थार रेगिस्तान (राजस्थान) में भारतीय सेना की साउदर्न कमांड ने एक अनोखा जल-संरक्षण अभियान शुरू किया है, जिसमें सूख चुके तालाबों, जोहड़ों और जलस्रोतों को फिर से जीवित किया जा रहा है। सैनिक फावड़े और इंजीनियरिंग तकनीक की मदद से पानी रोकने के लिए चेक डैम और छोटे हौज़ बना रहे हैं।
थार रेगिस्तान, जो अपनी भीषण गर्मी और पानी की कमी के लिए जाना जाता है, इन दिनों एक अनोखे बदलाव का गवाह बन रहा है। भारतीय सेना की साउदर्न कमांड ने यहां ऐसा अभियान शुरू किया है, जो न तो युद्ध से जुड़ा है और न ही सुरक्षा ऑपरेशनों से—बल्कि यह प्रकृति और जीवन को बचाने की कोशिश है।
रेगिस्तान में “जल पुनर्जीवन मिशन” सेना ने स्थानीय प्रशासन और ग्रामीण समुदायों के साथ मिलकर सूख चुके तालाबों, जोहड़ों और पुराने जलस्रोतों को फिर से जीवित करने का काम शुरू किया है। कई जगहों पर मरम्मत, गहरी खुदाई और पानी रोकने के लिए छोटी संरचनाएँ बनाई जा रही हैं। जहाँ पहले महीनों तक पानी नहीं टिकता था, अब वहाँ छोटे तालाब और जल-संग्रहण हौज़ दिखाई देने लगे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, इससे पशुओं के लिए पानी की उपलब्धता काफी बेहतर हुई है।
बंदूक नहीं, फावड़ा है मुख्य हथियार इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि इसमें सैनिक हथियारों की जगह फावड़े और पाइप लेकर काम कर रहे हैं। वे पुराने जलस्रोतों को साफ कर रहे हैं, नई नालियाँ बना रहे हैं और बारिश के पानी को रोकने के लिए चेक डैम तैयार कर रहे हैं। यह प्रयास सिर्फ तकनीकी सुधार नहीं है, बल्कि एक बड़े पर्यावरणीय बदलाव की दिशा में कदम माना जा रहा है।
Continue Reading9 जून 2026
वन्यजीवों को भी मिला फायदा सूखे और पानी की कमी के कारण पिछले कुछ वर्षों में जंगली जानवर गाँवों की ओर आने लगे थे, जिससे मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष बढ़ गया था। अब जब रेगिस्तान के भीतर ही पानी के स्रोत तैयार हो रहे हैं, तो नीलगाय, हिरण और अन्य वन्यजीव वापस प्राकृतिक क्षेत्रों की ओर लौटने लगे हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष में भी कमी देखी जा रही है।
ग्रामीण जीवन में राहत इस अभियान का सबसे बड़ा असर स्थानीय लोगों के जीवन पर पड़ा है। कई गाँवों में अब पानी के लिए लंबी दूरी तय करने की मजबूरी कम हो गई है। पशुपालन करने वाले परिवारों को भी राहत मिली है क्योंकि उनके जानवरों के लिए पानी और चरागाह की स्थिति बेहतर हुई है।
Continue Reading9 जून 2026
विशेषज्ञों की राय पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मॉडल लगातार कुछ वर्षों तक चलता रहा, तो थार के कई हिस्सों में भूजल स्तर स्थिर होने की संभावना बन सकती है। इसे मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाने का एक व्यावहारिक मॉडल भी कहा जा रहा है।
भविष्य की संभावना अगर यह प्रयास लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसके दूरगामी परिणाम बेहद सकारात्मक हो सकते हैं—जैसे कि ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा, मरुस्थलीय पारिस्थितिकी का सुधार और जल संकट में कमी।
Continue Reading9 जून 2026
निष्कर्ष: थार रेगिस्तान में चल रहा यह अभियान सिर्फ एक परियोजना नहीं, बल्कि उम्मीद की नई कहानी है—जहाँ इंसान और प्रकृति मिलकर सूखे को हराने की कोशिश कर रहे हैं।
Disclaimer:
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI.
#TharDesert #IndianArmy #WaterConservation #RajasthanNews #EnvironmentNews #ClimateAction #BreakingNews #NetGramNews
Published by: Netgram Team. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.
9 जून 2026