विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध और वैश्विक तनाव के कारण 2026 में दुनिया की आर्थिक वृद्धि घटकर लगभग 2.5% रह सकती है। ऊर्जा और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से शिपिंग, खाद्य और अन्य लागतें बढ़ रही हैं। इससे करोड़ों लोग खाद्य असुरक्षा का सामना कर सकते हैं। भारत समेत कई विकासशील देशों पर महंगाई और निर्यात में गिरावट का दबाव बढ़ने की आशंका है।
विश्व बैंक ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के कारण 2026 में दुनिया की आर्थिक वृद्धि घटकर केवल 2.5% रह सकती है। यह कोविड-19 महामारी के बाद की सबसे कमजोर विकास दरों में से एक मानी जा रही है।
वैश्विक विकास पर असर विश्व बैंक के अनुसार: ऊर्जा कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी शिपिंग और लॉजिस्टिक्स लागत में उछाल निवेशकों की बढ़ती अनिश्चितता ने वैश्विक विकास की गति को धीमा कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान युद्ध 2022 के बाद सबसे बड़ा ऊर्जा संकट पैदा कर सकता है।
ऊर्जा कीमतों में भारी उछाल विश्व बैंक के ऊर्जा इंडेक्स के मुताबिक: 2026 में ऊर्जा कीमतों में लगभग 24% वृद्धि की आशंका यह पहले के अनुमान से लगभग 40% अधिक है अगर तेल की कीमत लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहती है, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा।
खाद्य सुरक्षा पर खतरा रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि: लगभग 4.5 करोड़ अतिरिक्त लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा की स्थिति में जा सकते हैं महंगी ऊर्जा और ट्रांसपोर्ट लागत का सीधा असर खाद्य कीमतों पर पड़ेगा गरीब देशों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव होगा
OECD का भी नकारात्मक अनुमान OECD (Organisation for Economic Co-operation and Development) ने भी अपने वैश्विक अनुमान को संशोधित किया है: वैश्विक विकास दर 2.8% से घटकर 2.1% तक जा सकती है इसका मुख्य कारण ऊर्जा संकट, निवेश में गिरावट और व्यापारिक अनिश्चितता बताया गया है
आम लोगों पर असर इस वैश्विक आर्थिक मंदी का सीधा असर आम जीवन पर पड़ेगा: ईंधन और परिवहन महंगे होंगे खाद्य और निर्माण सामग्री की कीमतें बढ़ेंगी रोजगार और वेतन वृद्धि की गति धीमी होगी
विकासशील देशों पर दबाव गरीब और विकासशील देशों के लिए स्थिति और कठिन हो सकती है क्योंकि: आयात महंगा हो जाएगा कर्ज की लागत बढ़ सकती है आर्थिक स्थिरता पर दबाव बढ़ेगा
🇮🇳 भारत पर असर भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए यह स्थिति दोहरी चुनौती है: महंगे तेल और खाद्य पदार्थों से घरेलू महंगाई बढ़ सकती है वहीं वैश्विक मांग में गिरावट से निर्यात सेक्टर (IT, टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स) प्रभावित हो सकता है
नीति निर्माताओं के लिए चुनौती नीति निर्माताओं के सामने चुनौती है कि: महंगाई को नियंत्रित रखें साथ ही विकास दर को गिरने से बचाएं यह संतुलन बनाए रखना आने वाले महीनों में कठिन हो सकता है।
निष्कर्ष विश्व बैंक की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि 2026 में वैश्विक अर्थव्यवस्था धीमी गति से बढ़ सकती है, जिसका मुख्य कारण भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट है। ईरान युद्ध के प्रभाव से न केवल तेल और ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं, बल्कि इसका असर खाद्य सुरक्षा, रोजगार और वैश्विक व्यापार पर भी पड़ रहा है।
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