माउंट एवरेस्ट पर 29 मई से लापता नेपाली पर्वतारोही और गाइड हिलरी दावा शेरपा करीब छह दिन बाद जीवित मिले हैं। बेहद कठिन परिस्थितियों में उनका जीवित बचना पर्वतारोहण जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है।
दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर लापता हुए अनुभवी नेपाली पर्वतारोही और गाइड हिलरी दावा शेरपा को लगभग छह दिन बाद जीवित खोज लिया गया है। 52 वर्षीय दावा शेरपा 29 मई को एवरेस्ट के कैंप III के ऊपर के खतरनाक क्षेत्र में लापता हो गए थे। यह इलाका पर्वतारोहियों के लिए सबसे जोखिमपूर्ण माना जाता है, जहां तेज हवाएं, अचानक मौसम परिवर्तन और ऑक्सीजन की भारी कमी जैसी चुनौतियां लगातार बनी रहती हैं।
Mount Everest के इस उच्च हिमालयी क्षेत्र में उनकी गुमशुदगी के बाद तुरंत ही बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान शुरू किया गया था। शुरुआती दिनों में कोई ठोस सुराग नहीं मिलने के कारण चिंता लगातार बढ़ती जा रही थी। पर्वतारोहण सीजन भी अपने अंतिम चरण में था, जिसके चलते कई अस्थायी रस्सियां, मार्ग और बेस कैंप ढांचे हटाए जाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। ऐसे समय में किसी लापता व्यक्ति का जीवित मिलना बेहद कठिन माना जाता है।
कैसे लापता हुए थे दावा शेरपा? जानकारी के अनुसार, दावा शेरपा 29 मई को कैंप III से ऊपर के क्षेत्र में एक टीम का मार्गदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान अचानक मौसम बिगड़ गया और दृश्यता बेहद कम हो गई। तेज हवाओं और बर्फीले तूफान के बीच उनकी टीम से संपर्क टूट गया। कुछ ही समय में वे अन्य पर्वतारोहियों से अलग हो गए और रेडियो सिग्नल भी कमजोर पड़ने लगे।
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खोज अभियान में आई चुनौतियां खोज अभियान में कई अंतरराष्ट्रीय और नेपाली रेस्क्यू टीमों ने हिस्सा लिया। ड्रोन, हेलीकॉप्टर और उच्च ऊंचाई पर काम करने वाले शेरपा दलों को लगातार कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। ऊंचाई अधिक होने के कारण ऑक्सीजन की कमी, तापमान में अचानक गिरावट और खतरनाक हिमस्खलन की आशंका ने बचाव कार्य को और जटिल बना दिया। कई दिनों तक लगातार तलाशी के बावजूद कोई ठोस संकेत नहीं मिला, जिससे यह आशंका बढ़ गई कि परिस्थितियां बेहद गंभीर हो सकती हैं।
कैसे मिला सुराग? छठे दिन खोज टीम को एक संकरे बर्फीले ढलान के पास हल्की गतिविधि का संकेत मिला। जब टीम वहां पहुंची तो पाया कि दावा शेरपा बेहद कमजोर स्थिति में जीवित थे। उन्होंने खुद को बर्फ और तेज हवाओं से बचाने के लिए एक छोटे से प्राकृतिक गड्ढे का सहारा लिया था। रेस्क्यू टीम ने तुरंत उन्हें प्राथमिक उपचार और ऑक्सीजन सपोर्ट दिया। इसके बाद उन्हें सुरक्षित निचले कैंप की ओर स्थानांतरित किया गया।
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स्वास्थ्य स्थिति और रिकवरी डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक ठंड और ऑक्सीजन की कमी में रहने के कारण उन्हें गंभीर थकान और हाइपोथर्मिया की स्थिति का सामना करना पड़ा। हालांकि, समय पर मिले बचाव के कारण उनकी स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है। उन्हें आगे के उपचार और निगरानी के लिए बेस कैंप से नीचे अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि रिकवरी में समय लगेगा, लेकिन उनकी हालत खतरे से बाहर है।
पर्वतारोहण समुदाय में राहत इस घटना ने पूरे पर्वतारोहण समुदाय को झकझोर दिया था। अनुभवी गाइड होने के कारण दावा शेरपा कई अंतरराष्ट्रीय अभियानों में हिस्सा ले चुके थे और उन्हें अत्यंत कुशल पर्वतारोही माना जाता है। उनके जीवित मिलने की खबर के बाद नेपाल के शेरपा समुदाय और पर्वतारोहियों में राहत और खुशी की लहर दौड़ गई है।
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निष्कर्ष Mount Everest पर हुई यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में जीवन और मृत्यु के बीच की दूरी कितनी कम होती है। लेकिन साथ ही यह भी साबित हुआ कि आधुनिक बचाव तकनीक, अनुभवी गाइड और तेज प्रतिक्रिया किसी भी असंभव स्थिति को भी संभव बना सकती है। दावा शेरपा की सुरक्षित वापसी को एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है, जिसने एक बार फिर पर्वतारोहण की दुनिया में उम्मीद और सावधानी—दोनों का संदेश दिया है।
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