आज रात सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आसमान में शुक्र और बृहस्पति एक-दूसरे के बेहद करीब दिखाई देंगे। दोनों ग्रहों के बीच की दूरी आसमान में 2 डिग्री से भी कम रहेगी, जिससे यह एक शानदार खगोलीय नज़ारा बनेगा। साफ मौसम में इसे बिना दूरबीन के भी देखा जा सकता है। बृहस्पति के पास उसके चार प्रमुख चंद्रमा भी बाइनोक्युलर से नजर आ सकते हैं। बुध ग्रह भी पश्चिमी क्षितिज के पास मौजूद रहेगा, हालांकि उसे देखना थोड़ा मुश्किल होगा। खगोल प्रेमियों के लिए यह जून महीने की सबसे आकर्षक खगोलीय घटनाओं में से एक मानी जा रही है।
आज रात आसमान देखने वालों के लिए एक खास मौका है। सूर्यास्त के बाद पश्चिमी दिशा में देखने पर सौरमंडल के दो सबसे चमकीले ग्रह शुक्र (Venus) और बृहस्पति (Jupiter) एक-दूसरे के बेहद करीब दिखाई देंगे। यह खगोलीय घटना हर दिन नहीं होती और इसी वजह से खगोल प्रेमियों में इसे लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
अगर मौसम साफ रहा तो बिना किसी दूरबीन के भी इस खूबसूरत नज़ारे को देखा जा सकता है। दोनों ग्रह इतने चमकीले होंगे कि शहरों में रहने वाले लोग भी इन्हें आसानी से पहचान सकेंगे। आखिर क्या होने वाला है?
आज शाम सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आसमान में दो चमकदार बिंदु एक-दूसरे के पास नजर आएंगे। इनमें सबसे ज्यादा चमकीला शुक्र ग्रह होगा, जबकि उसके पास बृहस्पति दिखाई देगा। खगोल विज्ञान में जब दो ग्रह पृथ्वी से देखने पर आसमान में एक-दूसरे के करीब दिखाई देते हैं तो उसे "कंजंक्शन" यानी संयोजन कहा जाता है। इसका मतलब यह नहीं होता कि दोनों ग्रह वास्तव में पास आ गए हैं। असल में उनके बीच करोड़ों किलोमीटर की दूरी होती है, लेकिन पृथ्वी से देखने पर वे एक ही दिशा में दिखाई देते हैं। यही वजह है कि आज रात शुक्र और बृहस्पति एक शानदार जोड़ी की तरह नजर आएंगे।
कब देखें यह नज़ारा? इस खगोलीय घटना को देखने का सबसे अच्छा समय सूर्यास्त के करीब 30 मिनट बाद से लेकर लगभग एक घंटे तक रहेगा।
जैसे ही सूरज डूबेगा, पश्चिमी दिशा में नजर डालें। वहां सबसे पहले चमकता हुआ शुक्र ग्रह दिखाई देगा। उसके पास बृहस्पति मौजूद रहेगा। जैसे-जैसे अंधेरा बढ़ेगा, दोनों ग्रह और साफ दिखाई देने लगेंगे। बहुत देर तक इंतजार करने पर वे क्षितिज के करीब चले जाएंगे और फिर देखना मुश्किल हो सकता है।
किस दिशा में देखें? इस दृश्य को देखने के लिए पश्चिम दिशा की ओर देखना होगा। यदि आपके सामने ऊंची इमारतें, पहाड़ या पेड़ नहीं हैं तो ग्रहों को देखना आसान होगा। खुला मैदान, छत या किसी ऊंची जगह से यह नज़ारा ज्यादा बेहतर दिखाई दे सकता है।
गांवों और छोटे शहरों में, जहां रोशनी कम होती है, वहां यह दृश्य और भी साफ नजर आ सकता है। क्या दूरबीन की जरूरत पड़ेगी? नहीं।
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सबसे अच्छी बात यह है कि इस खगोलीय घटना को देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं है। दोनों ग्रह इतने चमकीले हैं कि इन्हें नंगी आंखों से देखा जा सकता है।
हालांकि यदि आपके पास बाइनोक्युलर या छोटी दूरबीन है तो अनुभव और भी बेहतर हो सकता है।
दूरबीन से देखने पर बृहस्पति के आसपास उसके चार बड़े चंद्रमा भी दिखाई दे सकते हैं। ये छोटे चमकीले बिंदुओं की तरह नजर आते हैं।
बृहस्पति के चार बड़े चंद्रमा भी दिख सकते हैं बृहस्पति सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। इसके दर्जनों चंद्रमा हैं, लेकिन चार प्रमुख चंद्रमा सबसे प्रसिद्ध माने जाते हैं।
इनके नाम हैं: आयो (Io) यूरोपा (Europa) गैनीमीड (Ganymede) कैलिस्टो (Callisto) इन चंद्रमाओं को गैलीलियन मून कहा जाता है क्योंकि इन्हें सबसे पहले प्रसिद्ध वैज्ञानिक गैलीलियो गैलीली ने 1610 में देखा था। अगर आसमान साफ हो और आपके पास अच्छी बाइनोक्युलर हो तो ये छोटे चमकीले बिंदुओं के रूप में दिखाई दे सकते हैं।
बुध ग्रह भी रहेगा आसमान में आज रात सिर्फ शुक्र और बृहस्पति ही नहीं, बल्कि बुध (Mercury) ग्रह भी आसमान में मौजूद रहेगा।
