अमेरिका के नेशनल हरिकेन सेंटर (NHC) के अनुसार ट्रॉपिकल स्टॉर्म “बोरिस” मेक्सिको के दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत तट की ओर बढ़ रहा है। अगले 24 से 48 घंटों में ग्युरेरो और ओआहाका के तटीय इलाकों में 10 से 25 सेंटीमीटर तक बारिश होने का अनुमान है। भारी वर्षा के कारण अचानक बाढ़ और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है।मौसम एजेंसियों का कहना है कि बोरिस सोमवार रात या मंगलवार सुबह तक ग्युरेरो तट के करीब पहुंच सकता है और बाद में कमजोर होकर निम्न दबाव क्षेत्र में बदल सकता है। इसके बावजूद सबसे बड़ा जोखिम भारी बारिश से जुड़ा हुआ है, जो नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों को प्रभावित कर सकती है।
मेक्सिको के दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत तट की ओर बढ़ रहा ट्रॉपिकल स्टॉर्म “बोरिस” आने वाले 24 से 48 घंटों में व्यापक वर्षा, अचानक बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति पैदा कर सकता है। अमेरिका के नेशनल हरिकेन सेंटर (NHC) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि सोमवार को बना यह तूफान मेक्सिको के ग्युरेरो और ओआहाका राज्यों के तटीय क्षेत्रों की तरफ बढ़ रहा है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि तूफान भले ही बहुत लंबे समय तक शक्तिशाली न रहे, लेकिन इससे जुड़ी भारी बारिश लाखों लोगों के लिए चुनौती बन सकती है।
मौसम एजेंसियों के पूर्वानुमान के अनुसार, ग्युरेरो और ओआहाका के तटीय तथा आसपास के क्षेत्रों में 10 से 25 सेंटीमीटर तक बारिश हो सकती है। इतनी अधिक वर्षा कम समय में होने पर स्थानीय जल निकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है और निचले इलाकों में जलभराव की आशंका बढ़ जाती है। विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में यह बारिश अधिक गंभीर प्रभाव छोड़ सकती है क्योंकि वहां मिट्टी के खिसकने और भूस्खलन की घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उष्णकटिबंधीय तूफानों के दौरान केवल तेज हवाएं ही खतरा नहीं होतीं। कई बार बारिश का प्रभाव अधिक व्यापक होता है। बोरिस के मामले में भी यही चिंता सबसे प्रमुख रूप से सामने आई है। लगातार होने वाली बारिश पहाड़ी ढलानों को कमजोर कर सकती है, जिससे बड़े पैमाने पर मिट्टी खिसकने की घटनाएं हो सकती हैं। ऐसे हालात में सड़क संपर्क प्रभावित हो सकता है और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
नेशनल हरिकेन सेंटर के मुताबिक, बोरिस सोमवार रात या मंगलवार सुबह तक ग्युरेरो के तट के आसपास पहुंच सकता है। इसके बाद इसके तेजी से कमजोर होकर निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने का अनुमान है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि तूफान का कमजोर होना जोखिम समाप्त होने का संकेत नहीं है। कई बार उष्णकटिबंधीय प्रणालियां कमजोर पड़ने के बाद भी भारी मात्रा में नमी लेकर आती हैं, जिससे लंबे समय तक वर्षा जारी रह सकती है।
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8 जून 2026
9 जून 2026
8 जून 2026
8 जून 2026
इसी वजह से प्रशासन और मौसम एजेंसियां लोगों को हवा की गति से ज्यादा बारिश की संभावित मात्रा पर ध्यान देने की सलाह दे रही हैं। छोटी नदियां, नाले और जलधाराएं तेज बारिश के दौरान अचानक उफान पर आ सकती हैं। इससे नदी किनारे बसे गांवों और शहरों के निचले हिस्सों में बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है। विशेष रूप से उन इलाकों को संवेदनशील माना जा रहा है जहां पहले भी भारी बारिश के बाद जलभराव या बाढ़ की घटनाएं सामने आती रही हैं।
एनएचसी ने प्रभावित तटीय क्षेत्रों के लिए ट्रॉपिकल स्टॉर्म चेतावनी जारी की है। लोगों से कहा गया है कि वे सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की पहचान पहले से कर लें तथा आवश्यक सामान तैयार रखें। प्रशासन ने यह भी सलाह दी है कि आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर लगातार नजर रखी जाए और स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों का पालन किया जाए।
