इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से जुड़े Orbital Edge Accelerator 2026 प्रोग्राम के लिए आवेदन की तारीख बढ़ा दी गई है। शुरुआती स्टेज के स्पेस और डीप-टेक स्टार्टअप्स को इस प्रोग्राम के जरिए लाखों डॉलर की फंडिंग और ISS पर माइक्रोग्रैविटी में प्रयोग करने का मौका मिलेगा।
स्पेस-टेक और डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से जुड़ा बड़ा अवसर कुछ दिन और खुला रहेगा। ISS National Lab ने Orbital Edge Accelerator 2026 प्रोग्राम के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 26 मई से बढ़ाकर 4 जून 2026 कर दी है। संस्थान के मुताबिक यह फैसला स्टार्टअप्स की ओर से मिले मजबूत रिस्पॉन्स के बाद लिया गया, ताकि ज्यादा टीमें अपने कॉन्सेप्ट भेज सकें।
यह प्रोग्राम खास तौर पर उन शुरुआती स्टार्टअप्स के लिए बनाया गया है जो लो-अर्थ ऑर्बिट यानी LEO वातावरण में अपनी टेक्नोलॉजी टेस्ट करना चाहते हैं। चयनित कंपनियों को न सिर्फ फंडिंग मिलती है, बल्कि उन्हें ISS पर माइक्रोग्रैविटी एक्सपेरिमेंट करने का मौका भी दिया जाता है।
Orbital Edge Accelerator की शुरुआत 2025 में हुई थी। इसका फोकस उन सेक्टरों पर है जहां माइक्रोग्रैविटी रिसर्च से तकनीक को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसमें बायोटेक, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, मटेरियल साइंस, रोबोटिक्स और दूसरी डीप-टेक कैटेगरी शामिल हैं।
ISS National Lab की जानकारी के मुताबिक चुनी गई कंपनियों को 5 लाख डॉलर से 7.5 लाख डॉलर तक की निजी पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी। यह निवेश कई पार्टनर संस्थाओं और निवेशकों के कंसोर्टियम के जरिए दिया जाएगा। इसमें Stellar Ventures, E2MC, Cook Inlet Region Inc., Context Ventures, Draper Associates और Draper University जैसे नाम शामिल हैं।
प्रोग्राम की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार फिलहाल “कॉनसेप्ट एप्लिकेशन सबमिशन पीरियड” खुला हुआ है। 4 जून तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे, जिसके बाद चयनित स्टार्टअप्स को अगली प्रक्रिया के लिए आमंत्रित किया जाएगा। आगे की स्टेज में तकनीकी मूल्यांकन, मिशन प्लानिंग और प्रयोग की व्यवहार्यता से जुड़ी जांच भी शामिल होगी।
ISS National Lab ने सोशल मीडिया अपडेट में कहा कि इस बार प्रोग्राम को लेकर काफी ज्यादा दिलचस्पी देखने को मिली है। इसी वजह से डेडलाइन आगे बढ़ाई गई, ताकि ऐसी टीमें भी आवेदन कर सकें जो तय समय तक अपना प्रस्ताव पूरा नहीं कर पाई थीं।
प्रोग्राम में फंडिंग के अलावा एक अतिरिक्त प्रोत्साहन भी रखा गया है। Boeing की ओर से 1 लाख डॉलर का विशेष पुरस्कार दिया जाएगा, जिसके लिए चयनित स्टार्टअप्स प्रतिस्पर्धा करेंगे। यह पुरस्कार उन कंपनियों के लिए अहम माना जा रहा है जो शुरुआती चरण में प्रोडक्ट वैलिडेशन और रिसर्च कॉस्ट से जूझ रही हैं।
स्पेस सेक्टर में माइक्रोग्रैविटी रिसर्च को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि पृथ्वी के सामान्य वातावरण में कई वैज्ञानिक प्रक्रियाओं की सीमाएं होती हैं। ISS पर प्रयोग करने से कंपनियों को ऐसा डेटा मिल सकता है जो पारंपरिक लैब में हासिल करना मुश्किल होता है। इससे नई दवाओं, उन्नत मटेरियल और हाई-परफॉर्मेंस इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी विकसित करने में मदद मिल सकती है।
ISS National Lab के मुताबिक चयनित स्टार्टअप्स को ऑपरेशनल सपोर्ट भी मिलेगा। इसमें एक्सपेरिमेंट डिजाइन, स्पेस मिशन इंटीग्रेशन और डेटा हैंडलिंग जैसी तकनीकी सहायता शामिल है। शुरुआती स्टार्टअप्स के लिए यह हिस्सा इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि स्पेस-आधारित प्रयोग सामान्य रिसर्च प्रोजेक्ट्स की तुलना में काफी जटिल होते हैं।
भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए भी इस तरह के प्रोग्राम को महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत में स्पेस-टेक स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ी है और कई कंपनियां सैटेलाइट, लॉन्च सिस्टम, रोबोटिक्स और एडवांस्ड रिसर्च टेक्नोलॉजी पर काम कर रही हैं। ऐसे में Orbital Edge Accelerator जैसे प्लेटफॉर्म ग्लोबल स्तर पर रिसर्च और फंडिंग तक पहुंच का नया रास्ता खोल सकते हैं।
हालांकि इस प्रोग्राम में चयन आसान नहीं माना जाता। आवेदन करने वाली टीमों को मजबूत तकनीकी प्रस्ताव, स्पष्ट बिजनेस मॉडल और स्पेस वातावरण में प्रयोग की उपयोगिता साबित करनी होती है। ISS National Lab ने फिलहाल चयन प्रक्रिया की अगली तारीखों का विस्तृत कैलेंडर जारी नहीं किया है।
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