बांग्लादेश में 17.5 करोड़ की आबादी के बीच आम चुनाव हो रहे हैं, जिन्हें राजनीतिक स्थिरता के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। शेख हसीना के खिलाफ प्रदर्शनों और महीनों की अशांति के बाद यह पहला चुनाव है। 299 सीटों पर मतदान हो रहा है, जबकि एक सीट पर वोटिंग टली है। मुख्य मुकाबला BNP और जमात-ए-इस्लामी गठबंधन के बीच है, जबकि अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा है। साथ ही 84 संवैधानिक सुधारों पर जनमत संग्रह भी हो रहा है। भारी सुरक्षा के बीच लोग उत्साह से वोट डाल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि निष्पक्ष और स्वीकार्य नतीजे ही देश को स्थिर लोकतांत्रिक दिशा देंगे।
विश्लेषकों का कहना है कि 17.5 करोड़ की आबादी वाले देश में स्थिर सरकार के लिए साफ और निर्णायक नतीजा बेहद जरूरी है। शेख हसीना के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद महीनों तक अशांति रही और कपड़ा उद्योग सहित कई अहम सेक्टर प्रभावित हुए, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेडीमेड गारमेंट निर्यातक है।
गुरुवार को पूरे देश में मतदान शुरू होते ही लोग पोलिंग स्टेशनों के बाहर लंबी कतारों में नजर आए। इसे एक ऐतिहासिक आम चुनाव माना जा रहा है — पिछले साल Gen Z के नेतृत्व में हुए आंदोलन में लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहीं शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद यह पहला चुनाव है।
299 संसदीय क्षेत्रों में सुबह 7:30 बजे मतदान शुरू हुआ और शाम 4:30 बजे तक चलेगा। एक सीट पर उम्मीदवार की मौत के कारण वोटिंग टाल दी गई है। मतदान खत्म होने के तुरंत बाद गिनती शुरू होगी और शुक्रवार तक नतीजे साफ होने की उम्मीद है।
2024 में शेख हसीना विरोधी प्रदर्शनों के बाद देश में कई महीनों तक अस्थिरता रही। इन प्रदर्शनों ने गारमेंट जैसे अहम उद्योगों को बुरी तरह प्रभावित किया। अब यह चुनाव बांग्लादेश की चुनावी राजनीति में वापसी का संकेत माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि करीब 17.5 करोड़ लोगों के देश में राजनीतिक स्थिरता के लिए मजबूत जनादेश जरूरी है। इसे दुनिया का पहला ऐसा राष्ट्रीय चुनाव भी बताया जा रहा है, जो मुख्य रूप से 30 साल से कम उम्र के युवाओं यानी Gen Z के नेतृत्व में हुई क्रांति के बाद हो रहा है।
ढाका में तो पोलिंग बूथ खुलने से पहले ही लोग लाइन में लग गए थे। 39 साल के मोहम्मद जोबैर हुसैन ने कहा कि 2008 के बाद यह उनका पहला वोट है। “मैं बहुत उत्साहित हूं क्योंकि 17 साल बाद हम आजाद माहौल में वोट दे रहे हैं,” हुसैन ने कहा।
“अब हमारे वोट की अहमियत होगी।”
मुख्य मुकाबला दो गठबंधनों के बीच है — बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और इस्लामिक जमात-ए-इस्लामी। ओपिनियन पोल में BNP को बढ़त मिलती दिख रही है। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को भंग कर दिया गया है और उसे चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है।
हसीना इस समय भारत में स्वयं-निर्वासन में हैं। 50 राजनीतिक दलों के 1,700 से ज्यादा उम्मीदवार और 273 निर्दलीय उम्मीदवार 300 सीटों के लिए मैदान में हैं — जो एक राष्ट्रीय रिकॉर्ड है। सबसे ज्यादा उम्मीदवार BNP ने उतारे हैं। कुल मतदाताओं में लगभग आधी हिस्सेदारी महिलाओं की है, लेकिन केवल 83 महिलाएं चुनाव लड़ रही हैं।
मतदान के साथ-साथ 84 बिंदुओं वाले संवैधानिक सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह भी हो रहा है। प्रस्तावित बदलावों में चुनाव के दौरान निष्पक्ष अंतरिम सरकार, संसद को दो सदनों में बांटना, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना, न्यायपालिका को मजबूत करना और प्रधानमंत्री के लिए दो कार्यकाल की सीमा तय करना शामिल है।
“यह चुनाव सिर्फ एक सामान्य वोटिंग नहीं है। लंबे समय से जमा गुस्से, असमानता, वंचना और अन्याय के खिलाफ जो जनजागरण हमने देखा, उसे अब संविधान के जरिए दिशा दी जा रही है।”
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 9 लाख से 10 लाख सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। आर्मर्ड व्हीकल, रैपिड एक्शन टीम, ड्रोन और बॉडी कैमरा का इस्तेमाल हो रहा है। ढाका में 1,600 से ज्यादा पोलिंग सेंटरों को संवेदनशील घोषित किया गया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नसीर उद्दीन ने मतदान से एक दिन पहले टीवी संदेश में लोगों से अपील की कि वे बिना डर के वोट डालें और शांति बनाए रखें। 45 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के पर्यवेक्षक चुनाव पर नजर रख रहे हैं।
हालांकि चुनाव प्रचार ज्यादातर शांतिपूर्ण रहा, फिर भी कुछ मतदाता असमंजस में हैं। रिक्शा चालक चान मिया ने कहा कि वे अपने गांव जाकर वोट डालने का खर्च नहीं उठा सकते। वहीं कुछ लोग हसीना की पार्टी की गैरमौजूदगी से निराश भी हैं।
फिर भी कई लोग मतदान के लिए दृढ़ हैं। “हसीना के समय हम वोट नहीं डाल पाते थे,” ड्राइवर शाकिल अहमद ने कहा। “वोट देना मेरा अधिकार है। भ्रष्टाचार और महंगाई इस बार मतदाताओं के बड़े मुद्दे बनकर उभरे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता और नतीजों को सभी पक्षों द्वारा स्वीकार करना बेहद अहम होगा।
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के थॉमस कीन ने कहा, “अब बांग्लादेश के लिए असली परीक्षा यह होगी कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हों और सभी दल नतीजों को स्वीकार करें। अगर ऐसा होता है, तो यह साफ संकेत होगा कि देश लोकतांत्रिक नई शुरुआत की ओर बढ़ चुका है।”
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