर बहुत सीमित जानकारी उपलब्ध थी।
अध्ययन में यह भी संकेत दिया गया है कि गॉब्लिन शार्क की भौगोलिक मौजूदगी पहले के अनुमान से कहीं अधिक व्यापक हो सकती है। शोधकर्ताओं द्वारा विश्लेषित आंकड़ों से यह संभावना जताई गई है कि यह प्रजाति केवल सीमित क्षेत्रों तक ही नहीं, बल्कि विभिन्न गहरे समुद्री इलाकों में फैली हो सकती है।
इस नई खोज ने समुद्र विज्ञान में गहरे समुद्र के जीवों को लेकर शोध की दिशा को और मजबूत किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी तकनीकों के जरिए आने वाले समय में अन्य दुर्लभ समुद्री प्रजातियों के बारे में भी नई जानकारियां सामने आ सकती हैं।
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