बेंगलुरु के एक टेक प्रोफेशनल, जिसकी सैलरी छह अंकों में है, वीकेंड पर Rapido बाइक टैक्सी चलाता है। उसका कहना है कि वह यह काम सिर्फ अतिरिक्त कमाई के लिए नहीं, बल्कि नए लोगों से मिलने, शहर को अलग नजरिए से समझने और खुद को जमीन से जुड़ा रखने के लिए करता है।
आज के समय में अच्छी नौकरी और अच्छी सैलरी को आर्थिक सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार माना जाता है। लेकिन बेंगलुरु से सामने आई एक कहानी ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। एक टेक कंपनी में काम करने वाला प्रोफेशनल, जिसकी सैलरी छह अंकों में बताई जा रही है, वीकेंड पर Rapido बाइक टैक्सी भी चलाता है। यह खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय देखने को मिली। कुछ लोगों ने इसे मेहनत और नई चीजें सीखने की कोशिश बताया, जबकि कुछ ने कहा कि यह बढ़ते "हसल कल्चर" और शहरी जीवन के दबाव को दिखाता है। इस घटना ने नौकरी, कमाई, बढ़ते खर्च और काम-जीवन संतुलन जैसे मुद्दों पर नई चर्चा शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला? रिपोर्ट के अनुसार बेंगलुरु में काम करने वाला एक टेक प्रोफेशनल सोमवार से शुक्रवार तक अपनी नियमित नौकरी करता है। उसकी आय भी काफी अच्छी बताई गई है। इसके बावजूद वह शनिवार और रविवार को Rapido बाइक टैक्सी चलाता है।
जब लोगों ने उससे इसका कारण पूछा तो उसने कहा कि वह केवल पैसे कमाने के लिए ऐसा नहीं करता। उसका कहना है कि इस काम से उसे अलग-अलग तरह के लोगों से मिलने का मौका मिलता है। वह शहर को करीब से समझ पाता है और अपनी कॉर्पोरेट जिंदगी से बाहर निकलकर आम लोगों के अनुभव जान पाता है।
उसने बताया कि बाइक चलाते समय उसकी मुलाकात छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, छोटे व्यापारियों और कई अन्य लोगों से होती है। इन बातचीतों से उसे नई बातें सीखने को मिलती हैं। सोशल मीडिया पर बंटी लोगों की राय जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई।
एक वर्ग ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से खाली समय में अतिरिक्त काम करता है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उनका मानना है कि हर व्यक्ति को अपने समय का उपयोग अपनी पसंद के अनुसार करने का अधिकार है। दूसरी ओर कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या आज की हाई-पेइंग नौकरियां भी लोगों को इतना संतोष नहीं दे पा रही हैं कि वे वीकेंड पर आराम कर सकें। कुछ यूजर्स ने कहा कि यह बढ़ते काम के दबाव और लगातार व्यस्त रहने की संस्कृति को दिखाता है।
क्या है हसल कल्चर? पिछले कुछ वर्षों में "हसल कल्चर" शब्द काफी लोकप्रिय हुआ है। इसका मतलब है हमेशा काम करते रहना, खुद को लगातार व्यस्त रखना और खाली समय को भी कमाई या करियर से जोड़ देना।
कई लोग इसे सफलता का रास्ता मानते हैं। उनका मानना है कि अतिरिक्त मेहनत करने से भविष्य बेहतर बनता है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
लेकिन कई विशेषज्ञ इसके नुकसान भी बताते हैं। उनका कहना है कि लगातार काम करने से मानसिक तनाव बढ़ सकता है और व्यक्ति थकान का शिकार हो सकता है।
वीकेंड का मतलब बदल रहा है कुछ साल पहले तक वीकेंड को आराम, परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने का मौका माना जाता था। लोग इन दो दिनों में घूमने जाते थे, अपने शौक पूरे करते थे या घर पर आराम करते थे।
लेकिन अब स्थिति बदल रही है। कई युवा प्रोफेशनल वीकेंड पर फ्रीलांस काम करते हैं। कुछ ऑनलाइन प्रोजेक्ट लेते हैं, कुछ कंटेंट क्रिएशन करते हैं और कुछ लोग गिग वर्क से जुड़ जाते हैं।
Rapido चलाने वाले इस टेक प्रोफेशनल की कहानी भी इसी बदलाव को दिखाती है। बढ़ते खर्च भी एक बड़ी वजह इसी दौरान बेंगलुरु के एक परिवार की मासिक खर्च से जुड़ी रिपोर्ट भी चर्चा में रही। रिपोर्ट में बताया गया कि परिवार का मासिक खर्च करीब 1.66 लाख रुपये तक पहुंच रहा है। इसमें किराया, बच्चों की देखभाल, फिटनेस, घरेलू जरूरतें और अन्य खर्च शामिल हैं। यह आंकड़ा सामने आने के बाद लोगों ने कहा कि बड़े शहरों में जीवन पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है।
कई लोगों का कहना था कि अच्छी आय होने के बावजूद बचत करना मुश्किल होता जा रहा है। बड़े शहरों की बढ़ती लागत बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में पिछले कुछ वर्षों में खर्च तेजी से बढ़ा है।
