Meta ने भारत में अपने पहले बड़े AI इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के तहत Reliance Industries के साथ साझेदारी की है। दोनों कंपनियां गुजरात के जामनगर में 168 मेगावाट क्षमता वाला AI-सक्षम डेटा सेंटर विकसित करेंगी। यह केंद्र Meta की AI और क्लाउड कंप्यूटिंग जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा। परियोजना को नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित किया जाएगा और इसे अगले दो वर्षों में तैयार करने की योजना है। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब भारत तेजी से AI और डेटा सेंटर निवेश का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।
Facebook, Instagram और WhatsApp की पैरेंट कंपनी Meta ने भारत में अपने पहले बड़े AI इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का ऐलान किया है। कंपनी ने Reliance Industries के साथ मिलकर गुजरात के जामनगर में 168 मेगावाट क्षमता वाला AI डेटा सेंटर बनाने का फैसला किया है। यह प्रोजेक्ट भारत को तेजी से बढ़ती AI और डेटा सेंटर इंडस्ट्री में मजबूत स्थिति दिला सकता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर दुनिया भर में बड़ी दौड़ चल रही है। OpenAI, Google, Microsoft, Amazon और Meta जैसी कंपनियां ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं, जो AI मॉडल को ट्रेन और चलाने के लिए जरूरी है। इसी बीच Meta ने भारत में अपने पहले बड़े AI इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की घोषणा की है।
Meta और Reliance Industries ने गुजरात के जामनगर में एक बड़े AI-सक्षम डेटा सेंटर के लिए साझेदारी की है। इस समझौते के तहत 168 मेगावाट क्षमता वाला डेटा सेंटर बनाया जाएगा, जिसका इस्तेमाल AI और क्लाउड कंप्यूटिंग से जुड़े कामों के लिए किया जाएगा।
यह सिर्फ एक नया डेटा सेंटर नहीं है, बल्कि भारत के लिए एक बड़ा संकेत है कि दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियां अब देश को AI इंफ्रास्ट्रक्चर के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देखने लगी हैं।
क्या होता है डेटा सेंटर? सरल भाषा में समझें तो डेटा सेंटर एक ऐसी जगह होती है जहां हजारों सर्वर और कंप्यूटर लगातार काम करते रहते हैं। इन्हीं सर्वरों पर वेबसाइटें, ऐप्स, क्लाउड सेवाएं और AI सिस्टम चलते हैं।
जब आप WhatsApp पर मैसेज भेजते हैं, Instagram पर वीडियो देखते हैं या Facebook इस्तेमाल करते हैं, तो उसके पीछे मौजूद डेटा बड़े सर्वरों में स्टोर और प्रोसेस होता है।
AI सिस्टम को तो और भी ज्यादा कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है। ChatGPT जैसे बड़े AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए लाखों-करोड़ों डेटा पॉइंट्स पर लगातार काम करना पड़ता है। इसके लिए विशाल डेटा सेंटर जरूरी होते हैं।
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भारत में Meta का पहला बड़ा AI इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश Meta कई वर्षों से भारत में मौजूद है और कंपनी के करोड़ों भारतीय यूजर्स हैं। लेकिन अब तक उसने भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर कोई बड़ा निवेश नहीं किया था।
नई साझेदारी के साथ Meta पहली बार भारत में बड़े स्तर पर AI कंप्यूटिंग क्षमता विकसित करने जा रही है। यह डेटा सेंटर गुजरात के जामनगर में बनाया जाएगा। Reliance का कहना है कि यह परियोजना अगले दो वर्षों में तैयार हो सकती है। जरूरत पड़ने पर इसकी क्षमता भविष्य में और बढ़ाई भी जा सकती है।
Meta और Reliance की साझेदारी नई नहीं Meta और Reliance के बीच सहयोग पिछले कई वर्षों से जारी है। साल 2020 में Meta ने Jio Platforms में 5.7 अरब डॉलर का निवेश किया था। उस समय यह भारत के डिजिटल सेक्टर में सबसे बड़ी विदेशी निवेश डील्स में से एक थी।
उसके बाद दोनों कंपनियों ने कई डिजिटल प्रोजेक्ट्स पर साथ काम किया। पिछले साल दोनों ने करीब 100 मिलियन डॉलर का संयुक्त उद्यम भी शुरू किया था, जिसका उद्देश्य AI आधारित समाधान विकसित करना था। अब दोनों कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर साथ काम कर रही हैं, जो उनके रिश्ते का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है।
क्यों बढ़ रही है AI डेटा सेंटर की मांग? पिछले कुछ वर्षों में AI तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ा है। कंपनियां AI चैटबॉट, इमेज जनरेशन टूल, वीडियो निर्माण, डेटा विश्लेषण और ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश कर रही हैं। इन सभी तकनीकों को चलाने के लिए बहुत ज्यादा कंप्यूटिंग पावर चाहिए होती है।
AI मॉडल जितना बड़ा होता है, उसे चलाने के लिए उतने ही ज्यादा सर्वर, बिजली और स्टोरेज की जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि दुनिया भर में डेटा सेंटर बनाने की होड़ लगी हुई है। भारत क्यों बन रहा है AI निवेश का केंद्र? कुछ साल पहले तक ज्यादातर बड़े डेटा सेंटर अमेरिका, यूरोप और चीन में बनते थे। लेकिन अब भारत भी तेजी से इस सूची में शामिल हो रहा है।
