राजस्थान में भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर निर्माणों की जांच शुरू की गई है। सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे में मौजूद संरचनाओं का सर्वे किया जा रहा है, जबकि 41 गांवों के लिए विशेष सिक्योरिटी मैप भी तैयार किया जा रहा है।
राजस्थान में भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के बाद प्रशासन ने बड़े स्तर पर सर्वे अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी प्रमुख निर्माणों और गतिविधियों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का उद्देश्य सीमा क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी जोखिमों की पहचान करना और नियमों के अनुरूप विकास सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में सीमा क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई थी। इसके बाद संबंधित विभागों को सीमा से सटे इलाकों में मौजूद भवनों, गोदामों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, धार्मिक स्थलों और अन्य स्थायी संरचनाओं का सर्वे करने के निर्देश दिए गए। सर्वे के दौरान निर्माण की वैधता, भूमि संबंधी दस्तावेजों और अन्य आवश्यक अनुमतियों की भी जांच की जा रही है।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, केवल निर्माण की स्थिति ही नहीं बल्कि कुछ मामलों में फंडिंग के स्रोत और सुरक्षा पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का भी आकलन किया जाएगा। सीमा क्षेत्र में लंबे समय से मौजूद और हाल के वर्षों में बने ढांचों का रिकॉर्ड तैयार कर उनकी स्थिति का मिलान सरकारी दस्तावेजों से किया जा रहा है।
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इस पूरी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जैसलमेर क्षेत्र के 41 गांवों के लिए तैयार किया जा रहा सिक्योरिटी मैप है। इस मैप के माध्यम से यह दर्ज किया जाएगा कि सीमा के आसपास कौन-कौन सी संरचनाएं मौजूद हैं, वे किस दूरी पर स्थित हैं और उनका उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह का विस्तृत डाटा भविष्य में सुरक्षा एजेंसियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
सर्वे टीमों को यह भी देखने के निर्देश दिए गए हैं कि कहीं किसी निर्माण या गतिविधि का उपयोग अवैध उद्देश्यों के लिए तो नहीं किया जा रहा। सीमा क्षेत्रों में तस्करी, ड्रोन गतिविधियों और अन्य गैरकानूनी नेटवर्क से जुड़े मामलों को देखते हुए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियां केवल सीमा बाड़ तक सीमित रहने के बजाय आसपास के गांवों और आबादी वाले क्षेत्रों की गतिविधियों का भी अध्ययन कर रही हैं।
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अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि सर्वे के दौरान नियमों के विरुद्ध निर्माण, अतिक्रमण या अन्य संदिग्ध मामले सामने आते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। ऐसी कार्रवाई के लिए आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं पर भी काम किया जा रहा है। रिपोर्टों में कहा गया है कि कुछ मामलों में दीवाली से पहले कदम उठाए जाने की तैयारी की जा रही है।
इस अभियान का असर सीमा क्षेत्र में जमीन और संपत्ति से जुड़े मामलों पर भी पड़ सकता है। नए निर्माण, व्यावसायिक गतिविधियों और भूमि हस्तांतरण से जुड़े मामलों में दस्तावेजी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सख्त हो सकती है। इससे वैध निर्माणों का रिकॉर्ड व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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प्रशासन का कहना है कि अभियान का मुख्य उद्देश्य सीमा सुरक्षा को मजबूत करना, अवैध गतिविधियों पर नजर रखना और संवेदनशील क्षेत्रों का अद्यतन सुरक्षा प्रोफाइल तैयार करना है। सर्वे और सिक्योरिटी मैपिंग का काम जारी है तथा संबंधित विभागों को समयबद्ध तरीके से रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
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