घर का किराया, स्कूल फीस, स्वास्थ्य सेवाएं, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
इसी वजह से कई लोग अपनी मुख्य नौकरी के अलावा अतिरिक्त आय के स्रोत तलाश रहे हैं। कुछ लोग शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं, कुछ फ्रीलांसिंग कर रहे हैं और कुछ गिग इकॉनमी प्लेटफॉर्म्स से जुड़ रहे हैं।
गिग वर्क क्यों बढ़ रहा है? Rapido, Uber, Ola, Swiggy और Zomato जैसे प्लेटफॉर्म ने लोगों को अतिरिक्त कमाई का मौका दिया है।
पहले इन प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले ज्यादातर लोग इसे अपनी मुख्य आय का स्रोत मानते थे। लेकिन अब कई कॉर्पोरेट कर्मचारी और प्रोफेशनल भी खाली समय में इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके पीछे अलग-अलग कारण हैं।
कुछ लोग अतिरिक्त पैसा कमाना चाहते हैं। कुछ लोग नए अनुभव लेना चाहते हैं। वहीं कुछ लोग अपने खाली समय का उपयोग उत्पादक तरीके से करना चाहते हैं।
लोगों से मिलने का नया तरीका Rapido चलाने वाले टेक प्रोफेशनल ने कहा कि उसे सबसे ज्यादा मजा लोगों से बातचीत करने में आता है।
कॉर्पोरेट ऑफिस में अक्सर एक जैसे लोगों के साथ काम होता है। लेकिन बाइक टैक्सी चलाते समय हर सवारी अलग होती है।
कोई छात्र होता है, कोई नौकरीपेशा व्यक्ति, कोई पर्यटक और कोई व्यवसायी। हर व्यक्ति की अपनी कहानी होती है। यही अनुभव उसे इस काम से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करता है।
क्या यह दूसरी नौकरी की शुरुआत है? कई लोगों का मानना है कि यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है।
आज बड़ी संख्या में लोग अपनी मुख्य नौकरी के साथ दूसरी कमाई के विकल्प तलाश रहे हैं। नौकरी बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, आर्थिक अनिश्चितता और भविष्य की चिंताओं ने लोगों को अतिरिक्त आय के बारे में सोचने पर मजबूर किया है।
इसी वजह से "साइड इनकम" और "सेकेंड जॉब" जैसे शब्द पहले से ज्यादा आम हो गए हैं। मानसिक स्वास्थ्य का भी सवाल हालांकि अतिरिक्त काम के कई फायदे हो सकते हैं, लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं।
अगर व्यक्ति लगातार काम करता रहे और खुद के लिए समय न निकाले तो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आराम, अच्छी नींद और परिवार के साथ समय बिताना भी उतना ही जरूरी है जितना करियर बनाना।
अगर काम का दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाए तो बर्नआउट की समस्या पैदा हो सकती है। बदल रही है युवा पीढ़ी की सोच आज की युवा पीढ़ी पारंपरिक सोच से अलग तरीके से करियर को देख रही है।
पहले लोग एक नौकरी करते थे और उसी पर निर्भर रहते थे। लेकिन अब लोग कई आय स्रोत बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वे नई स्किल सीख रहे हैं, ऑनलाइन काम कर रहे हैं और अलग-अलग अवसर तलाश रहे हैं। इसी वजह से गिग इकॉनमी और फ्रीलांसिंग तेजी से बढ़ रही है।
भारत के शहरों के लिए क्या संकेत? बेंगलुरु की यह कहानी केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। यह भारत के बड़े शहरों में बदलती जीवनशैली की झलक भी दिखाती है। बढ़ते खर्च, बदलती प्राथमिकताएं और आर्थिक सुरक्षा की चिंता लोगों को नए रास्ते अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।
एक तरफ लोग अधिक कमाई के अवसर खोज रहे हैं, तो दूसरी तरफ वे नए अनुभव भी चाहते हैं।
यही कारण है कि आज कई लोग अपनी नियमित नौकरी के साथ कोई अतिरिक्त काम भी कर रहे हैं।
निष्कर्ष बेंगलुरु के इस टेक प्रोफेशनल की कहानी ने नौकरी, कमाई और जीवनशैली को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। कुछ लोग इसे मेहनत और सीखने की इच्छा का उदाहरण मानते हैं, जबकि कुछ इसे बढ़ते आर्थिक दबाव और हसल कल्चर का संकेत बताते हैं।
लेकिन एक बात साफ है कि भारत के बड़े शहरों में काम करने और कमाई करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब लोग केवल एक नौकरी पर निर्भर रहने के बजाय नए अवसरों और अतिरिक्त आय के स्रोतों की तलाश कर रहे हैं। साथ ही यह बहस भी जारी है कि आर्थिक सुरक्षा और बेहतर जीवन के बीच सही संतुलन कैसे बनाया जाए।
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