रूस ने यूक्रेन पर एक बार फिर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिनमें कई लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने की खबर है। इसी बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की बातचीत की अपील को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ठुकरा दिया है। इससे युद्ध जल्द खत्म होने की उम्मीद और कमजोर पड़ती दिख रही है।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर दुनिया की सुर्खियों में है। रूस ने हाल ही में यूक्रेन के कई शहरों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों में कई लोगों की मौत हुई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। कई इमारतों और जरूरी ढांचों को भी नुकसान पहुंचा है।
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधे मुलाकात की इच्छा जताई थी। लेकिन पुतिन ने साफ कर दिया कि मौजूदा हालात में उन्हें जेलेंस्की से मिलने का कोई मतलब नहीं दिखता। पुतिन के इस बयान के बाद यह साफ संकेत मिला है कि दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी गहरे हैं और जल्द किसी समझौते की संभावना नजर नहीं आ रही है।
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था। शुरुआत में दुनिया को उम्मीद थी कि कुछ हफ्तों या महीनों में यह संघर्ष खत्म हो जाएगा, लेकिन अब यह युद्ध चौथे साल में पहुंच चुका है। इतने लंबे समय तक चलने वाले इस संघर्ष ने लाखों लोगों की जिंदगी बदल दी है। ताजा हमलों में रूस ने मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया। यूक्रेन की एयर डिफेंस सिस्टम ने कई हमलों को रोकने का दावा किया है। अधिकारियों के अनुसार कई ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया गया, लेकिन कुछ अपने लक्ष्य तक पहुंच गए।
इन हमलों का असर सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा। कई रिहायशी इलाकों में भी नुकसान की खबरें सामने आई हैं। कई परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े और राहत टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया।
यूक्रेन में युद्ध की शुरुआत से ही आम नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। लाखों लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं। कई परिवारों ने पड़ोसी देशों में शरण ली, जबकि कुछ लोग देश के अंदर ही सुरक्षित इलाकों में रहने को मजबूर हुए।
स्कूल, अस्पताल, सड़कें और बिजली व्यवस्था भी कई जगहों पर प्रभावित हुई हैं। युद्ध का असर केवल सैनिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका बोझ आम लोगों को भी उठाना पड़ रहा है।
राष्ट्रपति जेलेंस्की लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति की बात करते रहे हैं। उन्होंने कई बार कहा है कि युद्ध का अंत बातचीत के जरिए ही संभव है। इसी दिशा में उन्होंने पुतिन से सीधे मुलाकात की इच्छा जताई थी।
लेकिन रूस का रुख फिलहाल अलग दिखाई देता है। पुतिन का कहना है कि मौजूदा हालात में ऐसी मुलाकात का कोई फायदा नहीं होगा। उनके इस बयान ने उन लोगों को निराश किया है जो दोनों नेताओं के बीच सीधी बातचीत की उम्मीद कर रहे थे।
विश्लेषकों का मानना है कि जब दोनों देशों के शीर्ष नेता बातचीत को लेकर एकमत नहीं हैं, तब युद्ध समाप्त करने की दिशा में प्रगति करना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि अब इस संघर्ष को लंबा चलने वाला युद्ध माना जा रहा है। इस युद्ध ने यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था को भी प्रभावित किया है। पिछले कई दशकों में यूरोप ने इतना बड़ा सैन्य संघर्ष नहीं देखा था। रूस और यूक्रेन की लड़ाई ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
अमेरिका और कई पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को आर्थिक और सैन्य सहायता दी है। हथियारों, वित्तीय मदद और अन्य संसाधनों के जरिए यूक्रेन का समर्थन किया जा रहा है। दूसरी तरफ रूस का कहना है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा के लिए यह संघर्ष लड़ रहा है।
युद्ध के कारण दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा है। ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। रूस दुनिया के प्रमुख तेल और गैस उत्पादक देशों में शामिल है। युद्ध शुरू होने के बाद कई देशों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश करनी पड़ी।
इसका असर ईंधन की कीमतों पर भी पड़ा। कई देशों में तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली। हालांकि समय के साथ कुछ बाजारों में स्थिरता आई, लेकिन अनिश्चितता अब भी बनी हुई है।
खाद्यान्न बाजार भी इस युद्ध से प्रभावित हुआ है। रूस और यूक्रेन दोनों गेहूं समेत कई कृषि उत्पादों के बड़े निर्यातक हैं। युद्ध के कारण सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे कई देशों में खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी।
भारत जैसे देशों पर भी इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। तेल की कीमतों में बदलाव, वैश्विक व्यापार में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की समस्याएं इसके उदाहरण हैं।
हाल की रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि यूक्रेन ने रूस के कब्जे वाले क्षेत्रों से जुड़े कुछ जहाजों को निशाना बनाने का दावा किया है। यूक्रेन का आरोप है कि ये जहाज अवैध कार्गो ले जा रहे थे। हालांकि युद्ध के दौरान दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि हमेशा संभव नहीं होती।
इस युद्ध की एक खास बात ड्रोन तकनीक का बढ़ता उपयोग है। पहले युद्धों में टैंक और लड़ाकू विमानों की भूमिका प्रमुख होती थी, लेकिन अब ड्रोन भी युद्ध की रणनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
रूस और यूक्रेन दोनों लगातार ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। कम लागत और लंबी दूरी तक पहुंच की वजह से ड्रोन आधुनिक युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
युद्ध विशेषज्ञों का कहना है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष ने आधुनिक सैन्य तकनीक के इस्तेमाल को नई दिशा दी है। दुनिया भर की सेनाएं इस युद्ध से सीख लेने की कोशिश कर रही हैं।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों देशों से बातचीत की अपील कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र समेत कई वैश्विक संस्थाओं ने संघर्ष रोकने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
लेकिन जमीन पर हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। हमले जारी हैं और दोनों पक्ष अपने-अपने सैन्य अभियानों को आगे बढ़ा रहे हैं।
ताजा रूसी हमले और पुतिन के बयान ने एक बार फिर यह दिखाया है कि युद्ध समाप्त होने का रास्ता आसान नहीं है। शांति वार्ता की संभावनाएं फिलहाल कमजोर दिखाई दे रही हैं।
दुनिया भर के देशों की नजर अब अगले घटनाक्रम पर टिकी है। लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या भविष्य में रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत का कोई नया रास्ता निकलेगा या संघर्ष इसी तरह जारी रहेगा।
फिलहाल इतना तय है कि इस युद्ध का असर केवल रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं है। इसकी गूंज वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और खाद्य आपूर्ति तक सुनाई देती है। ताजा हमलों ने एक बार फिर याद दिलाया है कि चार साल बाद भी रूस-यूक्रेन युद्ध दुनिया की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों में से एक बना हुआ है।
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