इसके पीछे कई कारण हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट बाजारों में शामिल है। यहां करोड़ों लोग डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। ऑनलाइन भुगतान, ई-कॉमर्स, वीडियो स्ट्रीमिंग, क्लाउड सेवाओं और AI तकनीकों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है।
ऐसे में टेक कंपनियां भारत में ही अपनी कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाना चाहती हैं। कई बड़ी कंपनियां कर चुकी हैं निवेश Meta अकेली कंपनी नहीं है जो भारत में AI और डेटा सेंटर पर निवेश कर रही है।
हाल के वर्षों में Microsoft, Amazon, Google, OpenAI और Uber जैसी कंपनियां भी भारत में क्लाउड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े निवेशों की घोषणा कर चुकी हैं। इन कंपनियों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजारों में से एक होगा।
भारतीय कंपनियां भी पीछे नहीं विदेशी कंपनियों के साथ-साथ भारतीय उद्योग समूह भी इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। Adani Group और Tata Consultancy Services पहले ही डेटा सेंटर विस्तार की योजनाओं पर काम कर रहे हैं।
इसी सप्ताह Blackstone समर्थित AirTrunk ने भी भारत में 2030 तक 5 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने के लिए 30 अरब डॉलर निवेश की योजना का ऐलान किया है। इससे साफ है कि आने वाले वर्षों में डेटा सेंटर सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और निवेश दोनों बढ़ने वाले हैं।
पर्यावरण पर भी रहेगा ध्यान डेटा सेंटर बड़ी मात्रा में बिजली का इस्तेमाल करते हैं। हजारों सर्वरों को लगातार चलाने और ठंडा रखने के लिए भारी ऊर्जा की जरूरत पड़ती है।
Meta और Reliance का कहना है कि जामनगर में बनने वाला डेटा सेंटर नवीकरणीय ऊर्जा यानी Renewable Energy से संचालित किया जाएगा। इसके अलावा सर्वरों को ठंडा रखने के लिए समुद्री जल को साफ करके उपयोग में लाया जाएगा।
यह कदम ऊर्जा खपत और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Meta उठाएगी बिजली और पानी का खर्च कंपनियों के मुताबिक Meta अपने संचालन के लिए जरूरी बिजली और पानी की पूरी लागत खुद वहन करेगी।
यानी डेटा सेंटर को चलाने के लिए जितनी ऊर्जा और पानी की जरूरत होगी, उसका खर्च Meta उठाएगी। हालांकि दोनों कंपनियों ने इस समझौते की कुल वित्तीय कीमत का खुलासा नहीं किया है। Reliance की क्या होगी भूमिका? इस परियोजना में Reliance सिर्फ जमीन उपलब्ध नहीं कराएगी।
कंपनी डिजाइन, निर्माण, बिजली आपूर्ति, कनेक्टिविटी और संचालन जैसी सेवाएं भी संभालेगी।
इसका मतलब है कि Reliance खुद को वैश्विक टेक कंपनियों के लिए एक पूर्ण AI इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर के रूप में स्थापित करना चाहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मॉडल सफल होता है तो भविष्य में अन्य विदेशी टेक कंपनियां भी Reliance के साथ इसी तरह की साझेदारी कर सकती हैं।
भारत की डेटा सेंटर क्षमता तेजी से बढ़ी सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2020 में भारत की कुल डेटा सेंटर क्षमता लगभग 375 मेगावाट थी। 2025 तक यह बढ़कर करीब 1.5 गीगावाट हो गई। यानी पांच साल में क्षमता लगभग चार गुना बढ़ चुकी है।
उद्योग जगत का अनुमान है कि 2030 तक यह आंकड़ा 8 गीगावाट से भी ज्यादा हो सकता है। AI, क्लाउड सेवाओं और स्थानीय डेटा प्रोसेसिंग की बढ़ती मांग इसके पीछे प्रमुख वजह मानी जा रही है।
Meta ने Renewable Energy पर भी किया बड़ा दांव Meta ने इस परियोजना के अलावा भारत में करीब 1 गीगावाट नई नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने की भी घोषणा की है।
इसके लिए कंपनी ने CleanMax और Fourth Partner Energy के साथ समझौते किए हैं। यह ऊर्जा जामनगर डेटा सेंटर सहित Meta के अन्य संचालन में भी मदद करेगी।
अभी क्या जानकारी सामने नहीं आई? हालांकि साझेदारी की घोषणा हो चुकी है, लेकिन कई बातें अभी साफ नहीं हैं। कंपनियों ने यह नहीं बताया है कि इस डेटा सेंटर में किस तरह के AI वर्कलोड चलाए जाएंगे। इसके अलावा समझौते की कुल कीमत भी सार्वजनिक नहीं की गई है।
Meta ने यह भी नहीं बताया कि वह भारत में आगे और AI डेटा सेंटर बनाएगी या नहीं। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रोजेक्ट? Meta और Reliance की यह साझेदारी सिर्फ दो कंपनियों के बीच हुआ एक कारोबारी समझौता नहीं है।
यह इस बात का संकेत है कि भारत अब केवल टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता बाजार नहीं रह गया है, बल्कि AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगा है।
दुनिया की बड़ी तकनीकी कंपनियां अब भारत में डेटा सेंटर, क्लाउड सेवाओं और AI कंप्यूटिंग क्षमता विकसित करने में रुचि दिखा रही हैं। जामनगर में बनने वाला यह डेटा सेंटर उसी बदलती तस्वीर का हिस्सा है। अगर देश में इसी तरह के निवेश जारी रहते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक AI इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रमुख केंद्रों में शामिल हो सकता है।
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