जोधपुर की गाइनकोलॉजिस्ट डॉ. सोनल पारीहर ने कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 के रेड कार्पेट पर ई-वेस्ट से बने खास गाउन में हिस्सा लेकर सबका ध्यान खींचा। पुराने कंप्यूटर चिप्स, मदरबोर्ड और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री से तैयार इस गाउन के जरिए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और ई-वेस्ट रिसाइक्लिंग का संदेश दिया। उनकी इस अनोखी पहल ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर राजस्थान और भारत का नाम रोशन करने के साथ सस्टेनेबल फैशन की चर्चा को भी नई पहचान दी।
राजस्थान के जोधपुर की रहने वाली डॉक्टर सोनल पारीहर इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इसकी वजह उनका कोई मेडिकल रिसर्च या अस्पताल से जुड़ा काम नहीं, बल्कि फ्रांस में आयोजित दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म आयोजनों में से एक कान्स फिल्म फेस्टिवल में उनकी खास मौजूदगी है। डॉक्टर सोनल ने कान्स 2026 के रेड कार्पेट पर ऐसा गाउन पहनकर कदम रखा, जो पुराने कंप्यूटर पार्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक कचरे यानी ई-वेस्ट से तैयार किया गया था। उनके इस अनोखे अंदाज ने फैशन और पर्यावरण संरक्षण दोनों को एक साथ जोड़ दिया।
कान्स फिल्म फेस्टिवल को दुनिया का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित फिल्म समारोह माना जाता है। हर साल यहां फिल्म जगत की बड़ी हस्तियां, मॉडल, कलाकार और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग हिस्सा लेते हैं। रेड कार्पेट पर सबसे ज्यादा चर्चा अक्सर फैशन और डिजाइनर ड्रेस की होती है। ऐसे मंच पर जब जोधपुर की एक डॉक्टर ई-वेस्ट से बने गाउन में पहुंचीं तो लोगों का ध्यान स्वाभाविक रूप से उनकी ओर गया।
डॉ. सोनल पारीहर पेशे से गाइनकोलॉजिस्ट हैं। चिकित्सा क्षेत्र में काम करने के साथ-साथ वे सामाजिक और पर्यावरणीय विषयों को लेकर भी सक्रिय रहती हैं। कान्स में उनकी मौजूदगी सिर्फ फैशन का हिस्सा नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत संदेश भी छिपा था। उनका उद्देश्य लोगों का ध्यान बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक कचरे की समस्या की ओर आकर्षित करना था।
आज के समय में लगभग हर व्यक्ति मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, टैबलेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल करता है। तकनीक ने जिंदगी को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ एक नई समस्या भी तेजी से बढ़ी है, जिसे ई-वेस्ट कहा जाता है। जब पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खराब हो जाते हैं या उनकी जगह नए उपकरण आ जाते हैं, तब वे कचरे में बदल जाते हैं। यही इलेक्ट्रॉनिक कचरा ई-वेस्ट कहलाता है।
दुनिया भर में हर साल लाखों टन ई-वेस्ट पैदा होता है। इसमें मोबाइल फोन, कंप्यूटर, टीवी, चार्जर, बैटरी, केबल और कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल होते हैं। इनमें मौजूद कई धातुएं और रासायनिक तत्व पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। यदि इन्हें सही तरीके से रिसाइकिल नहीं किया जाए तो यह मिट्टी, पानी और हवा को प्रभावित कर सकते हैं।
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9 जून 2026
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इसी मुद्दे को सामने लाने के लिए डॉक्टर सोनल ने कान्स जैसे बड़े मंच को चुना। उनके गाउन में पुराने कंप्यूटर मदरबोर्ड, चिप्स, सर्किट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक हिस्सों का इस्तेमाल किया गया था। इन सामग्रियों को पहले साफ किया गया और फिर डिजाइन टीम ने उन्हें एक खास तरीके से गाउन में शामिल किया। नतीजा यह हुआ कि एक ऐसा परिधान तैयार हुआ जो देखने में आकर्षक भी था और पर्यावरण का संदेश भी देता था।
जानकारी के अनुसार, इस गाउन को तैयार करने में काफी समय लगा। डिजाइन तैयार करने से पहले यह समझना जरूरी था कि इलेक्ट्रॉनिक सामग्री को किस तरह इस्तेमाल किया जाए ताकि पहनने वाले को असुविधा न हो। डिजाइनरों ने इस बात का भी ध्यान रखा कि गाउन का वजन ज्यादा न हो और उसका लुक रेड कार्पेट के अनुरूप दिखाई दे।
कान्स फिल्म फेस्टिवल में हर साल दुनिया के बड़े फैशन ब्रांड अपने सबसे महंगे और खास डिजाइन पेश करते हैं। ऐसे माहौल में ई-वेस्ट से बने गाउन का नजर आना अपने आप में अलग और खास था। यही वजह रही कि कई लोगों ने इसे सस्टेनेबल फैशन यानी पर्यावरण के अनुकूल फैशन का अच्छा उदाहरण बताया।
पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में सस्टेनेबल फैशन को लेकर जागरूकता बढ़ी है। फैशन इंडस्ट्री पर अक्सर अधिक संसाधनों के उपयोग और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इसके बाद कई डिजाइनर और ब्रांड ऐसे विकल्पों पर काम कर रहे हैं जो पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाएं। रिसाइकिल सामग्री से बने कपड़े और उत्पाद इसी दिशा में उठाए गए कदमों में शामिल हैं।
डॉ. सोनल का गाउन भी इसी सोच का हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि जो चीजें आमतौर पर बेकार समझकर फेंक दी जाती हैं, उन्हें नई सोच और रचनात्मकता के साथ उपयोगी बनाया जा सकता है। यह संदेश केवल फैशन जगत तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
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राजस्थान और खासकर जोधपुर के लोगों के लिए यह पल गर्व का विषय माना जा रहा है। आमतौर पर छोटे और मध्यम शहरों से आने वाले लोगों को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचने के लिए ज्यादा संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में जोधपुर की एक डॉक्टर का कान्स जैसे बड़े मंच पर पहुंचना और वहां अलग पहचान बनाना युवाओं के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है। इस घटना का एक और पहलू भी है। अक्सर लोगों को लगता है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों, बड़ी कंपनियों या पर्यावरण संगठनों की जिम्मेदारी है। लेकिन डॉक्टर सोनल की पहल यह दिखाती है कि कोई भी व्यक्ति अपने तरीके से इस दिशा में योगदान दे सकता है। चाहे वह डॉक्टर हो, शिक्षक हो, छात्र हो या कलाकार, हर व्यक्ति जागरूकता फैलाने में भूमिका निभा सकता है।
वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे के आसपास हुई इस चर्चा ने लोगों का ध्यान फिर से ई-वेस्ट की समस्या की ओर खींचा है। भारत समेत कई देशों में पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के सुरक्षित निपटान और रिसाइक्लिंग को लेकर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। लोगों को भी अब यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान को सामान्य कचरे के साथ नहीं फेंकना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि ई-वेस्ट को सही तरीके से रिसाइकिल किया जाए तो उससे कई उपयोगी धातुएं और सामग्री दोबारा प्राप्त की जा सकती हैं। इससे न केवल पर्यावरण को फायदा होता है बल्कि संसाधनों की बचत भी होती है। यही कारण है कि दुनिया भर में रिसाइक्लिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
डॉक्टर सोनल पारीहर की कान्स उपस्थिति ने यह भी दिखाया कि फैशन केवल सुंदर दिखने का माध्यम नहीं है। इसके जरिए सामाजिक और पर्यावरणीय संदेश भी दिए जा सकते हैं। जब कोई संदेश दुनिया के सबसे बड़े मंचों में से एक पर पहुंचता है तो उसकी पहुंच भी लाखों लोगों तक हो जाती है।
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सोशल मीडिया पर भी डॉक्टर सोनल की तस्वीरें और वीडियो लोगों का ध्यान खींचते नजर आए। कई लोगों ने उनके प्रयास की सराहना की और इसे पर्यावरण जागरूकता की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया। लोगों ने यह भी कहा कि ऐसे प्रयोग युवाओं को नई सोच अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
आज दुनिया तेजी से तकनीक पर निर्भर होती जा रही है। हर साल नए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बाजार में आते हैं और पुराने उपकरण तेजी से बेकार हो जाते हैं। ऐसे में ई-वेस्ट की मात्रा लगातार बढ़ रही है। इस चुनौती से निपटने के लिए केवल सरकारी योजनाएं ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है।
कान्स के रेड कार्पेट पर डॉक्टर सोनल पारीहर की मौजूदगी इसी जागरूकता का एक उदाहरण बनकर सामने आई है। जोधपुर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची उनकी यह यात्रा बताती है कि किसी बड़े बदलाव के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। कई बार एक अलग सोच, रचनात्मक विचार और मजबूत संदेश भी लोगों का ध्यान खींचने के लिए काफी होता है।
ई-वेस्ट से बना उनका गाउन केवल एक फैशन ड्रेस नहीं था, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, रिसाइक्लिंग और जिम्मेदार जीवनशैली की ओर इशारा करने वाला एक प्रतीक था। यही वजह है कि कान्स में उनकी यह उपस्थिति केवल रेड कार्पेट तक सीमित नहीं रही, बल्कि पर्यावरण और सस्टेनेबिलिटी पर चल रही वैश्विक चर्चा का भी हिस्सा बन गई।
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9 जून 2026