मणिपुर के चुराचांदपुर जिले के मोलबेम गांव के लालकंसुंग की कहानी एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। 2019 में 10 साल की उम्र में उसने गहरे तालाब में डूब रही तीन बच्चियों की जान बचाई थी।
मणिपुर के चुराचांदपुर जिले के मोलबेम गांव के रहने वाले लालकंसुंग की बहादुरी इन दिनों फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में है। कुछ साल पहले हुए इस बचाव अभियान की वीडियो क्लिप, इंस्टाग्राम रील्स और शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री दोबारा वायरल होने के बाद लोग उसे “जल नायक” कहकर याद कर रहे हैं।
यह घटना 2 जुलाई 2019 की बताई जाती है। उस समय लालकंसुंग की उम्र करीब 10 साल थी। सोशल मीडिया और The Better India पर साझा जानकारी के मुताबिक, गांव के पास बने एक गहरे तालाब में तीन बच्चियां नहाने गई थीं। खेलते-खेलते वे तालाब के ज्यादा गहरे हिस्से में पहुंच गईं और डूबने लगीं।
बताया जाता है कि उस समय आसपास मौजूद बड़े लोग तुरंत पानी में उतरने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। तभी लालकंसुंग ने बिना देर किए तालाब में छलांग लगा दी। उसने एक-एक कर तीनों बच्चियों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू की।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, तालाब काफी गहरा था और कई वयस्क भी उसमें उतरने से बचते थे। इसके बावजूद लालकंसुंग लगातार पानी में तैरता रहा। पहले उसने एक बच्ची को किनारे की तरफ धकेला, फिर दूसरी को पकड़कर बाहर लाया। इसके बाद वह तीसरी बच्ची तक पहुंचा, जो सबसे ज्यादा अंदर चली गई थी।
उस समय न तो उसके पास लाइफ जैकेट थी और न ही किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था। उम्र और कद दोनों में छोटा होने के बावजूद उसने जिस तरह तीनों की जान बचाई, वही वजह है कि उसकी कहानी आज भी लोगों को प्रभावित करती है।
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और कुछ सामाजिक संगठनों ने लालकंसुंग को सम्मानित भी किया था। कई स्थानीय रिपोर्ट्स में उसे “चुराचांदपुर का छोटा नायक” कहा गया। अब सोशल मीडिया पर उसकी कहानी फिर सामने आने के बाद नई पीढ़ी भी उसके बारे में जान रही है।
हाल के दिनों में वायरल हो रही रील्स में “Heroes are defined by courage, not age” जैसी लाइनें इस्तेमाल की जा रही हैं। कई लोग इसे बच्चों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण के तौर पर शेयर कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे ग्रामीण और अनजान नायकों की कहानियों को ज्यादा जगह मिलने लगी है, जिन्हें पहले सीमित इलाकों तक ही लोग जानते थे।
बाल अधिकार और सामाजिक मुद्दों से जुड़े कई प्लेटफॉर्म भी अब ऐसे बच्चों की कहानियां सामने ला रहे हैं, जिन्होंने मुश्किल हालात में साहस दिखाया। लालकंसुंग की कहानी भी उन्हीं उदाहरणों में शामिल हो गई है, जहां बिना किसी प्रशिक्षण या संसाधन के एक बच्चे ने बड़ा जोखिम उठाकर दूसरों की जान बचाई।
यह कहानी सिर्फ बहादुरी तक सीमित नहीं है। कई लोग इसे बच्चों में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना से भी जोड़कर देख रहे हैं। आमतौर पर बच्चों की चर्चा पढ़ाई, परीक्षा या करियर के संदर्भ में होती है, लेकिन ऐसे उदाहरण यह भी दिखाते हैं कि कम उम्र में भी मानवीय समझ और साहस बड़े फैसले लेने में मदद कर सकते हैं।
ग्रामीण इलाकों में तालाब और जलाशयों के आसपास सुरक्षा इंतजाम अक्सर सीमित होते हैं। ऐसे में बच्चों को पानी के पास सावधानी बरतने और तैराकी जैसी बुनियादी जानकारी देने की जरूरत पर भी चर्चा हो रही है।
सोशल मीडिया पर लाखों व्यूज हासिल कर रही लालकंसुंग की कहानी अब सिर्फ मणिपुर तक सीमित नहीं रही। देश के अलग-अलग हिस्सों के लोग इसे साझा कर रहे हैं और एक छोटे बच्चे की हिम्मत को सलाम कर रहे हैं, जिसने खतरे के वक्त खुद की परवाह किए बिना तीन जिंदगियां बचाने की कोशिश की।
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