सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो मोटरसाइकिलों के गोल-गोल घूमने वाले वीडियो को जयपुर का हादसा बताकर शेयर किया जा रहा था। हालांकि पीटीआई फैक्ट-चेक की जांच में यह दावा गलत निकला। जांच से पता चला कि यह वीडियो भारत का नहीं, बल्कि इंडोनेशिया के पेकनबारू शहर का है, जहां दो बाइकों की टक्कर के बाद यह घटना हुई थी। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों और पुलिस की पुष्टि से भी इसकी पुष्टि हुई। फैक्ट-चेक में निष्कर्ष निकला कि वीडियो का जयपुर या भारत से कोई संबंध नहीं है और इसे गलत जानकारी के साथ वायरल किया गया।
सोशल मीडिया पर हर दिन हजारों वीडियो वायरल होते हैं। इनमें कुछ वीडियो लोगों को हैरान कर देते हैं, तो कुछ को देखकर लोग तुरंत उन्हें अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करने लगते हैं। लेकिन कई बार वायरल वीडियो के साथ दी गई जानकारी पूरी तरह सही नहीं होती। हाल ही में ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलता दिखा, जिसमें दो मोटरसाइकिलें टकराने के बाद सड़क पर गोल-गोल घूमती नजर आती हैं।
वीडियो देखने वाले कई लोग इसे राजस्थान के जयपुर का हादसा बताकर शेयर कर रहे थे। कुछ पोस्ट में दावा किया गया कि यह भारत का एक अनोखा सड़क हादसा है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे "जयपुर का अजीब एक्सीडेंट" बताते हुए आगे बढ़ाया। कुछ लोगों ने इसे भारतीय ट्रैफिक व्यवस्था से जोड़कर भी टिप्पणी की।
वीडियो में दिखाई देता है कि दो बाइक आपस में टकराने के बाद किसी तरह फंस जाती हैं। इसके बाद दोनों बाइकें सड़क पर तेजी से गोल-गोल घूमने लगती हैं। आसपास मौजूद लोग यह दृश्य देखकर हैरान रह जाते हैं। यही वजह थी कि यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया।
वीडियो देखने के बाद बहुत से लोगों ने मान लिया कि यह घटना सच में जयपुर में हुई है। लेकिन जब इसकी जांच की गई तो मामला कुछ और निकला।
फैक्ट-चेक के दौरान पता चला कि वीडियो के साथ किया जा रहा दावा सही नहीं है। जांच में सामने आया कि इस घटना का जयपुर या भारत से कोई संबंध नहीं है।
पीटीआई फैक्ट-चेक डेस्क ने वीडियो की जांच की। जांच के दौरान वीडियो के अलग-अलग फ्रेम निकाले गए और इंटरनेट पर खोज की गई। इसके अलावा वीडियो से जुड़े शब्दों और अन्य जानकारियों की भी पड़ताल की गई। जांच में पता चला कि यह वीडियो वास्तव में इंडोनेशिया का है।
रिपोर्ट के अनुसार यह घटना इंडोनेशिया के पेकनबारू शहर में हुई थी। वहां Jalan Arifin Ahmad नाम की सड़क पर दो मोटरसाइकिलों की टक्कर के बाद यह असामान्य दृश्य देखने को मिला था।
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स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में भी इस घटना का जिक्र किया गया था। साथ ही वहां की पुलिस ने भी पुष्टि की थी कि हादसा इंडोनेशिया में हुआ था।
इस तरह साफ हो गया कि वीडियो को गलत जानकारी के साथ भारत का बताकर वायरल किया जा रहा था। सोशल मीडिया पर इस तरह की घटनाएं नई नहीं हैं।
अक्सर किसी एक देश या शहर का वीडियो दूसरे देश का बताकर साझा कर दिया जाता है। कई बार वीडियो पुराना होता है लेकिन उसे नई घटना बताकर फैलाया जाता है। कुछ मामलों में तस्वीरों और वीडियो के साथ गलत जगह, गलत तारीख या गलत कहानी जोड़ दी जाती है।
ऐसा क्यों होता है? विशेषज्ञों का मानना है कि वायरल कंटेंट को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए कई बार उसके साथ नई कहानी जोड़ दी जाती है। जब किसी वीडियो को स्थानीय जगह या चर्चित शहर से जोड़ दिया जाता है तो लोग उसे ज्यादा तेजी से शेयर करते हैं।
कई बार ऐसा जानबूझकर किया जाता है, जबकि कई बार लोग बिना जांच किए किसी पोस्ट को आगे बढ़ा देते हैं।
इस मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ। वीडियो असली था, लेकिन उसके साथ जो दावा किया जा रहा था, वह गलत था। लोगों ने वीडियो को जयपुर का मान लिया और फिर वह तेजी से अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर फैल गया।
फैक्ट-चेक करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वायरल वीडियो पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। खासकर तब जब वीडियो बहुत अजीब, चौंकाने वाला या अविश्वसनीय लगे। आज इंटरनेट पर कई ऐसे साधन मौजूद हैं जिनकी मदद से किसी वीडियो या तस्वीर की सच्चाई पता लगाई जा सकती है। कई समाचार संस्थान और फैक्ट-चेक संगठन भी वायरल दावों की जांच करते हैं।
आम लोगों के लिए भी कुछ आसान तरीके हैं जिनकी मदद से वे गलत जानकारी से बच सकते हैं।
सबसे पहले यह देखना चाहिए कि वीडियो किस अकाउंट से साझा किया गया है। अगर जानकारी का स्रोत स्पष्ट नहीं है तो सावधानी बरतनी चाहिए।
दूसरा, किसी भी वायरल दावे को एक से ज्यादा विश्वसनीय समाचार स्रोतों पर जांचना चाहिए। यदि किसी बड़ी घटना की खबर है तो उसके बारे में भरोसेमंद मीडिया संस्थानों में जानकारी मिल जाएगी।
तीसरा, केवल वीडियो देखकर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। कई बार वीडियो सही होता है लेकिन उसके साथ लिखी गई कहानी गलत होती है।
सोशल मीडिया के दौर में गलत जानकारी बहुत तेजी से फैलती है। एक व्यक्ति द्वारा शेयर की गई पोस्ट कुछ ही घंटों में लाखों लोगों तक पहुंच सकती है। यही वजह है कि गलत दावों की पहचान करना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि गलत जानकारी सिर्फ भ्रम पैदा नहीं करती, बल्कि कई बार लोगों की राय और सोच को भी प्रभावित करती है। इसलिए किसी भी वायरल वीडियो को सच मानने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है।
इस मामले में जांच ने साफ कर दिया कि गोल-गोल घूमती दो मोटरसाइकिलों वाला वीडियो जयपुर का नहीं है। यह घटना इंडोनेशिया के पेकनबारू शहर में हुई थी और इसे गलत दावे के साथ भारत का बताकर वायरल किया गया। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर जानकारी सही नहीं होती। किसी भी वीडियो, तस्वीर या खबर को आगे भेजने से पहले उसकी सच्चाई जांच लेना जरूरी है।
डिजिटल दौर में जागरूकता ही गलत जानकारी से बचने का सबसे आसान और सबसे प्रभावी तरीका है।
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