दक्षिण लेबनान के टायर शहर में इजरायली हवाई हमलों में सात लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच पहले घोषित युद्धविराम लगातार टूटता नजर आ रहा है। हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने नए सशर्त युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज करते हुए पूर्ण संघर्ष विराम और लेबनान से इजरायली सेना की वापसी की मांग की है। बढ़ते तनाव का असर तेल बाजार पर भी दिखा, जबकि संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने क्षेत्र की स्थिति पर चिंता जताई है।
इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच जारी तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। दक्षिण लेबनान के शहर टायर में हुए इजरायली हवाई हमलों में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब दोनों पक्षों के बीच पहले से घोषित युद्धविराम को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और शांति की कोशिशें भी मुश्किलों का सामना कर रही हैं।
लेबनान की सिविल डिफेंस एजेंसी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, टायर शहर में रात के दौरान दो अलग-अलग हवाई हमले किए गए। पहला हमला जबल आमेल अस्पताल के पास हुआ, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हुए। इस हमले से अस्पताल की इमारत को भी हल्का नुकसान पहुंचा।
दूसरा हमला शहर के एक रिहायशी इलाके में हुआ। इसमें तीन लोगों की मौत हुई जबकि पांच लोग घायल हुए। घायलों में दो बच्चे भी शामिल बताए गए हैं। हमलों के बाद इलाके में राहत और बचाव का काम शुरू किया गया।
इन घटनाओं ने अप्रैल में घोषित युद्धविराम की स्थिति पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच 17 अप्रैल को संघर्ष विराम की घोषणा की गई थी, लेकिन इसके बाद भी दोनों पक्षों के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई लगातार जारी रही हैं।
हाल के दिनों में अमेरिका की मध्यस्थता से लेबनान और इजरायल के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई थी। इस बातचीत के बाद एक सशर्त युद्धविराम प्रस्ताव सामने आया था। लेबनान के राष्ट्रपति ने इसे संघर्ष खत्म करने का आखिरी बड़ा मौका बताया था।
लेकिन हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि केवल सशर्त समझौता पर्याप्त नहीं है। हिजबुल्लाह की मांग है कि पूर्ण युद्धविराम लागू किया जाए और इजरायली सेना पूरी तरह लेबनानी क्षेत्र से वापस जाए।
नईम कासिम ने उत्तरी इजरायल पर नए हमलों की चेतावनी भी दी। उनके इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। इससे शांति वार्ता की संभावनाओं को भी झटका लगा है।
तनाव बढ़ने के बीच इजरायली सेना ने दक्षिण लेबनान के कुछ इलाकों के लोगों को चेतावनी जारी की है। सेना के अरबी भाषा के प्रवक्ता अविचाय अद्राई ने सोशल मीडिया पर एक संदेश जारी कर तीन गांवों के निवासियों से घर छोड़ने को कहा।
इजरायली सेना का कहना है कि इन इलाकों में हिजबुल्लाह से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। लोगों को कम से कम एक किलोमीटर दूर खुले क्षेत्रों में जाने की सलाह दी गई है। सेना ने दावा किया कि हिजबुल्लाह के लड़ाकों, हथियारों या ठिकानों के पास मौजूद लोगों की जान को खतरा हो सकता है।
दूसरी ओर हिजबुल्लाह लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि इजरायल युद्धविराम का उल्लंघन कर रहा है। संगठन का कहना है कि इजरायली सैनिक अब भी लेबनान के कुछ हिस्सों में मौजूद हैं। वहीं इजरायल का आरोप है कि हिजबुल्लाह अपनी सैन्य गतिविधियां जारी रखे हुए है और सीमा पार हमले कर रहा है।
संघर्ष का असर केवल लेबनान और इजरायल तक सीमित नहीं है। पूरे पश्चिम एशिया में इसके प्रभाव दिखाई दे रहे हैं। क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी पड़ा है।
शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। बाजार में चिंता बढ़ी क्योंकि हिजबुल्लाह ने नए युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया और क्षेत्र में संघर्ष जारी रहने के संकेत मिले। निवेशकों को आशंका है कि अगर तनाव और बढ़ा तो तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
इस बीच ओमान के मीना अल फहल तेल टर्मिनल से भी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई। वहां एक विस्फोट के बाद तेल लोडिंग अस्थायी रूप से रोक दी गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार यह घटना टर्मिनल के सिंगल बॉय मूरिंग क्षेत्र के पास हुई। कुछ रिपोर्टों में ड्रोन हमले की आशंका भी जताई गई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं का असर आने वाले समय में वैश्विक कीमतों पर पड़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। हाल ही में लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के एक सर्बियाई सैनिक की मौत हो गई थी। एक मोर्टार हमला संयुक्त राष्ट्र के एक ठिकाने के पास हुआ, जिसमें दो अन्य शांति सैनिक घायल हो गए।
भारत ने इस घटना की निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने हमले की निष्पक्ष जांच की मांग की और दोषियों को सजा दिलाने की बात कही। भारत ने घायल शांति सैनिकों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की है।
इसी दौरान संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था आईएईए ने भी चिंता जताई है। एजेंसी का कहना है कि वह पिछले वर्ष युद्ध से प्रभावित ईरान की कुछ परमाणु सुविधाओं का निरीक्षण नहीं कर पाई है। संस्था ने कहा कि वह ईरान में संवर्धित यूरेनियम के मौजूदा भंडार की स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी देने में सक्षम नहीं है।
आईएईए ने ईरान से अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करने की अपील की है। एजेंसी का कहना है कि परमाणु गतिविधियों की निगरानी और सत्यापन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है।
पश्चिम एशिया में जारी यह संकट अब कई स्तरों पर असर दिखा रहा है। लेबनान और इजरायल की सीमा पर तनाव बना हुआ है, युद्धविराम की कोशिशें सफल नहीं हो पा रही हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया है। ऐसे में दुनिया की नजरें आने वाले दिनों की कूटनीतिक कोशिशों और जमीनी हालात पर बनी हुई हैं।
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