मौसम विभाग को उम्मीद है कि ट्रॉपिकल स्टॉर्म बोरिस का सीधा प्रभाव उन मैक्सिकन शहरों पर नहीं पड़ेगा जो फीफा विश्व कप 2026 की मेजबानी करने वाले हैं। यह राहत की बात मानी जा रही है क्योंकि विश्व कप की तैयारियों से जुड़े कई बड़े शहर देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित हैं। फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि खराब मौसम का असर परिवहन और आपूर्ति व्यवस्था पर कुछ समय के लिए दिखाई दे सकता है।
Continue Reading9 जून 2026
विशेष रूप से तटीय बंदरगाहों और समुद्री गतिविधियों पर मौसम का प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है। खराब समुद्री परिस्थितियों के कारण माल परिवहन, जहाजों की आवाजाही और कुछ लॉजिस्टिक्स गतिविधियां अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि अभी तक किसी बड़े व्यवधान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन मौसम एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। बोरिस के विकास ने एक बार फिर जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम की घटनाओं पर चर्चा को तेज कर दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि ट्रॉपिकल स्टॉर्म और हरिकेन की कुल संख्या में हमेशा बड़ा इजाफा नहीं होता, लेकिन उनकी तीव्रता और वर्षा क्षमता बढ़ती जा रही है। इसका मतलब यह है कि कम संख्या में बनने वाले तूफान भी पहले की तुलना में कहीं अधिक पानी और ऊर्जा लेकर आ सकते हैं।
मौसम विज्ञान से जुड़े अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि गर्म होते महासागर उष्णकटिबंधीय प्रणालियों को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान कर सकते हैं। समुद्र की सतह का बढ़ता तापमान वातावरण में अधिक नमी बनाए रखने में मदद करता है, जिससे भारी वर्षा की संभावना बढ़ जाती है। यही वजह है कि आधुनिक मौसम पूर्वानुमान अब केवल हवा की गति या तूफान की श्रेणी तक सीमित नहीं रह गए हैं। वर्षा की मात्रा, बाढ़ का जोखिम और भूस्खलन की संभावना भी समान रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तटीय समुदायों के लिए सबसे बड़ी चुनौती केवल तूफान का तट से टकराना नहीं है, बल्कि उसके बाद होने वाली वर्षा भी है। कई बार तूफान के गुजर जाने के बाद भी प्रभावित क्षेत्रों में कई दिनों तक बारिश जारी रहती है, जिससे राहत और बचाव कार्य कठिन हो सकते हैं। बोरिस के मामले में भी भारी वर्षा को सबसे बड़ा जोखिम माना जा रहा है।
Continue Reading8 जून 2026
वैश्विक स्तर पर बढ़ती मौसम संबंधी अनिश्चितताओं के बीच यह घटनाक्रम उन देशों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो नियमित रूप से चक्रवातों और समुद्री तूफानों का सामना करते हैं। भारत जैसे देशों में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवातों की प्रकृति को लेकर भी वैज्ञानिक लगातार अध्ययन कर रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री तापमान में बदलाव और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझना भविष्य की आपदा तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के संदर्भ में भी ऐसे मौसमीय घटनाक्रम महत्वपूर्ण हो जाते हैं। बंदरगाहों, समुद्री परिवहन और अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई पर निर्भर व्यवसायों को मौसम से जुड़ी बाधाओं के लिए पहले से तैयारी करनी पड़ती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आपूर्ति नेटवर्क में वैकल्पिक व्यवस्था और समय-सीमा में अतिरिक्त लचीलापन रखना अब व्यवसायिक निरंतरता का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। फिलहाल मौसम एजेंसियां ट्रॉपिकल स्टॉर्म बोरिस की दिशा और तीव्रता पर लगातार नजर रखे हुए हैं। अगले कुछ घंटों में जारी होने वाले मौसम बुलेटिन स्थिति की और स्पष्ट तस्वीर देंगे। प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें, मौसम संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लें और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए तैयार रहें।
आने वाले 24 से 48 घंटे ग्युरेरो और ओआहाका के तटीय तथा पहाड़ी इलाकों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। भले ही बोरिस बाद में कमजोर पड़ जाए, लेकिन उससे जुड़ी भारी बारिश, अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना रह सकता है। इसी कारण स्थानीय प्रशासन, मौसम एजेंसियां और आपदा प्रबंधन विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहे हैं।
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8 जून 2026