हालांकि बुध को देखना थोड़ा मुश्किल होगा। यह ग्रह पश्चिमी क्षितिज के काफी करीब रहेगा और सूर्यास्त की बची हुई रोशनी में छिप सकता है। इसलिए इसे देखने के लिए बिल्कुल साफ आसमान और पश्चिम दिशा का खुला दृश्य जरूरी होगा।
कई लोगों को बुध दिखाई नहीं देगा, लेकिन शुक्र और बृहस्पति को देखना अपेक्षाकृत आसान रहेगा।
क्यों खास है यह घटना? आसमान में ग्रह लगातार अपनी-अपनी कक्षाओं में घूमते रहते हैं। इसी दौरान कभी-कभी वे पृथ्वी से देखने पर एक-दूसरे के पास दिखाई देने लगते हैं।
खगोल वैज्ञानिकों के लिए यह सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन आम लोगों के लिए यह एक खूबसूरत और यादगार दृश्य बन जाती है।
ऐसी घटनाएं लोगों को अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान के प्रति आकर्षित करती हैं। यही कारण है कि जब भी कोई ग्रह संयोजन होता है तो दुनिया भर के स्काईवॉचर और फोटोग्राफर इसे देखने और तस्वीरें लेने की कोशिश करते हैं।
अगले कुछ दिनों में क्या होगा? आज की रात के बाद भी यह कहानी यहीं खत्म नहीं होगी। आने वाले दिनों में शुक्र और ऊपर की ओर जाता दिखाई देगा, जबकि बृहस्पति धीरे-धीरे नीचे की ओर खिसकता नजर आएगा।
यानी दोनों ग्रहों के बीच की दूरी बढ़ने लगेगी। कुछ दिनों बाद यह नज़ारा बदल जाएगा और दोनों ग्रह पहले जितने करीब दिखाई नहीं देंगे। 20 जून को दिखेगा एक और खास दृश्य खगोल विज्ञान से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार 20 जून के आसपास शुक्र ग्रह कर्क (Cancer) तारामंडल के एक प्रसिद्ध तारागुच्छ के पास दिखाई देगा।
इस तारागुच्छ को मेसियर-44 (Messier 44), प्रेसेपे (Praesepe) या बीहाइव क्लस्टर (Beehive Cluster) कहा जाता है।
यह सैकड़ों तारों का समूह है और रात के आसमान में बेहद सुंदर दिखाई देता है। जब शुक्र इसके पास पहुंचेगा तो खगोल प्रेमियों को एक और शानदार दृश्य देखने को मिलेगा। बृहस्पति जल्द हो जाएगा ओझल आज के बाद बृहस्पति को देखना धीरे-धीरे मुश्किल होने लगेगा।
हर गुजरती शाम यह ग्रह सूर्यास्त के समय क्षितिज के और करीब दिखाई देगा। जुलाई की शुरुआत तक यह सूर्य की चमक में लगभग खो जाएगा और सामान्य लोगों के लिए इसे देख पाना कठिन होगा। इसके बाद बृहस्पति कुछ समय तक नजर नहीं आएगा।
मध्य अगस्त के आसपास यह फिर से दिखाई देना शुरू करेगा, लेकिन इस बार सुबह के आसमान में। ग्रह बार-बार करीब क्यों दिखाई देते हैं? बहुत से लोगों के मन में सवाल आता है कि शुक्र और बृहस्पति बार-बार एक-दूसरे के करीब क्यों नजर आते हैं।
इसका कारण उनकी कक्षाएं हैं। सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर अलग-अलग गति से चक्कर लगाते हैं। पृथ्वी भी लगातार अपनी कक्षा में घूम रही होती है।
जब इन ग्रहों की स्थिति ऐसी बनती है कि वे पृथ्वी से एक ही दिशा में दिखाई दें, तब वे आसमान में करीब नजर आने लगते हैं। यही वजह है कि समय-समय पर ऐसे संयोजन देखने को मिलते रहते हैं।
फोटो खींचने वालों के लिए अच्छा मौका यदि आपको रात के आसमान की तस्वीरें लेना पसंद है तो आज की शाम अच्छा अवसर हो सकती है।
मोबाइल फोन के कैमरे से भी दोनों ग्रहों को एक साथ कैद करने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि बेहतर तस्वीरों के लिए ट्राइपॉड और लंबा एक्सपोजर उपयोगी साबित हो सकता है। शहर की तेज रोशनी से दूर जाकर तस्वीर लेने पर परिणाम और अच्छे मिल सकते हैं।
आसमान देखने वालों के लिए खास शाम शुक्र और बृहस्पति दोनों ही रात के आसमान के सबसे चमकीले पिंडों में गिने जाते हैं। जब ये एक-दूसरे के इतने करीब दिखाई देते हैं तो दृश्य और भी आकर्षक बन जाता है।
इस नज़ारे को देखने के लिए किसी महंगे उपकरण या विशेष तैयारी की जरूरत नहीं है। सिर्फ साफ मौसम, पश्चिम दिशा का खुला दृश्य और थोड़ी सी धैर्य की जरूरत है।
अगर आज शाम मौसम साथ देता है तो लोग अपनी आंखों से सौरमंडल के दो चमकीले ग्रहों की यह खूबसूरत मुलाकात देख सकेंगे। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए यह एक यादगार शाम साबित हो सकती है।
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