अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ईरान के कई ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। इस बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति गंभीर बनी हुई है, क्योंकि दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। बढ़ते तनाव से वैश्विक तेल बाजार में चिंता बढ़ गई है और इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर भी इसका प्रभाव महसूस किया जा सकता है।
मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेना ने लगातार दूसरे दिन भी ईरान के कई ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इसके बाद पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है और दुनिया की नजर अब होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर टिकी हुई है। यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल एक देश से दूसरे देश तक पहुंचता है। इसलिए इस इलाके में बढ़ता तनाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। क्या हुआ है?
अमेरिकी सेना के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर ईरान के कुछ महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई अपनी सुरक्षा के लिए की गई है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि ईरान लगातार ऐसी गतिविधियां कर रहा था जिससे क्षेत्र की सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा था। इसी वजह से यह सैन्य कार्रवाई की गई। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब कुछ दिन पहले तक दोनों देशों के बीच बातचीत की उम्मीद दिखाई दे रही थी। माना जा रहा था कि तनाव कम हो सकता है, लेकिन अब हालात उलटे दिशा में जाते दिख रहे हैं। ईरान ने भी किया जवाबी दावा अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। ईरान का कहना है कि उसने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके लिए ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल करने का दावा किया गया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन इतना साफ है कि दोनों देशों के बीच तनाव पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुका है। दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और अपने कदमों को सही बता रहे हैं। होर्मुज़ जलडमरूमध्य क्यों बना चर्चा का केंद्र?
इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा होर्मुज़ जलडमरूमध्य की हो रही है। आसान भाषा में समझें तो यह समुद्र का एक महत्वपूर्ण रास्ता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला तेल इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। दुनिया के तेल कारोबार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। इसलिए यहां किसी भी तरह की परेशानी का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है। इसी वजह से जब भी इस इलाके में तनाव बढ़ता है, तेल बाजार और कई देशों की चिंता बढ़ जाती है। ईरान और अमेरिका के अलग-अलग दावे ईरान का कहना है कि उसने इस इलाके में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं और कुछ जहाजों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है। दूसरी तरफ अमेरिका का कहना है कि समुद्री रास्ता खुला हुआ है और व्यापारिक जहाज सामान्य रूप से आ-जा रहे हैं। अमेरिकी नौसेना का दावा है कि वह क्षेत्र में मौजूद जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है। इन अलग-अलग दावों के कारण दुनिया भर में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। हेलीकॉप्टर हादसे ने बढ़ाई मुश्किल तनाव बढ़ने की एक बड़ी वजह हाल ही में हुई एक घटना भी मानी जा रही है। जानकारी के अनुसार अमेरिका का एक अपाचे हेलीकॉप्टर होर्मुज़ क्षेत्र के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह घटना एक ईरानी ड्रोन से टकराने के बाद हुई। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस घटना के लिए सीधे ईरान को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि हेलीकॉप्टर में मौजूद दोनों पायलटों को सुरक्षित बचा लिया गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी और तेज हो गई। बातचीत की उम्मीद कमजोर कुछ समय पहले तक यह उम्मीद की जा रही थी कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी तरह का समझौता हो सकता है। कई रिपोर्टों में कहा गया था कि दोनों पक्ष बातचीत के रास्ते तलाश रहे हैं। लेकिन हाल की घटनाओं के बाद ऐसी संभावना कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। ईरान का कहना है कि वह दबाव में आकर बातचीत नहीं करेगा। वहीं अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी कुछ नीतियों और गतिविधियों में बदलाव करे। यही वजह है कि फिलहाल कोई समाधान नजर नहीं आ रहा। दुनिया क्यों चिंतित है?
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अमेरिका और ईरान दोनों ही महत्वपूर्ण देश हैं। दोनों के बीच किसी भी बड़े टकराव का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है। कई देशों की तेल सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इसी कारण संयुक्त राष्ट्र और कई अन्य देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। कई सरकारें चाहती हैं कि तनाव कम हो और बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए। तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं इस पूरे मामले का सबसे बड़ा आर्थिक असर तेल बाजार पर पड़ सकता है। यदि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो तेल की सप्लाई कम हो सकती है। जब सप्लाई कम होती है तो कीमतें बढ़ने लगती हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार पहले से ही इस स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस तक पहुंच सकता है। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?
भारत अपनी जरूरत का काफी तेल विदेशों से खरीदता है। खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए तेल का बड़ा स्रोत है। अगर इस इलाके में तनाव बढ़ता है और तेल महंगा होता है तो भारत पर भी असर पड़ सकता है। महंगा तेल आने से परिवहन लागत बढ़ सकती है। इसका असर कई वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि भारत समेत कई देश इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। आम लोगों को क्या फर्क पड़ सकता है?
अभी यह संकट हजारों किलोमीटर दूर दिखाई देता है, लेकिन इसका असर आम लोगों तक भी पहुंच सकता है। यदि तेल महंगा होता है तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इससे रोजमर्रा की चीजों की लागत भी प्रभावित हो सकती है। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि कीमतों में कितना बदलाव होगा। यह आगे की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि होर्मुज़ क्षेत्र में लंबे समय तक तनाव रहने पर वैश्विक बाजार प्रभावित हो सकते हैं। आगे क्या होगा?
फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों अपने-अपने रुख पर कायम हैं। दोनों देशों की ओर से सख्त बयान आ रहे हैं और सैन्य गतिविधियां भी जारी हैं। दुनिया की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं कोई छोटी घटना बड़े संघर्ष का रूप न ले ले। कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की कोशिश है कि हालात और न बिगड़ें और बातचीत का रास्ता खुला रहे। अभी के लिए पूरी दुनिया की नजर मध्य पूर्व के हालात पर है। खासकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर, क्योंकि यहां होने वाली हर हलचल का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर पड़ सकता है। फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि दोनों देश तनाव कम करने की दिशा में बढ़ते हैं या टकराव और गहरा होता है। दुनिया को उम्मीद है कि हालात नियंत्रण में रहें, क्योंकि किसी बड़े संघर्ष का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया महसूस करेगी।
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