जोधपुर संभाग में एक विशेष युवा पहल के तहत 15 वर्षीय छात्र गर्वित को एक दिन के लिए जिला कलेक्टर बनाया गया। इस दौरान उसने अधिकारियों के साथ बैठकें कीं, प्रशासनिक कार्यप्रणाली को समझा और स्कूलों की जर्जर इमारतों तथा ग्रामीण इलाकों में पेयजल जैसी समस्याओं पर सवाल उठाए। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को शासन-प्रशासन की कार्यशैली से परिचित कराना, नेतृत्व क्षमता विकसित करना और सार्वजनिक सेवा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह पहल प्रशासन और नई पीढ़ी के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक अनोखा प्रयास मानी जा रही है।
जोधपुर संभाग में एक विशेष युवा पहल के तहत 15 वर्षीय छात्र गर्वित को एक दिन के लिए जिला कलेक्टर की भूमिका निभाने का अवसर दिया गया। इस दौरान उसने प्रशासनिक कामकाज को करीब से समझा, अधिकारियों के साथ बैठकें कीं और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए। इस पहल को बच्चों में नेतृत्व क्षमता, जवाबदेही और शासन व्यवस्था की समझ विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जोधपुर संभाग से सामने आई एक अनोखी पहल इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां 15 वर्षीय छात्र गर्वित को एक दिन के लिए जिला कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस विशेष कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को प्रशासनिक व्यवस्था से परिचित कराना तथा शासन की कार्यप्रणाली को उनके सामने व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करना था।
एक दिन के लिए कलेक्टर बने गर्वित ने जिला प्रशासन के विभिन्न कामकाज को नजदीक से देखा। उसे अधिकारियों द्वारा जिले से जुड़े प्रमुख विषयों की जानकारी दी गई और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समझाया गया। दिनभर चली गतिविधियों के दौरान उसने कई विभागों के कार्यों के बारे में जाना और विभिन्न बैठकों में भी भाग लिया।
कार्यक्रम के तहत गर्वित ने प्रतीकात्मक रूप से वही भूमिका निभाई जो सामान्य परिस्थितियों में जिला कलेक्टर निभाते हैं। उसने अधिकारियों से चर्चा की, फाइलों का अवलोकन किया और आम नागरिकों से जुड़ी शिकायतों एवं समस्याओं को समझने की कोशिश की। प्रशासनिक अधिकारियों ने उसे यह भी बताया कि किसी जिले का संचालन किन-किन स्तरों पर समन्वय और निर्णय प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है।
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13 जून 2026
इस पहल की खास बात यह रही कि गर्वित ने केवल औपचारिक भूमिका तक खुद को सीमित नहीं रखा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उसने स्कूलों की जर्जर इमारतों और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की स्थिति जैसे मुद्दों पर सवाल पूछे। ये ऐसे विषय हैं जो सीधे आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं और जिन पर जिला प्रशासन लगातार काम करता है।
जिला प्रशासन की टीम ने उसे विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी। शिक्षा, पेयजल व्यवस्था और मानसून से पहले की तैयारियों जैसे विषयों पर उसे विस्तार से अवगत कराया गया। इससे उसे यह समझने का अवसर मिला कि प्रशासनिक निर्णय केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनका असर सीधे लोगों के जीवन पर पड़ता है।
राजस्थान में युवाओं को शासन व्यवस्था से जोड़ने के लिए पिछले कुछ वर्षों में अलग-अलग स्तरों पर कई प्रयास किए गए हैं। छात्रों को सरकारी संस्थाओं के कामकाज से परिचित कराने, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को समझाने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने से जुड़े कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित होते रहे हैं। लेकिन किसी किशोर छात्र को एक दिन के लिए कलेक्टर की भूमिका देना अपेक्षाकृत नया प्रयोग माना जा रहा है।
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देश के कुछ अन्य राज्यों में भी पहले ऐसी पहलें देखने को मिली हैं, जहां छात्रों को प्रशासनिक या सार्वजनिक सेवा से जुड़े पदों की जिम्मेदारियों को समझने का अवसर दिया गया था। उन कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं में नेतृत्व कौशल, निर्णय लेने की क्षमता और सार्वजनिक सेवा के प्रति रुचि विकसित करना था। जोधपुर में आयोजित यह कार्यक्रम भी उसी सोच का विस्तार माना जा रहा है।
इस पहल का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि हाल के वर्षों में शासन व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और युवाओं की भागीदारी जैसे विषय लगातार चर्चा में रहे हैं। ऐसे माहौल में प्रशासन को नजदीक से देखने का अवसर युवाओं को व्यवस्था की वास्तविक चुनौतियों और जिम्मेदारियों को समझने में मदद कर सकता है।
कार्यक्रम से जुड़े लोगों का मानना है कि बच्चों को केवल किताबों के माध्यम से नहीं, बल्कि व्यावहारिक अनुभवों के जरिए भी शासन और प्रशासन की जानकारी मिलनी चाहिए। जब छात्र प्रशासनिक प्रक्रियाओं को प्रत्यक्ष रूप से देखते हैं तो उनमें जिम्मेदारी की भावना और सार्वजनिक मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ती है।
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एक सामान्य परिवार से आने वाले बच्चे के लिए जिला कलेक्टर जैसी जिम्मेदारी का अनुभव प्राप्त करना अपने आप में विशेष अवसर माना जाता है। इससे यह संदेश भी जाता है कि प्रशासनिक संस्थाएं समाज के हर वर्ग के लिए खुली हैं और युवा पीढ़ी की जिज्ञासाओं व सवालों को महत्व दिया जा रहा है।
शिक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से अनुभव आधारित सीखने पर जोर देते रहे हैं। इस तरह के कार्यक्रम बच्चों को केवल करियर विकल्पों के बारे में जानकारी नहीं देते, बल्कि उन्हें यह भी समझाते हैं कि प्रशासनिक निर्णय कैसे लिए जाते हैं, योजनाएं कैसे लागू होती हैं और सरकारी व्यवस्था आम लोगों तक कैसे पहुंचती है। जोधपुर में आयोजित यह पहल केवल एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम भर नहीं रही, बल्कि प्रशासन और समाज के बीच संवाद का एक अलग माध्यम भी बनकर सामने आई। एक दिन के लिए कलेक्टर बने गर्वित ने जिस तरह स्थानीय मुद्दों पर सवाल उठाए, उसने यह भी दिखाया कि नई पीढ़ी अपने आसपास की समस्याओं को समझने और उन पर चर्चा करने में गंभीर रुचि रखती है।
इस कार्यक्रम ने यह संकेत दिया कि यदि बच्चों और किशोरों को सही मंच और अवसर दिए जाएं तो वे समाज, प्रशासन और सार्वजनिक जीवन से जुड़े विषयों पर परिपक्व सोच विकसित कर सकते हैं। जोधपुर की यह पहल इसी दिशा में एक उल्लेखनीय प्रयास के रूप में देखी जा रही है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था को बच्चों के लिए अधिक सुलभ और समझने योग्य बनाने का प्रयास किया।
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13 जून 2026